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कितने तरह के होते हैं इंसानी कोरोनावायरस, क्या होते हैं इनके लक्षण?

Sun, 19 Apr 2020 05:52 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 19 Apr 2020 05:52 PM IST
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types of human coronavirus and the symptoms they cause
कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala

दुनिया में सैकड़ों कोरोना वायरस हैं जिनसे बिल्ली, ऊंट, सुअर और चमगादड़ जैसे जानवरों में बीमारी फैलती है लेकिन अब तक सात ऐसे कोरोना वायरस पाए गए हैं कि जिनसे व्यक्ति में इंफेक्शन फैला है। आइए जानते हैं कि कौन-से वो वायरस और क्या हैं उनके लक्षण...


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दुनिया में सैकड़ों कोरोना वायरस हैं जिनसे बिल्ली, ऊंट, सुअर और चमगादड़ जैसे जानवरों में बीमारी फैलती है लेकिन अब तक सात ऐसे कोरोना वायरस पाए गए हैं कि जिनसे व्यक्ति में इंफेक्शन फैला है। आइए जानते हैं कि कौन-से वो वायरस और क्या हैं उनके लक्षण...

क्या होता है कोरोना वायरस?
आरएनए वायरस का बड़ा परिवार कोरोना वायरस है जो कि जानवरों और इंसानों को संक्रमित करता है। इंसानों में वायरस सामान्य जुकाम जैसी बीमारी का ही कारण बनता है लेकिन पिछले दो दशकों से कोरोना वायरस गंभीर बीमारी का कारण बन रहा है जिससे मौत होने की भी संभावना होती है। इसमें सार्स-कोव, एमईआरएस, और सार्स-कोव 2 जैसे बीमारी शामिल है।

1960 के मध्य में सबसे पहला इंसानों में होने वाला कोरोना वायरस देखा गया। 1965 में वैज्ञानिक डी जे टीर्रेल और एम एल बाइनो ने इंसान में कोरोना वायरस की पहचान की थी। पहले इसे बी814 नाम दिया गया जो 1968 में बदलकर कोरोना में बदला गया। 

वायरस का नाम कोरोना इसलिए रखा गया क्योंकि माइक्रोस्कोप से देखने पर वायरस की सतह पर नुकीले खूंटी जैसा दिखाई दिया जो कुछ कुछ सिर का ताज (क्राउन) जैसा दिखाई पड़ता था। गाय और सुअर में डायरिया जैसी बीमारी कोरोना की वजह से हो सकती है। 1937 में कोरोना के संक्रमित व्यक्ति को पहली बार आइसोलेट किया गया था। 

कोरोना वायरस का वर्गीकरण

कोरोना वायरस
कोरोना वायरस - फोटो : सोशल मीडिया
मौटे तौर पर कोरोना वायरस (CoV) वायरस का बड़ा समूह है जो निडोविरलेस ऑर्डर से संबंधित है, इसमें कोरोनवीराइडे ( Coronaviridae), आर्टेरिवीराइडे (Arteriviridae) और रोनिवीराइडे (Roniviridae) परिवार शामिल हैं। 

कोरोना वायरस का वर्गीकरण इंटरनेशनल कमिटी फॉर टैक्सॉनोमी ऑफ वायरस के कोरोना वायरस स्टडी ग्रुप ने किया है। वाइरॉलोजी के जर्नल में छपे शोध के मुताबिक कोरोना वायरस की चार प्रकार के वायरस स्तनधारी जानवर में पाए जा सकते हैं। चमगादड़ में मिलने वाला कोरोना वायरस एल्फा और बीटा कोरोना के जीन से आते हैं वहीं पक्षी में पाए जाने वाला कोरोना में गामा और डेल्टा कोरोना के जीन पाए जाते हैं।

हालांकि पूरी दुनिया में सैकड़ों कोरोना वायरस है लेकिन इंसान में अभी तक सात कोरोना वायरस की पुष्टि हो पाई है। इन सातों वायरस में दो एल्फा कोरोना वायरस (229ई और एनएल63) और चार बीटा कोरोना वायरस (ओसी43, एचकेयू1, एमईआरएस और सार्स-सीओवी) हैं। कोरोना को वर्गीकरण वायरस के जातिवृत्त के आधार पर होता है। 

