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UIDAI ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- गूगल चाहता है फेल हो जाए आधार, इसलिए फैला रहा झूठ

Wed, 18 Apr 2018 10:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 18 Apr 2018 10:03 AM IST
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UIDAI said to Supreme Court that Google and smart card lobby did not want Aadhaar to succeed
आधार

यूआईडीएआई ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने आधार मामले की सुनवाई के दौरान हैरान करने वाला बयान दिया है। आधार की संरक्षक यूआईडीएआई ने आरोप लगाया है कि गूगल उसे विफल करने के लिए झूठ फैला रहा है। वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट में कहा कि गूगल और स्मार्ट कार्ड लॉबी चाहते हैं कि आधार असफल हो जाए। चूंकि यूआईडी पूरी तरह से सुरक्षित है और यह लोगों की पहचान प्रमाणित करने के लिए आसान रूप में उभर रहा है इसलिए उसे बिजनेस से बाहर करने के लिए झूठ फैलाया जा रहा है।

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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की पांच जजों वाली बेंच आधार मामले की सुनवाई कर रही है। उन्होंने पीठ को बताया कि यूरोप आधारित एक कॉमर्शियल वेंचर की ओर से ऐसा अभियान चलाया गया कि आधार को स्मार्ट कार्ड की तरह नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यदि आधार सफल हो जाता है तो स्मार्ट कार्ड बिजनेस से बाहर हो जाएंगे। गूगल ऐसा नहीं चाहता है। स्मार्ट कार्ड की लॉबी आधार को सफल होने देना नहीं चाहती है। इसी वजह से इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। दरअसल कोर्ट ने इस बात की आशंका जताई थी कि आधार के लिए ली गई जानकारी सुरक्षित है या नहीं।
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कुछ याचिकाकर्ताओं जिन्होंने आधार एक्ट को चुनौती दी है, उनका कहना है कि आधार के डाटा को यूआईडीए के पास ना रखकर एक डेबिट या क्रेडिट की तरह स्मार्ट कार्ड में रखा जाना चाहिए। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने द्विवेदी से पूछा कि मुख्य आशंका यह है कि आधार के लिए जो डाटा लिया गया है उस उपलब्ध डाटा से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि आधार के लिए लिया जाने वाला डाटा सुरक्षित है, यह कहना मुश्किल है क्योंकि देश में डाटा सुरक्षा को लेकर कोई कानून मौजूद नहीं है। 
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इसके जवाब में राकेश द्विवेदी ने कहा कि बायोमेट्रिक डाटा किसी के साथ शेयर नहीं किया जाता है। जिसका आधार है उसकी सहमति के बिना यह किसी और को नहीं दिया जाता है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि डाटा लीक ना हो लेकिन इसकी 100 फीसदी गारंटी नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसे फेसबुक लीक से जोड़ना सही नहीं है। कैंब्रिज एनालिटिका की तरह आधार आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का प्रयोग नहीं करता है और यह व्यक्तिगत है। इसे लेकर एक तरह का डर फैलाया जा रहा है कि डाटा असुरक्षित है।

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