फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Tu Ya Main: 70-year-old unpublished poetry collection Madhumalika and novel 'Tu Ya Main' launched by Hans

Tu ya Main: 70 साल से अप्रकाशित कविता संग्रह मधुमालिका और उपन्यास तू या मैं का लोकार्पण, हंस ने की प्रकाशित

Sat, 15 Apr 2023 08:57 PM IST
कुमार विवेक डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 15 Apr 2023 08:57 PM IST
सार

Tu ya Main and Madhumalika: लोकार्पण समारोह में मौजूद साहित्य बिरादरी को संबोधित करते हुए चंद्रिका जोशी ने बताया कि मधुमालिका में कविवर सुमित्रानंदन पंत की की ही लेखनी में उनकी एक अप्रकाशित रचना को पाठकों के सामने प्रस्तुत किया गया है।

विज्ञापन
Tu Ya Main: 70-year-old unpublished poetry collection Madhumalika and novel 'Tu Ya Main' launched by Hans
तू या मैं और मधुमालिका - फोटो : amarujala.com

विस्तार

उत्तराखंड के चर्चित कवि जीवन चंद्र पंत की 70 वर्ष से अप्रकाशित पुस्तक का आज लोकार्पण किया गया। इसके अलावा गगन पंत के उपन्यास तू या मैं का भी विमोचन इसी अवसर पर हुआ। दोनों ही पुस्तकें हंस प्रकाशन ने छापी हैं। मधुमालिका में कविताओं का संकलन आकाशवाणी की मशहूर समाचार वाचिका चंद्रिका जोशी ने किया है। उन्होंने अपने पिता के सात दशक के रचनाकाल की विरासत को इस पुस्तक में संग्रहित किया है। 

विज्ञापन


लोकार्पण समारोह में मौजूद साहित्य बिरादरी को संबोधित करते हुए चंद्रिका जोशी ने बताया कि मधुमालिका में कविवर सुमित्रानंदन पंत की की ही लेखनी में उनकी एक अप्रकाशित रचना को पाठकों के सामने प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह दादी नानी के हाथ के व्यंजन की सुगंध और स्वाद भोजन में अलग प्रभाव पैदा करते हैं, उसी तरह यह संकलन भी पाठकों के अंतर्मन और मस्तिष्क पर अपनी अलग छाप छोड़ेगा। 
विज्ञापन


हिंदी, संस्कृत ओर गढ़वाली के कवि जीत राम भट ने कहा कि चंद्रिका ने जिस तरह अपनी पिता की थाथी को सहेज कर मधुमालिका के रूप में संजोया है वह अपने परिवार, समाज और उत्तराखंड के लिए कृतज्ञता ज्ञापन है। इससे दूसरों को भी अपने परिवारजनों का आभार उतारने की प्रेरिणा मिलेगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


समारोह के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध कहानीकार महेश दर्पण ने कहा कि जीवन चंद्र पंत का पूरा साहित्य इस बात की गवाही है कि उन्होंने वही लिखा जो लिखने योग्य था। साहित्य में सबसे अहम यही है कि वह न लिखा जाए जिसे लिखा नहीं जाना चाहिए। लोकार्पण कार्यक्रम में प्रेेस क्लब आफ इंडिया के उमाकांत लखेड़ा भी मौजूद थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed