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SC में बोला मुस्लिम बोर्ड- 'तीन तलाक' का विरोध आधारहीन

Mon, 27 Mar 2017 05:34 PM IST
amarujala.com- presented by: रोहित कुमार पोरवाल
amarujala.com- presented by: रोहित कुमार पोरवाल Updated Mon, 27 Mar 2017 05:34 PM IST
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Triple talaq case: Muslim Law Board files reply stating SC petition ‘not maintainable’
सांकेतिक चित्र

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर अपना जवाब दर्ज कराया। मुस्लिम बोर्ड ने कहा कि उनके खिलाफ तीन तलाक के मुद्दे पर दाखिल की गई याचिका आधारहीन है। इस मामले में अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी। मुस्लिम बोर्ड की तरफ से इस मामले में नया कदम उस वक्त उठाया है जब पहले से ही तीन तलाक के मुद्दे पर कई याचिकाएं सुनवाई के लिए लंबित पड़ी हैं। मुस्लिम लॉ बोर्ड यह कहते हुए इस मामले का पक्ष लेता रहा कि 'बीवी की हत्या करने से बेहतर है उसे तलाक दे देना' चाहिए।

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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक बहुत सी मुस्लिम महिलाएं 'तीन तलाक' प्रथा की पीड़ित रही हैं। उन्हें उनके पतियों ने तलाक दिया और उन्हें बेघर होना पड़ा है। समाज में तलाक की इस प्रथा की चौतरफा आलोचना हो रही है। पिछले कुछ महीनों में बहुत सी पीड़ित मुस्लिम महिलाओं ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 'तीन तलाक' की प्रथा को खत्म करने की गुहार की है। 
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 2016 में एक महिला शाखा बनाकर संप्रदाय की महिलाओं से रायशुमारी कराई थी। तब मुस्लिम बोर्ड ने तीन तलाक के पक्ष में प्रस्ताव पास किया था। यह प्रस्ताव तीन दिन के सम्मेलन के बाद पास किया जा सका था। और उस मौके पर मुस्लिम बोर्ड ने कहा था कि सरकार मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों की अवहेलना कर रही है।

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जब व्हॉट्स एप पर एक शख्स ने बीवी को दिया तलाक

Triple talaq case: Muslim Law Board files reply stating SC petition ‘not maintainable’
सांकेतिक चित्र

एक महीने पहले तलाक का एक अजीब मामला सामने आया जब एक भारतीय मूल के अमेरिकी ने हैदराबाद में व्हॉट्स एप पर तीन बार 'तलाक' शब्द लिखकर अपनी पत्नी महरीन को तलाक दे दिया। मेहरीन की रिश्तेदार हीना फातिमा को भी इसी तरह से महिने भर पहले तलाक का दंश झेलना पड़ा।

तीन तलाक पर चर्चा न कर, उस पर फैसला लेने का वक्त है, ऐसा कहना भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन वाले समूृह का है। समूह की तरफ से कहा गया है कि मुद्दे पर बहस को गलत तरीक से कर यूनीफॉर्म कोड के बारे में गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। जो कि एक अलग ही मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट सभी राजनीतिक दलों से कह चुका है कि वे इस मामले में अपनी याचिकाएं विस्तार पूर्वक दाखिल करें ताकि अपेक्षित सुनवाई पूरी हो सके।

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