{"_id":"5f19812a6ffb13570b1b3150","slug":"uk-government-cannot-fix-time-limit-for-extraditing-fugitive-mallya-to-india-says-british-high-commissioner","type":"story","status":"publish","title_hn":"माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए समय सीमा तय नहीं कर सकते: ब्रिटिश उच्चायुक्त","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए समय सीमा तय नहीं कर सकते: ब्रिटिश उच्चायुक्त
Thu, 23 Jul 2020 06:04 PM IST
Rajeev Rai
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Thu, 23 Jul 2020 06:04 PM IST
विज्ञापन
Vijay Mallya
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत में नियुक्त ब्रिटिश उच्चायुक्त ने माल्या के प्रत्यर्पण मामले पर कहा है कि उसके लिए ब्रिटेन सरकार कोई समय सीमा निर्धारित नहीं कर सकती। सर फिलिप बार्टन ने कहा कि ब्रिटेन की सरकार भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं कर सकती है। हालांकि, यह अपराधियों को राष्ट्रीय सीमा पार कर न्याय से बच कर नहीं भागने देने के लिए कटिबद्ध है।
विज्ञापन
ऑनलाइन प्रेस वार्ता में जब उनसे यह पूछा गया कि क्या माल्या ने ब्रिटेन में शरण मांगी है, इस पर उच्चायुक्त ने कहा कि उनकी सरकार इस तरह के मुद्दों पर कभी टिप्पणी नहीं करती। बार्टन ने कहा, ‘ब्रिटेन की सरकार और अदालतें लोगों के दूसरे देश भागने से रोकने की अपनी भूमिका से बखूबी वाकिफ हैं। हम सभी किसी भी मामले में अपनी भूमिका को लेकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि राष्ट्रीय सीमाएं पार कर अपराधी न्याय के दायरे से नहीं बच निकलें।’
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि माल्या का प्रत्यर्पण एक जारी कानूनी मामला है और ब्रिटेन की सरकार का इस पर कोई नया निर्णय नहीं है। साथ ही, नवनियुक्त उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि ब्रिटेन की सरकार इस बात से वाकिफ है कि यह मामला भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने भारत ने कहा था कि उसने ब्रिटेन से अनुरोध किया है कि वह माल्या के शरण मांगने के किसी अनुरोध पर विचार नहीं करे क्योंकि इस देश में उसे प्रताड़ित किये जाने के लिए कोई आधार नहीं है।
ब्रिटेन सरकार ने यह संकेत दिया था कि माल्या को निकट भविष्य में भारत प्रत्यर्पित किए जाने की संभावना बहुत कम है। यह भी कहा था कि एक कानूनी मुद्दा है, जिसे उसके प्रत्यर्पण की व्यवस्था किये जा सकने से पहले हल किये जाने की जरूरत है।