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त्रिपुरा चुनाव : ब्रू जनजाति के लोगों ने 26 वर्षों बाद डाला वोट, केंद्र व राज्य सरकार का किया धन्यवाद

Fri, 17 Feb 2023 05:15 AM IST
देव कश्यप एन अर्जुन, अगरतला ।
एन अर्जुन, अगरतला । Published by: देव कश्यप Updated Fri, 17 Feb 2023 05:15 AM IST
सार

ब्रू जनजाति मूल रूप से मिजोरम के रहने वाले हैं। इनमें से ज्यादातर परिवार मामित और कोलासिब जिले में ही बसे थे। 1995 के शुरुआत में ब्रू रियांग और बहुसंख्यक मिजो समुदाय के बीच मनमुटाव शुरू हो गया। 1996 में मिजोरम में दंगे शुरू हो गए। मिजोरम के लोग इन्हें बाहरी समझते थे।

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Tripura Elections: People of Bru tribe cast vote after 26 years, thanked central and state government
मतदान के लिए कतार में बैठीं ब्रू जनजाति की महिलाएं। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मैं आपको बता नहीं सकता कि आज हमारी ब्रू जनजाति के लोग कितने खुश हैं। हम अपनी खुशी शब्दों में बयान नहीं कर सकते। अपने ही देश में पिछले करीब 26 वर्षों से एक शरणार्थी की तरह रहना पड़ा हम सबको। कितने ही कष्ट सहे, लेकिन हमने लगातार संघर्ष किया। अब हम लोग एक भारतीय के रूप में वोट दे सकेंगे। अब हम भी हर चुनाव में वोट दे सकेंगे। यह कहते हुए  मिजोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पिपुल फोरम के महासचिव ब्रूनो मासा भावुक हो गए। उन्होंने कहा, इसके लिए हम राज्य और केंद्र सरकार का जितना धन्यवाद करें, कम है।

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 त्रिपुरा के राहत शिविर में रहने वाले ब्रू जनजाति के लोगों को इस बार त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में 26 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मतदान का अधिकार मिला। मतदान करने आए लोग खासे उत्साहित दिखाई दे रहे थे। उल्लेखनीय है कि ब्रू जनजाति के लोगों को 1997 में जातीय हिंसा के बाद मिजोरम छोड़ना पड़ा था और उन्होंने त्रिपुरा में शरण ली थी। बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में ब्रू जानजाति के लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया। मासा कहते हैं, इस समय हमारे जनजाति के करीब 7000 परिवार राज्य के चार जिलों में रहते हैं। करीब 14 हजार वोट हमारे हैं। यह अधिकार मिलने से हम बहुत खुश हैं।

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क्यों होना पड़ा था ब्रू लोगों को बेघर
ब्रू जनजाति मूल रूप से मिजोरम के रहने वाले हैं। इनमें से ज्यादातर परिवार मामित और कोलासिब जिले में ही बसे थे। 1995 के शुरुआत में ब्रू रियांग और बहुसंख्यक मिजो समुदाय के बीच मनमुटाव शुरू हो गया। 1996 में मिजोरम में दंगे शुरू हो गए। मिजोरम के लोग इन्हें बाहरी समझते थे। 1997 में हिंसक झड़पें होने के बाद हजारों लोगों को मिजोरम से घर छोड़कर भागना पड़ा।
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31 महिलाओं सहित 259 प्रत्याशी मैदान में
त्रिपुरा के 60 सदस्यीय सदन के चुनाव के लिए 31 महिलाओं सहित कुल 259 उम्मीदवार मैदान में हैं, और उनमें से सबसे अधिक सत्तारूढ़ बीजेपी ने 55 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, उसके बाद भाकपा- एम (43), टिपरा मोथा पार्टी (42), तृणमूल कांग्रेस (28), और कांग्रेस के 13 उम्मीदवार मैदान में हैं, इन सबके अलावा 58 निर्दलीय उम्मीदवार और विभिन्न छोटे दलों के 14 उम्मीदवार भी चुनाव  लड़ रहे हैं।

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