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भारतीय आईटी सेक्टर के लिए अमेरिका से आई दो बुरी खबरें!
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 04 Feb 2017 07:50 PM IST
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ट्रंप
- फोटो : ANI
भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के और कदम से चिंतित हैं। पहले से ही एच-1बी वीजा से परेशान कंपनियां अमेरिका की दो और कानूनों में परिवर्तन से आशंकित हैं। इसे अमेरिकी कांग्रेस में संज्ञान में लिया।
एच-1बी वीजा बिल में जहां न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर दोगुना (130000 अमेरिकी डॉलर) करने का प्रस्ताव है, वहीं 'एंड ऑफ आउटसोर्सिंग एक्ट' में आउटसोर्सिंग को बैन करने का प्रस्ताव है।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इसके साथ ही 2007 का एक विधेयक है जिसे सांसद चक ग्रैसली और डिक डर्बिन ने दोबारा पेश किया है। इसमें विजा सुधार की बात की गई है।
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एच-1बी वीजा बिल में जहां न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर दोगुना (130000 अमेरिकी डॉलर) करने का प्रस्ताव है, वहीं 'एंड ऑफ आउटसोर्सिंग एक्ट' में आउटसोर्सिंग को बैन करने का प्रस्ताव है।
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इसके साथ ही 2007 का एक विधेयक है जिसे सांसद चक ग्रैसली और डिक डर्बिन ने दोबारा पेश किया है। इसमें विजा सुधार की बात की गई है।
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निष्पक्षता बहाल करने के लिए विधेयक पेश करेंगे
डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : ANI
ग्रैसली और डर्बिन ने ऐलान किया है कि वे अमेरिका के कर्मचारियों को प्राथमिकता देने और वीजा प्रोग्राम में निष्पक्षता बहाल करने के लिए विधेयक पेश करेंगे।
ग्रैसली ने कहा, 'कांग्रेस ने इन प्रोग्राम्स की शुरुआत अमेरिकी हाई-स्किल वर्कफोर्स को और बेहतर करने के लिए की थी। अब अमेरिकी के कर्मचारी को ही रीप्लेस किया जा रहा है।
ग्रैसली ने कहा, 'कांग्रेस ने इन प्रोग्राम्स की शुरुआत अमेरिकी हाई-स्किल वर्कफोर्स को और बेहतर करने के लिए की थी। अब अमेरिकी के कर्मचारी को ही रीप्लेस किया जा रहा है।