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खुलासा : सीमा पर रक्षा ढांचा बनाने में सहयोग, चीन निर्मित होवित्जर गन भी दिख रही

Mon, 26 Jun 2023 05:50 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Mon, 26 Jun 2023 05:50 AM IST
सार

फायर करने के बाद तेजी से भागने के लिए मशहूर यह होवित्जर गन पाकिस्तान ने चीन से खरीदी है। लंदन की रक्षा पत्रिका जेन्स के अनुसार, पाकिस्तान ने ऐसी 236 गन का सौदा किया है और पहला बैच उसे जनवरी 2022 में हासिल हुआ है।

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Under its nefarious designs against India China help Pakistan to build defense infrastructure Line of Control
नियंत्रण रेखा पर तैनात सुरक्षाकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

भारत के खिलाफ अपने नापाक मंसूबों के तहत चीन पाकिस्तान को नियंत्रण रेखा पर रक्षा ढांचा बनाने में पूरी मदद कर रहा है। इसमें ड्रोन, लड़ाकू विमानों की आपूर्ति, संचार टावर खड़े करना और भूमिगत केबल बिछाने जैसी मदद शामिल हैं।
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रक्षा अधिकारियों ने खुलासा किया कि पाकिस्तान के सदाबहार दोस्त की अपनी छवि मजबूत करने के साथ-साथ चीन उसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अपने शिविरों, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और पीओके में चीन निर्मित पनबिजली संयंत्रों की सुरक्षा के लिए यह मदद कर रहा है। इन अधिकारियों ने बताया कि हाल में विकसित किए गए 155एमएम ट्रक माउंटेड होवित्जर गन, एसएच-15 को भी कई बार नियंत्रण रेखा के पास देखा गया है।
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फायर करने के बाद तेजी से भागने के लिए मशहूर यह होवित्जर गन पाकिस्तान ने चीन से खरीदी है। लंदन की रक्षा पत्रिका जेन्स के अनुसार, पाकिस्तान ने ऐसी 236 गन का सौदा किया है और पहला बैच उसे जनवरी 2022 में हासिल हुआ है।  इसके अलावा, चीन की संचार कंपनी ने 2007 में पाक की कंपनी का अधिग्रहण कर चाइना मोबाइल पाकिस्तान का गठन किया था। पिछले साल अगस्त में पाक ने उसे पीओके मोबाइल सेवा प्रदान करने की अनुमति भी दी थी।  
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काराकोरम राजमार्ग पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता
विशेषज्ञों के अनुसार पीओके में चीन सेना की उपस्थिति खासकर 46 अरब डॉलर की लागत वाली चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के कारण है, जो काराकोरम राजमार्ग के जरिये कराची में ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है। काराकोरम राजमार्ग पर चीन ने अवैध कब्जा जमा रखा है। अधिकारियों ने संदेह जताया कि चीनी तकनीकी विशेषज्ञ पीओके के लीपा घाटी में सुरंगों का निर्माण कर रहे है, ताकि काराकोरम राजमार्ग तक पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग तैयार हो सके।

भारत की चिंताएं नजरअंदाज
भारत गिलगित व बाल्टिस्तान में चीन की उपस्थिति का लगातार विरोध करता रहा है और अधिकारियों ने बताया कि सेना सीमा पार के किसी भी प्रयास को नाकाम करने के लिए तैयार है। भारत-पाकिस्तान के बीच 25 फरवरी, 2021 से युद्धविराम लागू है।


पीओके में चीन के 36, 000 सुरक्षाकर्मी
जवाहरलाल नेहरू विवि में चीन अध्ययन के प्रोफेसर और चीन के प्रति भारतीय नीति से संबंधित थिंक टैंक का हिस्सा रहे श्रीकांत कोंडापल्ली ने कहा कि पाकिस्तान को दिए जा रहे हथियार इस क्षेत्र में चीन की अपने हितों को सुरक्षित रखने की नीति का हिस्सा हैं। सीपीईसी का शुरू होना पीओके में भारतीय चिंताओं को नजरअंदाज करना है। चीन ने पीओके में अपने बिजली निर्माण संयंत्रों की किसी भी आतंकी हमले से रक्षा के लिए करीब 36,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर रखा है। चीन यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस गांव भी बसा रहा है। आधुनिक युद्ध के लिए चौबीसों घंटे निगरानी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए चीन सीएच 4ए ड्रोन की आपूर्ति कर रहा है जो ऊंचाई वाले इलाकों में सर्विलांस को अंजाम देने में सक्षम है।
 
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