नए अंदाज में अपने दो साल का हिसाब देगी मोदी सरकार
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बंधी बंधाई लीक से परे जा कर काम करने वाली मोदी सरकार अपने दो साल के कार्यकाल का लेखाजोखा भी नए अंदाज में देगी। इस बार सरकार का जोर योजनाओं की उपलब्धियां गिनाने पर नहीं बल्कि दो साल के कार्यकाल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में आए सकारात्मक बदलावों को गिनाने पर होगा।
यह बदलाव पार्टी के नेता और मंत्री नहीं बल्कि वरिष्ठ पत्रकार, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और नामचीन हस्तियों के जारिए सामने लाया जाएगा। पार्टी और सरकार ने अपने अपने क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने वाली हस्तियों से इस सिलसिले में संपर्क साधने की शुरुआत कर दी है।
मोदी सरकार अपने दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर बदलाव का अहसास कराने के लिए जिन क्षेत्रों का चुनाव किया है उसमें कृषि, अर्थव्यवस्था, विदेशी नीति और कौशल विकास शामिल है।
इसके अलावा बदलाव का अहसास कराने के लिए स्वच्छता अभियान विषय को भी चुना गया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विशेषज्ञों से बदलाव पर कलम चलवाने के बाद सरकार और पार्टी इसका किस प्रकार उपयोग करेगी।
पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्घे ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि विभिन्न क्षेत्रा के विशेषज्ञों से संपर्क साध कर उनसे विभिन्न क्षेत्रों में मोदी सरकार की पहल के कारण आए बदलावों के बारे में लिखने के लिए कहा गया है।
दरअसल पार्टी का मानना है कि मोदी सरकार के अभियानों, योजनाओं और उपलब्धियां गिनाने के लिए पार्टी और सरकार के स्तर पर लगातार युद्घस्तर पर प्रयास हो रहे हैं। ऐसे में मोदी सरकार की पहल पर बीते दो सालों में विभिन्न क्षेत्रों में आए बदलावों पर अगर पार्टी के इतर विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे तो इसका ज्यादा असर होगा। गौरतलब है कि पार्टी और सरकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, जनधन योजना, फसल बीमा योजना, ग्रामीण केंद्रित बजट की उपलब्धियां लगातार गिनाती आ रही हैं।
नए अभियान पर मोदी सरकार की नजर
कार्यकाल के दो साल पूरा हो जाने के बाद मोदी सरकार और पार्टी का पूरा जोर अपने एक नए सांस्कृतिक और वैचारिक अभियान छेड़ने पर है। प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि से जुड़ा एक भारत-श्रेष्ठ भारत अभियान पर विस्तृत मंथन हो रहा है।
सरकार और पार्टी की योजना देश को अलग-अलग 7 जोन में बांट कर इनके बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान करने की है। मसलन इस क्रम में एक जोन की संस्कृति की पहचान दूसरे जोन के लोगों से कराने के लिए प्रचलित नृत्यों, पाठ्यक्रमों और पर्वों का आदान प्रदान करने की है।
पार्टी और संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार किए जा रहे प्रारूप में एक दूसरे की संस्कृति को करीब से जानने केलिए एक से दूसरे जोन के बीच लोगों के विचारों के आदान प्रदान का भी सिलसिला शुरू करने पर जोर दिया गया है।
प्रारूप तैयार करने वलों का कहना है कि विविधता में एकता देश की ताकत होने के बावजूद एक क्षेत्र के लोग दूसरे क्षेत्र के जीवन संस्कृति से परिचित नहीं होते।