फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   twenty year long searching veerappan 20 minutes end

20 साल तक चली वीरप्पन की तलाश 20 मिनट में खत्म

Sat, 25 Feb 2017 11:58 AM IST
रेहान फजल, बीबीसी हिंदी
रेहान फजल, बीबीसी हिंदी Updated Sat, 25 Feb 2017 11:58 AM IST
विज्ञापन
twenty year long searching veerappan 20 minutes end

वीरप्पन के मशहूर होने से पहले तमिलनाडु में एक जंगल पैट्रोल पुलिस हुआ करती थी, जिसके प्रमुख होते थे लहीम शहीम गोपालकृष्णन। उनकी बांहों के डोले इतने मजबूत होते थे कि उनके साथी उन्हें रैम्बो कह कर पुकारते थे। रैम्बो गोपालकृष्णन की खास बात ये थी कि वो वीरप्पन की ही वन्नियार जाति से आते थे।

विज्ञापन


9 अप्रैल, 1993 की सुबह कोलाथपुर गाँव में एक बड़ा बैनर पाया गया जिसमें रैम्बो के लिए वीरप्पन की तरफ से भद्दी भद्दी गालियाँ लिखी हुई थीं। उसमें उनको ये चुनौती भी दी गई थी कि अगर दम है तो वो आकर वीरप्पन को पकड़ें। रैम्बो ने तय किया कि वो उसी समय वीरप्पन को पकड़ने निकलेंगे।
विज्ञापन


जैसे ही वो पलार पुल पर पहुंचे, उनकी जीप खराब हो गई। उन्होंने उसे छोड़ा और पुल पर तैनात पुलिस से दो बसें ले लीं। पहली बस में रैम्बो 15 मुखबिरों, 4 पुलिसवालों और 2 वन गार्ड के साथ सवार हुए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वीरप्पन का आतंक

पीछे आ रही दूसरी बस में अपने छह साथियों के साथ तमिलनाडु पुलिस के इंस्पेक्टर अशोक कुमार चल रहे थे। वीरप्पन के गैंग ने तेजी से आती बसों की आवाज सुनी। वो परेशान हुए क्योंकि उन्हें लग रहा था कि रैम्बो जीप पर सवार होंगे। लेकिन वीरप्पन ने दूर से से ही देख कर सीटी बजाई। उन्होंने दूर से रैम्बो को आगे आ रही बस की पहली सीट पर बैठे देख लिया था।

जैसे ही बस एक निर्धारित स्थान पर पहुंची वीरप्पन के गैंग के सदस्य साइमन ने बारूदी सुरंगों से जुड़ी हुई 12 बोल्ट कार बैटरी के तार जोड़ दिए। एक जबरदस्त धमाका हुआ। 3000 डिग्री सेल्सियस का तापमान पैदा हुआ। बसों के नीचे की धरती दहली और पूरी की पूरी बस हवा में उछल गई और पत्थरों, धातु और कटे फटे मांस के लोथड़ों का मलबा 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जमीन पर आ गिरा। के विजय कुमार अपनी किताब वीरप्पन चेजिंग द ब्रिगांड में लिखते हैं, "दृश्य इतना भयानक था कि दूर चट्टान की आड़ में बैठा वीरप्पन भी कांपने लगा और उसका पूरा शरीर पसीने से सराबोर हो गया। थोड़ी देर बार जब इंस्पेक्टर अशोक कुमार वहाँ पहुंचे तो उन्होंने 21 क्षतविक्षत शवों को गिना।"

हाथी को मारने की उसकी फेवरेट तकनीक होती थी, उसके माथे के बींचोंबीच गोली मारना।

twenty year long searching veerappan 20 minutes end

अशोक कुमार ने विजय कुमार को बताया कि उन्होने सारे शवों और घायलों को पीछे आ रही दूसरी बस में रखा लेकिन इस बदहवासी में हम अपने एक साथी सुगुमार को वहीं छोड़ आए क्योंकि वो हवा में उड़ कर कुछ दूरी पर जा गिरा था। उसका पता तब चला जब बस वहाँ से जा चुकी थी। कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया। 

