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कोविशील्ड पर भरोसा: विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों के पास नहीं है इस टीके का विकल्प

Thu, 20 May 2021 04:17 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 20 May 2021 04:17 PM IST
सार

भारत में निर्मित कोविशील्ड टीके को ही विदेशों में ज्यादा मान्यता है, जबकि पूर्णत: स्वदेशी कोवाक्सिन को नहीं है। इसलिए जब भी कोई पढ़ाई या कारोबार के सिलसिले में अभी विदेश यात्रा कर रहा है, उससे कोविशील्ड वैक्सीन लगवाई या नहीं, यही पूछा जाता है। मुश्किल यह है कि देश में इसकी अभी वैक्सीन की किल्लत है। 
 

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Trust on Kovishield: Indians traveling abroad do not have the option of this vaccine
कोवैक्सिन और कोविशील्ड - फोटो : PTI/twitter@seruminstitute

विस्तार

पूरा देश कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है। हालांकि देश में कोरोना के लड़ने के लिए दो प्रमुख हथियारों के रूप में कोविशील्ड व कोवाक्सिन वैक्सीन हैं। इनके जरिए टीकाकरण चल रहा है। बड़ी आबादी को टीके लगना हैं, इसलिए इनकी कमी भी सामने आ रही है। ऐसे में विदेश यात्रा पर जाने वालों को खास तरह की परेशानी आ रही है। 

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कोविशील्ड व कोवाक्सिन की आपूर्ति व परिवहन के कारण थोड़ी किल्लत नजर आ रही है। इसीलिए कई राज्य लगातार वैक्सीन की खेप मांग रहे हैं। इनके अलावा रूस द्वारा विकसित स्पुतनिक-वी ही एकमात्र अन्य टीका है, जिसे भारत सरकार ने देश में उपयोग के लिए मंजूरी दी है। हालांकि इसका अभी उत्पादन अन्य दो वैक्सीन जितना नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कोविशील्ड और कोवाक्सिन पर ही अधिकांश भारतीयों को भरोसा है। 
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बता दें, कोविशील्ड का निर्माण पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एस्ट्राजेनेका और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के सहयोग से किया है, जबकि कोवाक्सिन हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित एक पूर्ण स्वदेशी वैक्सीन है।
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कोविशील्ड वैक्सीन का भारत व ब्रिटेन में एक साथ परीक्षण किया गया था। इसलिए शुरुआत से ही यह लोगों के भरोसे की कसौटी पर थोड़ी बेहतर स्थिति में रहा। जबकि कोवाक्सिन को लेकर कई जांच-पड़ताल की गई थी। इसके बाद इसे मंजूरी दी गई। इसे लेकर सियासत भी हुई थी। जबकि कोवाक्सिन की वायरस से लड़ने की क्षमता उच्च पाई गई है। 

कोवाक्सिन का देश में टीकाकरण में तेजी से उपयोग हो रहा है, लेकिन इसे दूसरे देशों ने कम ही मान्यता दी है। इसे उन देशों में मान्यता नहीं मिली है, जिनकी भारतीय लगातार यात्राएं करते हैं। विदेश में पढ़ने जाने वाले या काम-धंधे के सिलसिले में, उनसे उन देशों में पहुंचने पर कोविशील्ड लगा या नहीं, यही सवाल किया जाता है। 


वेबसाइट 'कोविड19डाटट्रेकवैक्सीन्सडाटओआरजी' के मुताबिक कोवाक्सिन को अब तक 10 से भी कम देशों ने आधिकारिक रूप से मान्यता दी है, जबकि अधिकांश देशों ने कोविशील्ड को मान्यता दी है। इसीलिए भारत के यात्रियों से कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर  ही पड़ताल की जाती है।

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