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चाबहार के संयुक्त उपयोग के लिए भारत, ईरान और उज्बेकिस्तान 14 दिसंबर को करेंगे बैठक

Sat, 12 Dec 2020 02:26 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Sat, 12 Dec 2020 02:26 PM IST
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Trilateral Working Group Meeting India Iran Uzbekistan joint use Chabahar port held virtually on14 Dec
चाबहार पोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

ईरान के चाबहार बंदरगाह के संयुक्त उपयोग पर भारत, ईरान और उज्बेकिस्तान के बीच पहली त्रिपक्षीय कार्य समूह की बैठक 14 दिसंबर को आयोजित की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। मंत्रालय ने बताया कि भारत चाबहार बंदरगाह के पारगमन बंदरगाह के रूप में उपयोग करने के लिए उज्बेकिस्तान के हित का स्वागत करता है। 

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मंत्रालय ने कहा, चाबहार बंदरगाह क्षेत्र के व्यापारियों और व्यापार समुदाय के लिए आर्थिक अवसर खोलेगा। उज्बेकिस्तान के अलावा, अन्य मध्य एशियाई देशों ने भी बंदरगाह का उपयोग करने में रुचि दिखाई है। भारत इस मुद्दे पर क्षेत्रीय देशों के साथ निकट सहयोग करना चाहता है।
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भारत, उज्बेकिस्तान ने नौ समझौतों पर किए हस्ताक्षर
दरअसल, भारत और उज्बेकिस्तान ने आपसी सहयोग बढ़ाने के मकसद से शुक्रवार को कई क्षेत्रों में नौ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए और दोनों देशों ने आतंकवादियों के आश्रय स्थलों, उनके नेटवर्क तथा वित्तीय सहायता के माध्यमों को नष्ट करने की प्रतिबद्धता जताई।

भारत-उज्बेकिस्तान डिजिटल शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मीरजियोयेव की मौजूदगी में इन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों को और विस्तार देने तथा द्विपक्षीय निवेश संधि को जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में प्रयासों को तेज करने पर सहमति जताई।

आतंकवाद के खात्मे की प्रतिबद्धता दोहराई

एक संयुक्त बयान में कहा गया कि विस्तृत वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की भर्त्सना की और दोनों देशों ने आतंकवादियों के सुरक्षा आश्रय स्थलों, उनके नेटवर्क, आतंकी ढांचे और वित्तीय एवं अन्य संसाधनों तक पहुंच रोकने संबंधी प्रयासों को तहस नहस करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों पक्षों ने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि उनकी सीमाओं का दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। दोनों पक्षों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (सीसीआईटी) को जल्द अंतिम स्वरूप देने का आह्वान किया। इसका मसौदा 1996 में भारत द्वारा तैयार किया गया था जो आतंकवाद के खिलाफ व्यापक एवं एकीकृत कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

मध्य एशिया में शांति के लिए अफगानिस्तान में स्थिरता अहम
मध्य एशिया से जुड़ी संपर्क परियोजनाओं को गति देने के रास्तों पर चर्चा इस सम्मेलन का एक मुख्य विषय था। इस सिलसिले में चाबहार बंदरगाह के माध्यम से संपर्क बढ़ाने के लिए भारत, ईरान और उज्बेकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के उज्बेकिस्तान के प्रस्ताव का भारत ने स्वागत किया। बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान की स्थिति पर भी चर्चा की और जोर दिया कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व स्थिरता के लिए अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता की बहाली अहम है।
 

भारत-उज्बेकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता से खड़े

इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता से एक साथ खड़े हैं और उग्रवाद, कट्टरवाद तथा अलगाववाद के बारे में दोनों देशों की चिंताएं भी एक जैसी हैं। उन्होंने कहा, उग्रवाद, कट्टरवाद तथा अलगाववाद के बारे में हमारी एक जैसी चिंताएं हैं। हम दोनों ही आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता से एक साथ खड़े हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी हमारा एक जैसा नजरिया है। वार्ता के दौरान भारत की ओर से व्यापार को मजबूती देने के लिए संपर्क बढ़ाने वाली परियोजनाओं के महत्व का उल्लेख किया गया और कहा गया कि चाबहार परियोजना मध्य एशिया में संपर्क का आधार बन सकती है।

आईएनएसटीसी से जुड़ेगा उज्बेकिस्तान
भारत ने उज्बेकिस्तान से अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) से जुड़ने पर विचार करने का भी आग्रह किया। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (यूरेशिया) आदर्श स्वैका ने कहा कि उज्बेकिस्तानी पक्ष ने आईएनएसटीसी से जुड़ने के भारत के आग्रह को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

क्या है आईएनएसटीसी
आईएनएसटीसी 7,200 किमी लंबा जमीनी और सामुद्रिक रास्ता है। इसमें परिवहन के रेल, सड़क और समुद्री मार्ग शामिल हैं। इसके जरिए समय और लागत में कटौती कर रूस, ईरान, मध्य एशिया, भारत और यूरोप के बीच व्यापार को बढ़ावा दिए जाने का लक्ष्य है।

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