ये वीरप्पन का पहला बड़ा हिट था जिसने उसे पूरे भारत में कुख्यात कर दिया। 18 जनवरी 1952 को जन्मे वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि उसने 17 साल की उम्र में पहली बार हाथी का शिकार किया था। हाथी को मारने की उसकी फेवरेट तकनीक होती थी, उसके माथे के बींचोंबीच गोली मारना। 

जब पकड़ा गया था वीरप्पन
के विजय कुमार बताते हैं, "एक बार वन अधिकारी श्रीनिवास ने वीरप्पन को गिरफ्तार भी किया था। लेकिन उसने सुरक्षाकर्मियों से कहा उसके सिर में तेज दर्द है, इसलिए उसे तेल दिया जाए जिसे वो अपने सिर में लगा सके। उसने वो तेल सिर में लगाने की बताए अपने हाथों में लगाया। कुछ ही मिनटों में उसकी कलाइयाँ हथकड़ी से बाहर आ गईं।

हालांकि वीरप्पन कई दिनों तक पुलिस की हिरासत में था लेकिन उसकी उंगलियों के निशान नहीं लिए गए।" वीरप्पन की खूंखारियत का ये आलम था कि एक बार उसने भारतीय वन सेवा के एक अधिकारी पी श्रीनिवास का सिर काट कर उससे अपने साथियों के साथ फुटबाल खेली थी। ये वही श्रीनिवास थे जिन्होंने वीरप्पन के पहली बार गिरफ्तार किया था।

विजय कुमार बताते हैं, "श्रीनिवास वीरप्पन के छोटे भाई अरजुनन से लगातार संपर्क में थे। एक दिन उसने श्रीनिवास से कहा कि वीरप्पन हथियार डालने के लिए तैयार है। उसने कहा कि आप नामदेल्ही की तरफ चलना शुरू करिए। वो आपसे आधे रास्ते पर मिलेगा। श्रीनिवास कुछ लोगों के साथ वीरप्पन से मिलने के लिए रवाना हुए। इस दौरान श्रीनिवास ने महसूस ही नहीं किया कि धीरे धीरे एक एक कर सभी लोग उसका साथ छोड़ते चले गए।"

एक समय ऐसा आया जब वीरप्पन का भाई अरजुनन ही उनके साथ रह गया।

twenty year long searching veerappan 20 minutes end

वीरप्पन की दरिंदगी
"एक समय ऐसा आया जब वीरप्पन का भाई अरजुनन ही उनके साथ रह गया। जब वो एक तालाब के पास पहुंचे तो एक झाड़ी से कुछ लोगों की उठती हुई परछाई दिखाई दी। उनमें से एक लंबे शख्स की लंबी लंबी मूछें थी। श्रीनिवासन पहले ये समझे कि वीरप्पन हथियार डालने वाले हैं। तभी उन्हें लगा कि कुछ गड़बड़ है।"

"वीरप्पन के हाथ में राइफल थी और वो उनको घूर कर देख रहा था श्रीनिवास ने पीछे मुड़ कर देखा तो पाया कि वो अरजुनन के साथ बिल्कुल अकेले खड़े थे। वीरप्पन उन्हें देख कर जोर जोर से हंसने लगा। इससे पहले कि श्रीनिवासन कुछ कहते, वीरप्पन ने फायर किया। लेकिन वीरप्पन इतने पर ही नहीं रुका। उसने श्रीनिवास का सिर काटा और उसे एक ट्राफी की तरह अपने घर ले गया। वहाँ पर उसने और उसके गैंग ने इनके सिर को फुटबाल की तरह खेला।"

अपराध जगत में क्रूरता के आपने कई उदाहरण सुने होंगे लेकिन ये नहीं सुना होगा कि किसी लुटेरे या डाकू ने अपने आप को बचाने के लिए अपनी नवजात बेटी की बलि चढ़ा दी हो। विजय कुमार बताते हैं, "1993 में वीरप्पन की एक लड़की पैदा हुई थी। तब तक उसके गैंग के सदस्यों की संख्या 100 के पार पहुंच चुकी थी एक बच्चे के रोने की आवाज 110 डेसिबल के आसपास होती है जो बिजली कड़कने की आवाज से सिर्फ 10 डेसिबल कम होती है।