जब भी नया वायरस पैदा होता है, इसका वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि यह वायरस मौजूदा वायरसों से कैसे संबंधित है और तब वायरस को नाम दिया जाता है जैसे सार्स-सीओवी और सार्स सीओवी 2 पैत्रिक तौर पर संबंध रखते हैं।

इसके अलावा कोरोना वायरस का वर्गीकरण सीरमविज्ञान के आधार पर भी किया जा सकता है। इसमें वायरस को एक से तीन में तीन समूह में बांटा जा सकता है। एक और दो समूह में स्तनधारी जानवरों में होने वाला कोरोना वायरस रखा गया है और समूह तीन में पक्षियों को होने वाला कोरोना वायरस रखा गया है। 

पहले इंसानी कोरोना की पहचान कब हुई?

कोरोनावायरस
कोरोनावायरस - फोटो : pixabay
229ई(229E) - 1960 के मध्य में पहले कोरोना वायरस का उल्लेख है। डी हेमरे और जे जे प्रॉकनो ने मिलकर एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी और मेडिसिन में 1966 में एक पत्र छापा था जिसमें पहले कोरोना वायरस का वर्णन मिलता है।

ओसी43(OC43) - वाइरॉलोजी के जर्नल में छपे एक पत्र के मुताबिक ये वायरस 1967 में सबसे पहली बार पहचाना गया था। हालांकि पेपर में यह उल्लेख है कि पहले कोरोना वायरस की साल 1965 में पहचान की गई थी।  

एनएल63 और एचकेयू1(NL63 & HKU1) - इस वायरस की सबसे पहले 2004 में नीदरलैंड में पहचान की गई थी। एक सात महीने के नवजात बच्चे में से वायरस आइसोलेट किया गया। इस वक्त इंसान में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर होने वाले शोधों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। जिसके बाद हॉन्ग कॉन्ग में 2006 में एनएल63 और एचकेयू1 वायरस की पहचान में हुई।

सार्स-सीओवी(SARS-CoV) - 2003 में सबसे पहले चीन में इस वायरस की शुरुआत हुई हालांकि अब तक किसी जानवर की पहचान नहीं हो पाई है, ऐसा माना जाता है कि चमगादड़ों से यह वायरस दूसरे जानवरों में जाता है, ज्यादातर बिल्लियों में।

एमईआरएस(MERS) - यह वायरस 2012 में सऊदी अरब में मिला जो कि एक कूबड़ वाले ऊंट में पाया गया था।

सार्स-सीओवी 2(SARS-CoV 2) - पिछले साल 2019 में चीन के वुहान शहर में पाया गया, हालांकि इस वायरस के लिए अभी तक किसी जानवर की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चमगादड़ के होने की संभावना जताई जा रही है।

कोरोना वायरस जैसे लक्षणों से क्या बीमारी होती है?

कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
सार्स-सीओवी 2 और एमईआरएस से पहले सार्स-सीओवी ही इंसानी कोरोना वायरस का पहला उदाहरण था। सार्स-सीओवी वायरस की वजह से गंभीर बीमारी होने की संभावना रहती थी। इसके अलावा दूसरे इंसानी कोरोना वायरस जैसे ओसी43 और 229ई सामान्य जुकाम के लिए जाने जाते हैं और एनएल63 वायरस से न्यूमोनिया जैसी बीमारी होती है। 

माइक्रोबायोलॉजी और मोलिक्लूयर बायोलॉजी में छपे एक लेख के मुताबिक एनएन63 वायरस पहले बच्चों में होने वाले इंफेक्शन से जुड़ा था जबकि ओसी43 वायरस से आंत या पेट में जलन जैसी बीमारी होती थी।

वहीं सार्स-सीओवी 2 की पहचान 2003 में चीन में हुई थी। ऐसा माना जाता है कि यह वायरस चमगादड़ों से फैला है लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। इस वायरस से होने वाली बीमारी के लक्षण खांसी, सांस लेने में दिक्कत, डायरिया हो सकते हैं।

एमईआरएस भी एक तरह की वायरल बीमारी है जो इंसानों में हो सकती है। यह वायरस सबसे पहले सऊदी अरब में 2012 में पाया गया था। इसमें बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
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