Defence: सेना के तीनों अंगों के कमांडरों ने की सैन्य शक्ति बढ़ाने पर चर्चा, LAC की स्थिति की भी हुई समीक्षा
पश्चिमी वायु कमान के तत्वावधान में तीनों सेनाओं के कमांडरों का सम्मेलन (पश्चिमी समूहीकरण) तीन और चार अक्तूबर को दिल्ली में आयोजित किया गया था। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सम्मेलन की अध्यक्षता की।
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सेना के तीनों अंगों के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने दो दिवसीय सम्मेलन में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति की व्यापक समीक्षा की और साथ ही भारत की समग्र सैन्य शक्ति को बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।
पश्चिमी वायु कमान के तत्वावधान में तीनों सेनाओं के कमांडरों का सम्मेलन (पश्चिमी समूहीकरण) तीन और चार अक्तूबर को दिल्ली में आयोजित किया गया था। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। अधिकारियों ने बताया कि कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में स्थिति सहित राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कमांडरों ने वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति की समीक्षा की, परिचालन तैयारियों को बढ़ाने और रुचि के क्षेत्र में संचालन के तालमेल को बढ़ाने के साधनों पर विचार-विमर्श किया। मंत्रालय हमारी सीमाओं की अखंडता सुनिश्चित करने और खतरों को कम करने पर भी चर्चा हुई। इसमें भाईचारा भरे माहौल के बीच चर्चा और विचारों का मुक्त आदान-प्रदान हुआ।
दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिस कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल पीएम सिन्हा ने की। भारतीय वायु सेना की पश्चिमी वायु कमान संवेदनशील लद्दाख सेक्टर के साथ-साथ उत्तर भारत के कुछ अन्य हिस्सों में हवाई क्षेत्र की सुरक्षा की देखभाल करती है।
सम्मेलन में भारतीय सेना के उत्तरी कमान, दक्षिण पश्चिमी कमान, दक्षिणी कमान और पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ भी मौजूद थे। पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ और दक्षिण पश्चिमी वायु कमान और दक्षिणी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ भी सम्मेलन में भाग लेने वालों में शामिल थे।
चीफ ऑप इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ से लेकर चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी तक, रक्षा खुफिया एजेंसी के महानिदेशक और डेप्युटी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस) के उप प्रमुख ने भी सम्मेलन में भाग लिया।
मई 2020 में शुरू हुए पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था। भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में कुछ स्थानों पर तीन साल से अधिक समय से टकराव चल रहा है जबकि दोनों पक्षों ने व्यापक राजनयिक और सैन्य वार्ता के बाद कई इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है।