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नगा विधायकों को मुख्यमंत्री से समर्थन वापस लेने का अल्टीमेटम
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Fri, 17 Feb 2017 03:08 PM IST
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टीआर जेलियांग
- फोटो : Social Media
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पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड में महिला आरक्षण के मुद्दे पर जारी विवाद के बीच आंदोलनकारी नगा संगठनों ने राज्य के तमाम सत्तारूढ़ विधायकों से मुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग से 17 फरवरी तक समर्थन वापस लेने को कहा है। ज्वायंट कोआर्डिनेशन कमेटी (जेसीसी) की ओर से बुधवार को यहां जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी गई।
मालूम हो कि शहरी निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के फैसले के बाद नगा संगठन मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। इस मांग के समर्थन में बीते सोमवार से ही राज्य में बेमियादी बंद चल रहा है।
इन विधायकों से कहा गया है कि अगर उन्होंने तय समय यानी 17 फरवरी के भीतर मुख्यमंत्री से समर्थन वापस नहीं लिया, तो अगले विधानसभा चुनावों में उनको उनके चुनाव क्षेत्रों में नहीं घुसने दिया जाएगा।
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आंदोलन की अगुवाई करने वाली जेसीसी और नगालैंड ट्राइब्स एक्शन कमेटी ने राज्य सरकार के साथ-साथ राज्यपाल को भी चेतावनी दी है कि संगठन के समर्थकों पर अंकुश लगाने की तमाम कोशिशों के बावजूद उनका धैर्य खत्म हो रहा है। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सरकार व राज्यपाल पर होगी।
इन संगठनों ने अपने ताजा फरमान में बंद के दौरान पुलिस के अलावा दूसरे किसी सरकारी वाहन के सड़कों पर निकलने पर भी पाबंदी लगा दी है। उसने एक बयान में तमाम टेलीकॉम ऑपरेटरों को डाटा और इंटरनेट सेवाएं तत्काल बहाल करने या गंभीर नतीजा भुगतने की भी धमकी दी है। ध्यान रहे कि सरकार के निर्देश पर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
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मालूम हो कि शहरी निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के फैसले के बाद नगा संगठन मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। इस मांग के समर्थन में बीते सोमवार से ही राज्य में बेमियादी बंद चल रहा है।
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इन विधायकों से कहा गया है कि अगर उन्होंने तय समय यानी 17 फरवरी के भीतर मुख्यमंत्री से समर्थन वापस नहीं लिया, तो अगले विधानसभा चुनावों में उनको उनके चुनाव क्षेत्रों में नहीं घुसने दिया जाएगा।
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आंदोलन की अगुवाई करने वाली जेसीसी और नगालैंड ट्राइब्स एक्शन कमेटी ने राज्य सरकार के साथ-साथ राज्यपाल को भी चेतावनी दी है कि संगठन के समर्थकों पर अंकुश लगाने की तमाम कोशिशों के बावजूद उनका धैर्य खत्म हो रहा है। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सरकार व राज्यपाल पर होगी।
इन संगठनों ने अपने ताजा फरमान में बंद के दौरान पुलिस के अलावा दूसरे किसी सरकारी वाहन के सड़कों पर निकलने पर भी पाबंदी लगा दी है। उसने एक बयान में तमाम टेलीकॉम ऑपरेटरों को डाटा और इंटरनेट सेवाएं तत्काल बहाल करने या गंभीर नतीजा भुगतने की भी धमकी दी है। ध्यान रहे कि सरकार के निर्देश पर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।