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निपाह वायरस से बेपरवाह, यह महिला रहती है 400 चमगादड़ों के साथ, नहीं होना चाहती अलग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Updated Fri, 25 May 2018 12:51 PM IST
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शांतिबेन प्रजापति
पूरे देश में जहां इस समय निपाह वायरल का डर फैला हुआ है वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी महिला भी है जो 400 चमगादड़ों के साथ बेफिक्र होकर रहती है। यह महिला गुजरात के अहमदाबाद से 50 किलोमीटर दूर राजपुर गांव में रहती है। उनका अपने चमगादड़ों से अलग होने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। यह स्तनपायी जीव उनके दो मकान वाले घर में रहते हैं। गांववाले 74 साल की शांताबेन प्रजापति को चमचिड़ियावाला बा (चमगादड़ों के साथ रहने वाली दादी) नाम से बुलाते हैं।
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प्रजापति ने कहा, 'मैंने निपाह वायरस के बारे में सुना है लेकिन मुझे कोई डर नहीं है। मैं अपने चमगादड़ों के साथ एक दशक से रह रही हूं। वह मेरा परिवार हैं। मेरे घर के अंदर उनकी आबादी तब और बढ़ गई जब मैंने आंगन में खाना बनाना और सोना शुरू किया।' उस कमरे में घर की नाममात्र की चीजें रखी हैं। चमगादड़ों के झुंड ने उनके घर की चारों दीवारें को अपना अड्डा बनाया हुआ है। इसकी शुरुआत एक दशक पहले हुई थी जब उनके घर की कच्ची दीवार को एक समूह ने अपना घर बनाया था।
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पहले तो प्रजापति काफी डर गईं थीं क्योंकि विशेषज्ञों द्वारा इन चमगादड़ों की पहचान लंबी पूंछ वाले जंतु के तौर पर की गई है जो रात में उड़ते हैं और सुबह वापस अपने घर आ जाते हैं। इस छोटे से समूह ने उनके पूरे घर को अपना बना लिया है। शांताबेन के साथ रहने वाला कोई नहीं है क्योंकि उनकी तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है और उनका बेटा मुंबई में रहता है। उन्होंने एक खेतिहर मजदूर के तौर पर काम करके अपने बच्चों का पालन-पोषण किया है क्योंकि जब वह 30 साल की थीं तभी उनकी पति कांजीभाई की आसमानी बिजली गिरने से मौत हो गई थी।
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बदबू से निजात पाने के लिए शांताबेन दिन में दो बार नीम और कपूर जलाया करती हैं और एक बाल्टी भरकर लीद इकट्ठा करती हैं। उन्होंने कहा, आस-पड़ोस के कुछ घरों में भी चमगादड़ रहते हैं। लेकिन उन्होंने जल्द ही केमिकल ट्रीटमेंट के जरिए उनसे निजात पा ली है। मैं ऐसा नहीं करना चाहती। जब उन्हें जाना होगा वह चले जाएंगे। मैं कौन होती हूं उनकी किस्मत का फैसला लेने वाली?