सत्ता के 100 दिन पूरे होने पर अयोध्या जाएंगे उद्धव, भाजपा ने किया स्वागत, गठबंधन के बदले सुर
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महा विकास अघाड़ी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर भगवान राम के दर्शन करने अयोध्या जाएंगे। शिवसेना सांसद संजय राउत ने बुधवार को इसकी घोषणा की। संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे भगवान राम का आशीर्वाद लेने के लिए सत्ता में 100 दिन पूरे होने पर अयोध्या जाएंगे। हम चाहते हैं कि हमारे गठबंधन के नेताओं को भी साथ आना चाहिए। राहुल गांधी कई मंदिरों में भी जाते हैं।
Shiv Sena leader Sanjay Raut: Maharashtra CM Uddhav Thackeray will visit Ayodhya on the completion of 100 days in power, to seek the blessings of Lord Ram. We want that our alliance leaders should also come along. Rahul Gandhi also visits several temples. pic.twitter.com/AHwfDuwGoG
— ANI (@ANI) January 22, 2020विज्ञापन
भाजपा ने उद्धव के फैसले का किया स्वागत
वहीं, शिवसेना के पूर्व सहयोगी बीजेपी ने उद्धव सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने ट्वीट कर कहा कि वह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के इस फैसले का स्वागत करती हैं। मीनाक्षी ने कहा अच्छा है कि अपने इतिहास पर गर्व कर रहे हैं और अयोध्या जा रहे हैं, लेकिन जब वापस महाराष्ट्र जाएंगे तो उन्हें अपनी शक्ल कैसे दिखायेंगे जो श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं?
#UdhavThackeray सरकार के सौ दिन पूरे होने पर जायेगे अयोध्या, करेंगे रामलला के दर्शन।
सांसद @M_Lekhi ने कहा अच्छा है कि अपने इतिहास पर गर्व कर रहे हैं और अयोध्या जा रहे हैं लेकिन जब वापस महाराष्ट्र जायेगे तो उन्हें अपनी शक्ल कैसे दिखायेंगे जो श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं? pic.twitter.com/G2J5H08Zod — MLekhi office (@MLekhiOffice) January 23, 2020
राम मंदिर का निर्माण कांग्रेस पार्टी की भी इच्छा!
इसी के साथ उद्धव ठाकरे के फैसले ने कांग्रेस और एनसीपी खेमे को बेचैन कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने ट्वीट कर कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो ऐसी कांग्रेस पार्टी की भी इच्छा है! भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधीजी ने 1989 में भूमिका स्पष्ट की थी! मंदिर का निर्माण अयोध्या में कहां हो यह निर्णय उच्चतम न्यायालय को लेना था। न्यायालयके निर्णय के बाद अब यह विषय समाप्त हो चुका है।
इसलिए कौन कहां जाए ये उनका निर्णय है। हमारे लिए ईश्वर दर्शन आस्था एवं आत्म शुद्धि का विषय है। वो राजनीति एवं जनप्रदर्शन का विषय कतई नहीं है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम त्याग, प्रेम, करुणा एवं समता के प्रतिक थे। उनके दर्शन मात्र से मन का द्वेषभाव खत्म होकर सद्भावना का निर्माण होता है।
अयोध्यामें राम मंदिरका निर्माण हो ऐसी कांग्रेस पार्टीकी भी इच्छा है! भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधीजी ने १९८९ में भूमिका स्पष्ट की थी! मंदिरका निर्माण अयोध्यामें कहां हो यह निर्णय उच्चतम न्यायालयको लेना था। न्यायालयके निर्णयके बाद अब यह विषय समाप्त हो चुका है।
— Sachin Sawant सचिन सावंत (@sachin_inc) January 22, 2020
राउत ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सत्ता में 100 दिन पूरे होने के उपलक्ष्य पर प्रस्तावित अयोध्या दौरे में उनके सहयोगी दलों कांग्रेस एवं राकांपा का स्वागत है। राउत ने कहा कि भगवान राम की पूजा-अर्चना करने का उस सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम से कोई लेना देना नहीं है, जिसके आधार पर महाराष्ट्र में सरकार गठित करने के लिए वैचारिक रूप से अलग तीन दल एक साथ आए थे। राउत ने कहा कि हमने अपने सहयोगियों समेत सभी को आमंत्रित किया है। हर कोई अपने घर में भगवान राम की पूजा करता है। इसलिए वे अयोध्या में भी हमारे साथ मिलकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
नवंबर में उद्धव ने टाल दिया था अयोध्या दौरा
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम की पिछले साल अक्टूबर में घोषणा के बाद सत्ता साझा करने को लेकर मतभेद के कारण शिवसेना और भाजपा का गठबंधन टूट गया था। इसके बाद ठाकरे का उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या का यह पहला दौरा होगा। 9 नवंबर 2019 को अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उद्धव ठाकरे ने एलान किया था कि वह 24 नवंबर, 2019 को अयोध्या जाएंगे।
लेकिन राज्य में तेजी से बदले राजनीतिक हालात के चलते उन्होंने अयोध्या दौरा टाल दिया था। शिवसेना ने महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए अंत में राकांपा एवं कांग्रेस से हाथ मिला लिया था। ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और हाल ही में उन्होंने कार्यालय में 50 दिन पूरे किए।
जून 2019 में 18 सांसदों के साथ गए थे अयोध्या
ठाकरे आखिरी बार जून 2019 में पार्टी के नवनिर्वाचित 18 सांसदों के साथ अयोध्या गए थे और रामलला मंदिर में पूजा अर्चना की थी। उस वक्त शिवसेना भाजपा की सहयोगी पार्टी थी, लेकिन अब दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं।