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Russia Oil Exports: अमेरिका ने कहा- भारत पर प्रतिबंध लगाने का विचार नहीं, दोनों देशों के संबंध काफी महत्वपूर्ण
Thu, 09 Feb 2023 12:57 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Thu, 09 Feb 2023 12:57 AM IST
सार
Russia Oil Exports: भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद के संबंध में अमेरिकी अधिकारी केरेन डोनफ्राइड ने कहा कि इस दशक के अंत तक रूस के तेल और गैस उत्पादन में 50 फीसदी की गिरावट आएगी। हमारा प्रतिबंध लगाने की नीति में विश्वास नहीं है। भारत ने जो रुख अपनाया है, उससे हमें कोई परेशानी नहीं है।
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Karen Donfried
- फोटो : ANI
विस्तार
अमेरिकी विदेश विभाग में असिस्टेंट सेक्रेटरी (यूरोपीय और यूरेशियन मामले) केरेन डोनफ्राइड (Karen Donfried) ने बुधवार को कहा कि रूस से तेल खरीदने में भारत की ओर से अपनाए गए दृष्टिकोण से अमेरिका सहज है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का भारत पर प्रतिबंध लगाने का कोई विचार नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के बीच संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं।
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भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद के संबंध में मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए डोनफ्राइड ने कहा, 'हम भारत पर प्रतिबंध लगाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। भारत के साथ हमारे संबंध काफी मजबूत और महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी राजनयिक ने मानवीय सहायता के जरिए यूक्रेन के लोगों का समर्थन करने और बातचीत से रूस-यूक्रेन युद्ध को तत्काल खत्म करने के भारत के आह्वान का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस दशक के अंत तक रूस के तेल और गैस उत्पादन में 50 फीसदी की गिरावट आएगी। हमारा प्रतिबंध लगाने की नीति में विश्वास नहीं है। भारत ने जो रुख अपनाया है, उससे हमें कोई परेशानी नहीं है। रूस के बजट घाटे में पहले से ही परिणाम दिख रहा है।
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अमेरिकी अधिकारी ने आगे कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दावे का स्वागत करते हैं कि आज का युग युद्ध का नहीं है। साथ ही पिछले साल नवंबर में बाली जी20 शिखर सम्मेलन में वार्ता और कूटनीति के लिए उनकी टिप्पणियों का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि जी20 अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका सराहनीय है।
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भारत-अमेरिका ऊर्जा सुरक्षा एजेंडा महत्वपूर्ण
वहीं, अमेरिका के ऊर्जा संसाधन विभाग में असिस्टेंट सेक्रेटरी जियोफ्रे पयाट (Geoffrey Pyatt) ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले एक साल में वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बाधित करने के लिए जो कुछ किया है। उसको देखते हुए भारत और अमेरिका जिस ऊर्जा सुरक्षा एजेंडा पर आगे बढ़ रहे हैं, वह काफी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि रूस के तेल और गैस संसाधनों को हथियार बनाकर पुतिन ने दिखा दिया है कि रूस फिर कभी भी विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता नहीं बन सकेगा। रूस ने वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि भी की, जो अभी दुनियाभर में जारी है। रूस के भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता होने के संबंध में मीडिया के सवाल का उत्तर देते हुए पयाट ने कहा कि भले ही भारत प्राइस कैप में भागीदार नहीं है, फिर भी इसने अपने बातचीत के लाभ का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। तथ्य यह है कि रूसी कच्चे तेल की कीमत अधिक होने के कारण वैश्विक बाजार का बड़ा हिस्सा अब रूस से खरीदारी नहीं कर रहा है।
भारत की विकास गाथा में प्रमुख भागीदार बनना चाहता है अमेरिका
वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने कहा है कि अमेरिका न सिर्फ भारत का सुरक्षा साझेदार बनना चाहता है बल्कि उसकी असाधारण विकास गाथा में ‘प्रमुख भागीदार’ भी बनना चाहता है। पेंटागन के प्रेस सचिव ब्रिगेडियर जनरल पैट्रिक राइडर ने महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकियों पर हाल में शुरू की गई भारत और अमेरिका की पहल से जुड़े एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की।
राइडर ने कहा, अमेरिका सरकार, अमेरिकी उद्योग और हमारे विश्वविद्यालयों की उच्च स्तर की भागीदारी अभूतपूर्व है। यह इस बात का मजबूत संकेत है कि अमेरिका, भारत के सुरक्षा साझेदार से भी आगे, भारत की असाधारण विकास गाथा में भी अहम भागीदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा, रक्षा मंत्रालय व्हाइट हाउस के नेतृत्व में भारत-अमेरिका के बीच ‘इनीशिएटिव फॉर क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ (आईसीईटी) के तहत अन्य अमेरिकी निकायों और भागीदारों के साथ काम करने के लिए उत्साहित है। पेंटागन ने कहा कि भारत के साथ रक्षा-सुरक्षा सहयोग को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय उत्साहित है।
भारत के साथ और अधिक काम करे अमेरिका
अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान के प्रमुख रह चुके एडमिरल हैरी हैरिस ने कहा कि अमेरिका को भारत से मिलकर और अधिक काम करना चाहिए। उन्होंने चीन से अमेरिकी खतरे पर संसद में हुई सुनवाई में कहा, भारत एक अहम देश है। अमेरिका को नई दिल्ली में जल्द राजदूत भेजना चाहिए।