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Mumbai: समुद्री तट पर जमीन वैध साबित करने के लिए 102 नक्शों से छेड़छाड़, दो पूर्व सरकारी कर्मी समेत 4 गिरफ्तार
Mon, 06 Jan 2025 05:43 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Mon, 06 Jan 2025 05:43 PM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर एक एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया था। एसआईटी ने जांच में खुलासा किया है कि उसने मुंबई तटरेखा के किनारे तटीय विनियमन क्षेत्र और नो डेवलपमेंट जोन भूमि पर बड़े स्तर पर कंस्ट्रक्शन पाया।
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हथकड़ी, arrest
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुंबई के तटवर्ती इलाके में भूमि रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें महाराष्ट्र सरकार के दो पूर्व कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोप है कि इन लोगों ने तटीय नियमन क्षेत्र (सीआरजेड) और नो डेवलपमेंट जोन (एनडीजेड) के तहत आने वाली जमीनों पर निर्माण के लिए संपत्ति रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की।
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हाईकोर्ट ने की थी SIT गठित
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर एक एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया था। एसआईटी ने जांच में खुलासा किया है कि उसने मुंबई तटरेखा के किनारे तटीय विनियमन क्षेत्र और नो डेवलपमेंट जोन भूमि पर बड़े स्तर पर कंस्ट्रक्शन पाया। इतना ही नहीं जमीन में निर्माण के लिए संपत्ति रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई। जांच के बाद बड़े स्तर पर भूमि घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
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इन लोगों पर आरोप
इसके अलावा सामने आया कि कुछ रियल एस्टेट एजेंट्स, राज्य सरकार के अधिकारी, नगर निगम के कर्मचारी और ठेकेदार इस मामले में शामिल थे। इन्होंने ही मार्वे, मड आइलैंड, वर्सोवा और अन्य पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील स्थानों में भूमि रिकॉर्ड में बदलाव किया। इस हेरफेर का मामला सबसे पहले मलाड के एरंगल के एक किसान वैभव मोहन ठाकुर सामने लाए थे। वैभव एक पैतृक कृषि भूमि के मालिक हैं।
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चार लोगों पर शिकंजा
तट के किनारे कम से कम 102 संपत्ति मानचित्रों से जुड़े घोटाले के लिए पिछले सप्ताह दो पूर्व सरकारी कर्मचारियों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कुल मिलाकर, बीएमसी और भूमि रिकॉर्ड अनुभाग के 18 सरकारी कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
क्या है पूरा मामला
वैभव ठाकुर ने 2021 में अपने प्लॉट और आस-पास की जमीनों पर अवैध निर्माण के खिलाफ गोरेगांव पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने पाया कि सीआरजेड और एनडीजेड भूखंडों को बनाने के लिए क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में जालसाजी की गई थी। हालांकि, बीएमसी और गोरेगांव पुलिस सहित अन्य अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया था कि 884 नक्शे फर्जी बनाए गए और कुछ घरों को 1964 से पहले बने हुए दिखाया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि माध द्वीप पर निर्माण को सीआरजेड नियमों से बचने के लिए नक्शों में बदलाव किया गया था।
कुछ समय के बाद भूमि अभिलेख उपाधीक्षक नितिन सालुंखे ने 2021 में एक और प्राथमिकी दर्ज की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए 2012 और 2020 के बीच नक्शे और दस्तावेजों में जालसाजी की गई। यह मामला 2022 में विधानसभा में गूंजा और सरकार को एक जांच समिति गठित की। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में अक्तूबर 2024 में एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। एसआईटी को कुल चार एफआईआर की जांच करने का काम सौंपा गया था। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम के नेतृत्व में चार गिरफ्तारियां की हैं।
एसआईटी के अनुसार, चारों आरोपियों ने सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर पिछले कुछ वर्षों में 102 संपत्ति मानचित्रों और अभिलेखों में हेराफेरी की। इसमें फर्जी सिटी सर्वे नंबर, गैर-मौजूद निर्माण और बदली हुई सीमाएं जैसे गलत विवरण शामिल थे। आरटीआई अनुरोध दाखिल करने की आड़ में जाली मानचित्र वितरित किए गए। बीएमसी अधिकारियों ने कथित तौर पर इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निर्माण और बिक्री को मंजूरी दी, जिससे सरकार को काफी पारिस्थितिकी क्षति और राजस्व का नुकसान हुआ।
जांच में पाया गया कि उप अधीक्षक के कार्यालय में रखे गए 1955-1984 के 884 स्थायी गणना मानचित्रों में से 102 फर्जी थे। इन मानचित्रों के आधार पर निर्माण किया गया, जो 1964 से पहले अस्तित्व में नहीं थे। अदालत अब इस मामले में फरवरी में सुनवाई करेगी।