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Train Crash: कैसे हुआ तीनों ट्रेनों के साथ हादसा, क्या थी कोरोमंडल और यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस की स्पीड?

Sat, 03 Jun 2023 06:09 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 03 Jun 2023 06:09 PM IST
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सार
Train Crash: मौत के बढ़ते आंकड़ों के बीच यह प्रश्न बार-बार पूछा जा रहा है कि आखिर ये तीनों ट्रेनें आपस में कैसे भिड़ गईं। जब दो ट्रेनों के बीच जबरदस्त भिड़ंत हो गई थी, फिर तीसरी ट्रेन कैसे पलट गई। ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब अमर उजाला ने खोजने की कोशिश की...
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Train Crash: what was the speed of Coromandel express and Yesvantpur Howrah Express?
Odisha Train Accident - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे में अब तक 280 लोगों की मौत हो गई है। इस भयानक दुर्घटना को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। मौत के बढ़ते आंकड़ों के बीच यह प्रश्न बार-बार पूछा जा रहा है कि आखिर ये तीनों ट्रेनें आपस में कैसे भिड़ गईं। जब दो ट्रेनों के बीच जबरदस्त भिड़ंत हो गई थी, फिर तीसरी ट्रेन कैसे पलट गई। ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब अमर उजाला ने खोजने की कोशिश की।

पहले जानें हादसा कहां, कब और कैसे हुआ, मालगाड़ी का क्या है मसला

इस भीषण रेल हादसे की संयुक्त जांच रिपोर्ट में शुरुआती तौर पर सिग्नल सिस्टम की संबंधित गलती सामने आई है। रेलवे की एक संयुक्त निरीक्षण टीम ने निष्कर्ष निकाला है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस को तय मेन लाइन से गुजरने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था, और फिर इसे बंद कर दिया गया। लेकिन ट्रेन लूप लाइन में प्रवेश कर गई और वहां खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। इस बीच, डाउन लाइन पर यशवंतपुर से सुपरफास्ट एक्सप्रेस आ गई और इसके दो डिब्बे पटरी से उतर गए। बहानगा बाजार स्टेशन पर अप और डाउन, दो लूप लाइन हैं। किसी भी ट्रेन को लूप लाइन पर तब खड़ा किया जाता है, जब किसी ट्रेन को स्टेशन से पास कराया जाना होता है।

यह भी पढ़ें: Train crash: मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बड़ी रेल घटना, 2016 में रेल हादसे में गई थी 150 यात्रियों की जान

कितनी थी कोरोमंडल एक्सप्रेस की स्पीड

इस स्टेशन पर दोनों ट्रेनों को कोई स्टॉपेज नहीं है। ऐसे में दोनों ट्रेनों की स्पीड बहुत तेज थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस ने जब लूप लाइन में प्रवेश किया तो ट्रेन की स्पीड इतनी तेज थी कि ट्रेन का इंजन सीधे मालगाड़ी पर चढ़ गया। कोरोमंडल एक्सप्रेस समेत मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतर तीसरे ट्रैक पर जा गिरे। तभी इसी तीसरे ट्रैक पर तेज रफ्तार से आ रही हावड़ा-बेंगलुरु एक्सप्रेस (12864) ट्रैक पर पड़ी कोरोमंडल एक्सप्रेस की बोगियों से बहुत तेजी से टकराई। इसके बाद यह भयानक हादसा हो गया। रेलवे के जानकार बताते हैं कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त ट्रेन की स्पीड करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से रही होगी।

क्या कोरोमंडल ट्रेन राइट टाइम थी...फिर कैसे हुआ ये हादसा

कोलकाता के शालीमार से शुक्रवार 12841 कोरोमंडल एक्सप्रेस तय समय पर निकली थी। लेकिन सांतरागाछी में ट्रेन 4 मिनट की देरी से पहुंची थी। खड़गपुर में भी ट्रेन तीन मिनट की देरी से पहुंची थी। इसके बाद ड्राइवर सतर्क होकर ट्रेन की स्पीड मेंटेन करके चलने लगा। इसके बाद ट्रेन ओडिशा में एंट्री कर चुकी थी। बालासोर में ट्रेन राइट टाइम थी। वहां से ट्रेन करीब 25 किलोमीटर आगे बढ़ी ही थी कि बहनागा बाजार की एंट्री पर स्थित प्वाइंट्स पर कुछ तकनीकी दिक्कत हुई। जिससे ट्रेन मालगाड़ी से भिड़ गई और दोनों गाड़ियों के डिब्बे पटरी से उतर गए।

