सुप्रीम कोर्ट: नफरती भाषण मामले में पक्षकार बनाने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दो हिंदू संगठन, जानिए पूरा मामला
हिंदू सेना एनजीओ के विष्णु गुप्ता ने वकील बरुण कुमार सिन्हा के जरिए इस मामले में हस्तक्षेप आवेदन दिया है। उन्होंने कोर्ट से अलग-अलग राज्य सरकारों को असदुद्दीन ओवैसी के अलावा तौकीर रजा, साजिद रशीदी, अमानुल्लाह खान, वारिस पठान आदि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।
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दो हिंदू संगठन, हिंदू सेना और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस, हरिद्वार व नई दिल्ली में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ दिए गए नफरती भाषण के मामले में खुद को पक्षकार बनाने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। ये मामला पत्रकार कुर्बान अली और पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज अंजना प्रकाश की याचिका से जुड़ा है जिसमें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने 12 जनवरी को केंद्र, उत्तराखंड सरकार और दिल्ली पुलिस से नफरती भाषण मामले में जवाब मांग रखा है। याचिका में दो अलग-अलग जगह नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। इस मामले में यति नरसिंहानंद समेत कई लोग नामजद हैं।
हिंदू सेना एनजीओ के विष्णु गुप्ता ने वकील बरुण कुमार सिन्हा के जरिए इस मामले में हस्तक्षेप आवेदन दिया है। उन्होंने कोर्ट से अलग-अलग राज्य सरकारों को असदुद्दीन ओवैसी के अलावा तौकीर रजा, साजिद रशीदी, अमानुल्लाह खान, वारिस पठान आदि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है। गुप्ता का आरोप है कि इन सभी ने हिंदू समुदाय के अलावा देवी-देवताओं के खिलाफ नफरती भाषण दिए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इन सभी के खिलाफ जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग रखी है। दूसरा आवेदन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दिया है और उन्होंने भी कई मुस्लिम नेताओं द्वारा दिए नफरती भारत के लिंक कोर्ट को उपलब्ध कराए हैं।
धर्म संसद का आयोजन संविधान द्वारा संरक्षित
हिंदू सेना ने अपनी आवेदन में संविधान के अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का जिक्र करते हुए कहा है कि देश में हर किसी को धार्मिक उपासना और प्रचार का अधिकार हासिल है। ऐसे में धर्म संसद का आयोजन करना संविधान के अनुच्छेद 19(ए)(बी) और अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित है। मूल याचिकाकर्ताओं में से एक कुर्बान अली मुस्लिम समुदाय से आते हैं और इसलिए वह हिंदू धर्म संसद से जुड़ी गतिविधियों पर आपत्ति नहीं कर सकते। हिंदू सेना ने कहा कि यह याचिका दरअसल हिंदू संतों को स्कैंडल में घसीटने की कोशिश है।