जंगल में बच्चे के रोने की आवाज रात के अंधेरे में ढाई किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है।" "एक बार वीरप्पन उसके रोने की वजह से मुसीबत में फंस चुका था। इसलिए उसने अपनी बच्ची की आवाज को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला किया। 1993 में कर्नाटक एसटीएफ को मारी माडुवू में एक समतल जमीन पर उठी ही जगह दिखाई दी थी। जब उसे खोद कर देखा गया तो उसके नीचे से एक नवजात बच्ची का शव मिला।"

100 दिनों तक चुंगल में सन 2000 में वीरप्पन ने दक्षिण भारत के मशहूर अभिनेता राज कुमार का अपहरण कर लिया। राजकुमार 100 से अधिक दिनों तक वीरप्पन के चंगुल में रहे। इस दौरान उसने कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्य सरकारों को घुटनों पर ला दिया।

हम आपको तमिलनाडु स्पेशल टास्क फोर्स का प्रमुख बना रहे हैं।

twenty year long searching veerappan 20 minutes end

जून, 2001 में दिन के 11 बजे अचानक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के विजय कुमार के फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर फ्लैश हुआ, 'अम्मा।' उन्होंने जयललिता के फोन नंबर को अम्मा के नाम से फीड कर रखा था। जयललिता बिना कोई समय गंवाते हुए मुद्दे पर आईं और बोलीं, "हम आपको तमिलनाडु स्पेशल टास्क फोर्स का प्रमुख बना रहे हैं।

इस चंदन तस्कर की समस्या कुछ ज्यादा ही सिर उठा रही है। आपको आपके आदेश कल तक मिल जाएंगें।"  एसटीएफ का प्रमुख बनते ही विजय कुमार ने वीरप्पन के बारे में खुफिया जानकारी जमा करनी शुरू कर दी। पता चला कि वीरप्पन की आँख में तकलीफ है। अपनी मूछों में खिजाब लगाते समय उसकी कुछ बूंदें छिटक कर वीरप्पन की आँख में जा गिरी थी।

विजय कुमार बताते हैं, "वीरप्पन को बाहरी दुनिया को ऑडियो और वीडियो टेप्स भेजने का शौक था। एक बार ऐसे ही एक वीडियो में हमने देखा कि वीरप्पन को एक कागज पढ़ने में दिक्कत हो रही है। तभी हमें ये पहली बार संकेत मिला कि उसकी आँखों में कुछ गड़बड़ है। फिर हमने फैसला किया कि हम अपने दल को छोटा करेंगे। जब भी हम बड़ी टीम के लिए राशन खरीदते थे, लोगों की नजर में आ जाते थे और वीरप्पन को इसकी भनक पहले से ही मिल जाती थी। इसलिए हमने छह छह लोगों की कई टीमें बनाईं।"

वीरप्पन के लिए जाल बिछाया गया कि उसको अपनी आँखों का इलाज कराने के लिए जंगल से बाहर आने के लिए मजबूर किया जाए। उसके लिए एक खास एंबुलेंस का इंतजाम किया गया जिस पर लिखा था एसकेएस हास्पिटल सेलम। उस एंबुलेंस में एसटीएफ के दो लोग इंस्पेक्टर वैल्लईदुरई और ड्राइवर सरवनन पहले से ही बैठे हुए थे। वीरप्पन ने सफेद कपड़े पहन रखे थे और पहचाने जाने से बचने के लिए उसने अपनी मशहूर हैंडलबार मूछों को कुतर दिया था।

मैंने उसके मुंह से साफ साफ सुना, वीरप्पन एंबुलेंस के अंदर है।

twenty year long searching veerappan 20 minutes end

पूर्व निर्धारित स्थान पर ड्राइवर सरवनन ने इतनी जोर से ब्रेक लगाया कि एंबुलेंस में बैठे सभी लोग अपनी जगह पर गिर गए। के विजय कुमार याद करते हैं, "वो बहुत स्पीड से आ रहे थे। सरवनन ने इतनी तेज ब्रेक लगाया कि टायर से हमें धुंआ उठता दिखाई दिया। टायर के जलने की महक हमारी नाक तक पहुंच रही थी। सरवनन दौड़ कर मेरे पास पहुंचा।"

