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West Bengal: बेरोजगार शिक्षकों ने विकास भवन में किया प्रदर्शन, पुलिस ने किया लाठीचार्ज; दो महिलाएं जख्मी

Thu, 15 May 2025 10:00 PM IST
बशु जैन अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: बशु जैन Updated Thu, 15 May 2025 10:00 PM IST
सार

बिधाननगर के विकास भवन पर गुरुवार को नौकरी से निकाले गए शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि धक्का-मुक्की और चीख-पुकार से पूरा इलाका कांप उठा।

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Unemployed teachers demonstrated at Vikas Bhawan in kolkata, police lathicharged; two women injured
शिक्षकों को रोकती पुलिस। - फोटो : PTI

विस्तार

पश्चिम बंगाल के बिधाननगर के विकास भवन में गुरुवार को तब हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए जब लंबे समय से आंदोलन कर रहे नौकरी से निकाले गए अभ्यर्थियों ने उन पर अचानक राज्य पुलिस द्वारा लाठीचार्ज का आरोप लगाया। लाठी चार्ज में एक महिला आंदोलनकारी गंभीर रूप से घायल हो गईं। एक का पैर टूट गया, दूसरी को सिर में चोट आई। वे जमीन पर गिर पड़ीं और दर्द से तड़पती रहीं।

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इसका वीडियो साझा करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और आईटी सेल के संयोजक अमित मालवीय ने कहा कि इसके बावजूद पुलिस नहीं रुकी। वहां मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों पर भी लगातार लाठीचार्ज जारी रहा। हालात इतने बिगड़ गए कि धक्का-मुक्की और चीख-पुकार से पूरा इलाका कांप उठा।
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इस घटना को लेकर राज्य सरकार की भूमिका और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ पुलिस की दमनात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि राज्य सरकार के तानाशाही रवैये का भी प्रतीक है। पुलिस ने जिस तरह से आंदोलनकारियों को हटाने के लिए बर्बरता दिखाई, वह कई लोगों के अनुसार मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। घटना के बाद और अधिक तनाव फैलने की आशंका को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

Unemployed teachers demonstrated at Vikas Bhawan in kolkata, police lathicharged; two women injured
विकास भवन के बाहर मौजूद शिक्षकों की भीड़। - फोटो : PTI
शिक्षकों ने लगाए आरोप
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें घसीटकर वहां से हटा दिया गया। इसके बाद कुछ शिक्षक नौकरी से निकाले जाने का विरोध करने के लिए सड़क पर लेट गए। कई प्रदर्शनकारियों को विकास भवन परिसर के अंदर से उनके कॉलर से घसीटते हुए और पुलिस वाहनों में धकेलते हुए देखा गया, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शनकारियों में से एक महबूब मंडल ने कहा कि हम दोबारा परीक्षा नहीं देंगे। हमारी मांग है कि हमारी नौकरियां बहाल होनी चाहिए। जब तक मुख्यमंत्री खुद हमसे बात नहीं करतीं, हम यहां से नहीं जाएंगे। एक अन्य शिक्षक ने कहा कि पहले तो वे संस्थागत भ्रष्टाचार का सहारा लेकर हमारी नौकरियां छीन लेते हैं। फिर वे हमारा खून बहाने के लिए अपने पुलिस बल को हम पर छोड़ देते हैं। 

Unemployed teachers demonstrated at Vikas Bhawan in kolkata, police lathicharged; two women injured
प्रदर्शन करते शिक्षक। - फोटो : PTI
क्या है पूरा मामला
3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में एसएससी की तरफ से भर्ती अभियान के माध्यम से नियुक्त 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती को रद्द करने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2024 के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पूरी चयन प्रक्रिया को 'दूषित और दागी' करार दिया गया। बेरोजगार हुए लोगों ने दावा किया कि उनकी दुर्दशा का कारण एसएससी की तरफ से धोखाधड़ी के माध्यम से नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों और नहीं पाने वाले उम्मीदवारों के बीच अंतर करने में असमर्थता है।

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