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यूएनडीपी: प्राकृतिक क्षरण व विलुप्त हो रही प्रजातियों का नतीजा है महामारी

Mon, 21 Jun 2021 10:32 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 21 Jun 2021 10:32 AM IST
सार

  • बगई ने कहा, हमें भारत में एक ऐसी संस्कृति पैदा करने की दरकार है जो प्रकृति का सम्मान और इसकी परवाह करे।
  • भारत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है।
  • धरती जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में नुकसान और प्रदूषण के रूप में तीन संकटों का सामना कर रही है

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UNDP chief Atul Bagai says Corona epidemic is the result of natural degradation and extinction of species
यूएनडीपी- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम - फोटो : social media

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यूएनडीपी ने कोरोना वायरस को प्राकृतिक क्षेत्रों में गिरावट, लुप्त होती प्रजातियों और उनके शोषण का नतीजा बताया है। साथ ही भारत समेत अन्य देशों से परिस्थिति की क्षरण रोकने और उसे उलटने के प्रयास तेज करने की अपील की है।

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भारत में यूएनडीपी के प्रमुख अतुल बगई के मुताबिक, इस समय भारत समेत धरती जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में नुकसान और प्रदूषण के रूप में तीन संकटों का सामना कर रही है जो आपस में जुड़े हैं। उन्होंने कहा भारत ने दशकों से अल्पकालिक आर्थिक हितों का रास्ता अपनाया है, जिसने मनुष्य और दूसरे जीवों को सहयोग देने की पारिस्थितिकी तंत्र कि क्षमता को कम कर दिया है।
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भारत निभाए सक्रिय भूमिका
बगई ने कहा, मौजूदा स्थिति में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है हालांकि भारत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने और 2050 तक शून्य उत्सर्जन तक की मुहिम का हिस्सा बनने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है। इसके अलावा उसे और सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
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नई खाद्य प्रणालियों बने
यूएनडीपी के अधिकारी का कहना है कि अच्छे भविष्य के लिए भारत को ऐसी कार्यप्रणालियां तैयार करनी चाहिए जो प्रकृति के लिए हितकर, अपशिष्ट घटाने वाली और बदलाव के अनुकूल हों। उन्होंने बताया फिलहाल पारिस्थितिकी क्षरण के अनुसार, नकारात्मक प्रभावों के बारे में कम जागरूकता भी इसके पुनरुद्धार में बाधक है।

प्रकृति को दें सम्मान, करें परवाह
बगई के मुताबिक, हमें भारत में एक ऐसी संस्कृति पैदा करने की दरकार है जो प्रकृति का सम्मान और इसकी परवाह करें। प्रकृति के प्रति सम्मान हमारे देश को स्वस्थ और लोगों को सेहतमंद बनाएगा।


जलवायु परिवर्तन में युवाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि वे तापमान वृद्धि, जलवायु न्याय और जैव विविधता में क्षरण को लेकर महत्वपूर्ण बदलावों की मांग कर रहे व्यापक अंतरराष्ट्रीय आंदोलनों का हिस्सा हैं। मेरी युवाओं को सलाह है कि वे ज्यादा से ज्यादा इन मुद्दों के बारे में जानें और अपने आसपास ही बदलावों से जुड़े।

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