विजय कुमार का विजय अभियान
"मैंने उसके मुंह से साफ साफ सुना, वीरप्पन एंबुलेंस के अंदर है। तभी मेरे असिस्टेंट की आवाज मेगा फोन पर गूंजी,' हथियार डाल दो। तुम चारों तरफ से घिर चुके हो। पहला फायर उनकी तरफ से आया। फिर हमारे चारों तरफ से गोलियाँ चलने लगीं। मैंने भी अपनी एक 47 का पूरा बर्स्ट एंबुलेंस में झोंक दिया। छोड़ी देर बाद एंबुलेंस से जवाबी फायर आने बंद हो गए।"

"हमने उनपर कुल 338 राउंड गोलियाँ चलाईं। एकदम से सब कुछ धुआं सा हो गया। एक जोर की आवाज आई, आल क्लीयर। एनकाउंटर 10 बज कर पचास मिनट पर शुरू हुआ था। 20 मिनटों के अंदर वीरप्पन और उसके तीनों साथी मारे जा चुके थे।" आश्चर्य की बात थी कि वीरप्पन को सिर्फ दो गोलियाँ लगी थीं।

साठ के दशक में जब फ्रांस के राष्ट्पति द गाल की कार पर 140 गोलियां बरसाई गई तीं, जब भी सिर्फ सात गोलियाँ ही कार पर लग पाई थीं। मैंने के विजय कुमार से पूछा कि जब आप एंबुलेंस में घुसे तो क्या वीरप्पन जिंदा था? उनका जवाब था, "उसकी थोड़ी बहुत सांस चल रही थी। मैं साफ देख पा रहा था कि उसका दम निकल रहा था लेकिन तब भी मैंने उसे अस्पताल भेजने का फैसला किया। 

अपनी मूंछों के बगैर वीरप्पन बहुत साधारण आदमी दिखाई दे रहा था।

twenty year long searching veerappan 20 minutes end

उसकी बांईं आँख को भेदते हुए गोली निकल गई थी। अपनी मूंछों के बगैर वीरप्पन बहुत साधारण आदमी दिखाई दे रहा था। बाद में उसका पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर वल्लीनायगम ने मुझे बताया कि वीरप्पन का शरीर 52 वर्ष का होते हुए भी एक 25 वर्ष के युवक की तरह था।" वीरप्पन के मरते ही एसटीएफ वालों को सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि ऐसा वास्तव में हो चुका है।

जैसे ही उन्हें अहसास हुआ, उन्होंने अपने प्रमुख विजय कुमार को कंधों पर उठा लिया। विजय कुमार तेज कदमों के साथ दो दो सीढ़ियाँ चढ़ते हुए स्कूल के छज्जे पर पहुंचे। वहाँ से उन्होंने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को फोन लगाया, उनकी सचिव शीला बालाकृणन ने फोन उठाया। वो बोलीं, "मैडम सोने के लिए जा चुकी हैं।"

विजय कुमार ने कहा, "मेरा ख्याल है मुझे जो कुछ कहना है उसे सुन कर वो बहुत खुश होंगीं।' विजय कुमार याद करते हैं, "अगले ही क्षण मैंने जयललिता की आवाज फोन पर सुनी। मेरे मुंह से निकला, मैम वी हैव गॉट हिम। जयललिता ने मुझे और मेरी टीम को बधाई दी और कहा मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे इससे अच्छी खबर नहीं मिली।"

फोन काटने के बाद विजय कुमार अपनी जीप की तरफ बढ़े। उन्होंने एंबुलेंस पर अंतिम नजर डाली। उसकी छत पर लगी नीली बत्ती अभी भी घूम रही थी। दिलचस्प बात ये थी कि उस पर एक भी गोली नहीं लगी थी। उन्होंने इसे स्विच ऑफ करने का आदेश दिया। बुझी हुई बत्ती मानो पूरी दुनिया को बता रही थी, 'मिशन पूरा हुआ।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed