Odisha: विधानसभा में विश्वविद्यालय और राज्य राजमार्ग प्राधिकरण विधेयक ध्वनिमत से पास, रातभर चली कार्यवाही
ओडिशा विधानसभा में रातभर चली कार्यवाही के बाद दो महत्वपूर्ण विधेयक- ओडिशा विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2024 और ओडिशा राज्य राजमार्ग प्राधिकरण विधेयक 2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। 12 घंटे तक चली बहस में बीजद सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, लेकिन कांग्रेस ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ओडिशा विधानसभा में बृहस्पतिवार को रातभर चली मैराथन के बाद दो महत्वपूर्ण विधेयकों को ध्वनिमत से पास कर दिया गया। इनमें ओडिशा विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2024 और ओडिशा राज्य राजमार्ग प्राधिकरण विधेयक 2025 शामिल हैं। मैराथन बहस में बीजू जनता दल (बीजद) सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जबकि कांग्रेस विधायकों ने इसे नजरअंदाज किया।
ओडिशा विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2024 भर्ती और अन्य गतिविधियों के लिए विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करता है। जबकि ओडिशा राज्य राजमार्ग प्राधिकरण विधेयक, 2025 राज्य में राजमार्गों और प्रमुख सड़कों के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए एनएचएआई की तर्ज पर एक निकाय स्थापित करने का प्रयास करता है।
ये भी पढ़ें: Odisha: ओडिशा में सीएम माझी ने 'शिशु वाटिका' पहल की शुरुआत की, पांच-छह साल के बच्चों को शिक्षा देना उद्देश्य
सदन में विश्वविद्यालय विधेयक पर 12 घंटे तक चली बहस
सदन की कार्यवाही बुधवार शाम चार बजे शुरू हुई, जो सुबह करीब 4:29 बजे तक चली। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री पार्वती परिदा के अलावा करीब एक दर्जन मंत्री सदन में मौजूद रहे। करीब 12 घंटे तक चली बहस के बाद विश्वविद्यालय विधेयक ध्वनिमत से पास हो गया। विश्वविद्यालय विधेयक पर बहस में आठ बार के विधायक आरपी स्वैन, पूर्व मंत्री अरुण कुमार साहू, गणेश्वर बेहरा और विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक समेत बीजद के कई वरिष्ठ सदस्यों ने हिस्सा लिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग की
विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने के लिए जोरदार मांग की, क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हालांकि, उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने विपक्ष के सभी आरोपों का खंडन करते हुए उनके सवालों का जवाब दिया, जिसके बाद विधेयक को ध्वनिमत से पास कर दिया गया।
ये भी पढ़ें: Odisha: IAS सुजाता की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को केंद्र की मंजूरी; भाजपा के आरोपों के बाद मामले ने पकड़ा था तूल
साहू का सुझाव- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करे सरकार
सदन की कार्यवाही के दौरान पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री और बीजद नेता अरुण कुमार साहू ने करीब एक घंटे तक भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि पिछली सरकार ने 2020 में विश्वविद्यालय विधेयक में संशोधन पारित किया था। इसको विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उड़ीसा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने विधेयक को बरकरार रखा। बाद में, यूजीसी ने विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और मामला शीर्ष अदालत में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और हाईकोर्ट ने इसे बरकरार रखा है, तो संशोधन विधेयक लाने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करे। साहू ने कहा कि विधेयक पारित होने पर कानूनी अड़चनें आ सकती हैं।
संबंधित वीडियो
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.