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तीन तलाक पर दूसरे अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी
Thu, 21 Feb 2019 04:53 PM IST
तिवारी अभिषेक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: तिवारी अभिषेक
Updated Thu, 21 Feb 2019 04:53 PM IST
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तीन तलाक
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लोकसभा चुनाव से पहले तीन तलाक बिल पर दूसरे अध्यादेश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को मंजूरी दे दी है। बता दें कि केंद्र सरकार तुरंत ट्रिपल तलाक को अवैध बनाने के लिए अध्यादेश लेकर आई थी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले फौरी तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगाने एवं उसे दंडनीय अपराध बनाने के संबंध में केंद्रीय कैबिनेट ने अध्यादेश को मंजूरी दी थी। तलाक-ए-बिद्दत को खत्म करने के संबंध में संसद में पेश विधेयक फिलहाल राज्यसभा में लंबित है। मौजूदा लोकसभा के भंग होने के साथ ही तीन जून को यह विधेयक भी समाप्त हो जाएगा। इसके तहत मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अध्यादेश, 2019 के तहत एक बार में तीन तलाक लेना गैरकानूनी, अवैधानिक होगा और पति को इसके लिए तीन साल की कैद हो सकती है।
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सितंबर 2018 में जारी किए गए पिछले अध्यादेश को कानून की शक्ल देने के लिए लाया गया एक विधेयक लोकसभा से तो पारित हो गया था लेकिन वह राज्यसभा में लंबित रहा। विधेयक को संसदीय मंजूरी नहीं मिलने के चलते नया अध्यादेश जारी किया गया।
प्रस्तावित कानून के दुरुपयोग के डर को कम करने के लिए सरकार ने इसमें कुछ निश्चित सुरक्षा उपाय शामिल किए जैसे कि मुकदमे से पहले आरोपी की जमानत के प्रावधान को इसमें जोड़ा गया। कैबिनेट ने इन संशोधनों को 29 अगस्त, 2018 को मंजूरी दे दी थी। अध्यादेश इसे भले ही एक “गैर जमानती” अपराध बनाता है लेकिन एक आरोपी मुकदमे से पहले ही जमानत के लिए मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है। एक गैर जमानती अपराध में जमानत सीधे पुलिस या पुलिस थाने से नहीं मिल सकती।
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Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Second Ordinance, 2019, inter alia, declares the practice of triple talaq to be void and illegal and also to make it an offence punishable with imprisonment up to three years and fine. https://t.co/ELNh1fcm2f
— ANI (@ANI) February 21, 2019विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि इससे पहले फौरी तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगाने एवं उसे दंडनीय अपराध बनाने के संबंध में केंद्रीय कैबिनेट ने अध्यादेश को मंजूरी दी थी। तलाक-ए-बिद्दत को खत्म करने के संबंध में संसद में पेश विधेयक फिलहाल राज्यसभा में लंबित है। मौजूदा लोकसभा के भंग होने के साथ ही तीन जून को यह विधेयक भी समाप्त हो जाएगा। इसके तहत मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अध्यादेश, 2019 के तहत एक बार में तीन तलाक लेना गैरकानूनी, अवैधानिक होगा और पति को इसके लिए तीन साल की कैद हो सकती है।
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सितंबर 2018 में जारी किए गए पिछले अध्यादेश को कानून की शक्ल देने के लिए लाया गया एक विधेयक लोकसभा से तो पारित हो गया था लेकिन वह राज्यसभा में लंबित रहा। विधेयक को संसदीय मंजूरी नहीं मिलने के चलते नया अध्यादेश जारी किया गया।
प्रस्तावित कानून के दुरुपयोग के डर को कम करने के लिए सरकार ने इसमें कुछ निश्चित सुरक्षा उपाय शामिल किए जैसे कि मुकदमे से पहले आरोपी की जमानत के प्रावधान को इसमें जोड़ा गया। कैबिनेट ने इन संशोधनों को 29 अगस्त, 2018 को मंजूरी दे दी थी। अध्यादेश इसे भले ही एक “गैर जमानती” अपराध बनाता है लेकिन एक आरोपी मुकदमे से पहले ही जमानत के लिए मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है। एक गैर जमानती अपराध में जमानत सीधे पुलिस या पुलिस थाने से नहीं मिल सकती।