क्या एक ही समय पर आ गई थी हावड़ा-बेंगलुरु एक्सप्रेस

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाडी का यह हादसा हुआ उसकी तुरंत जानकारी कंट्रोल रूम तक नहीं पहुंची होगी। इसी बीच यहां हावड़ा-बेंगलुरु एक्सप्रेस (12864) यहां से गुजरने लगी। यह ट्रेन अपने तय समय से भी ज्यादा लेट चल रही थी। यह ट्रेन बहनागा बाजार स्टेशन पर नहीं रुकती थी, इसलिए इसे थ्रू सिग्नल मिला हुआ था। इस ट्रेन की स्पीड भी 130 किलोमीटर प्रति घंटा थी। तेज रफ्तार में चलती हुई यह ट्रेन पटरी से उतरी हुई कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ी के डिब्बे से भिड़ गई। ऐसे में तीनों ट्रेनों के आपस में उलझ गईं।

दो ट्रेन और एक मालगाड़ी के कितने डिब्बे पटरी से उतरे

दोनों एक्सप्रेस ट्रेनों की भिड़ंत में ट्रेनों की 21 से ज्यादा बोगियां पटरी से उतर गईं। इसके चलते हादसे में 280 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। यह संख्या बढ़ भी सकती है, क्योंकि हादसे में 900 लोगों से अधिक लोग घायल हुए हैं।

क्या कोरोमंडल एक्सप्रेस के ड्राइवर ने किया नहीं किया सिग्नल का पालन

रेलवे के अधिकारियों द्वारा तैयार रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि 12841 कोरोमंडल एक्सप्रेस के ड्राइवर को बहनागा बाजार में थ्रू लाइन का ग्रीन सिग्नल मिला। वह ट्रेन को 138 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार में ले जा रहा था। लेकिन कांटा कुछ ऐसा बना हुआ था कि ट्रेन मेन लाइन पर ही जाने के बजाय लूप लाइन में चली गई। वहीं उसकी एक मालगाड़ी से जबरदस्त टक्कर हुई।

कब बनती है ट्रेन की पटरी से उतरने की संभावना

जब ट्रेन के ट्रैक के बीच की चौड़ाई बढ़ जाती है या दो पटरियों के बीच का जोड़ कमजोर हो जाता है, ऐसे में ट्रेन के पटरियों के उतरने की संभावना बढ़ जाती है। इसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग और इंस्टॉलेशन डिफेक्ट, ज्यादा गर्मी या मेंटेनेंस की कमी की वजह से हो सकता है। यहीं नहीं पहिए, लोकोमोटिव बेयरिंग, सस्पेंशन और रेलवे बोगी में होने वाली खराबी की वजह से भी ट्रेन पटरी से उतर सकती है। ट्रेन सिग्नल और नेटवर्क की मदद से चलती है। ऐसे में कई मौकों पर कंट्रोल रूम या नेटवर्क से संपर्क टूटने के बाद टेक्निकल खराबी की वजह से भी ट्रेन पटरी से उतर सकती है।

यह भी पढ़ें: Train Accident: कोरोमंडल एक्सप्रेस में सवार था NDRF जवान, मोबाइल की लाइट में खुद शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन

गार्ड या किसी अन्य ऑपरेशन मैनेजर की भूल की वजह से भी ट्रेन पटरी से पलटने की संभावना होती है। अमूमन स्लो सिग्नल के बावजूद ट्रेन को फास्ट चलाना, कम्युनिकेशन गैप, रेलवे रूल्स फॉलो न करना हादसे की वजह बनी है। इसके अलावा जब किसी क्षेत्र में काफी ज्यादा गर्मी पड़ रही हो या किसी क्षेत्र में काफी ज्यादा ठंड हो, तो वहां रेलवे पटरियों में फैलाव कम-ज्यादा हो सकता है। ज्यादा बारिश या तेज हवा में रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरने की वजह से भी ट्रेन पटरी से उतर सकती है।

हादसे के 20 घंटे बाद भी वजह का पता नहीं, रेल मंत्रालय भी चुप

हादसे के एक घंटे बाद शाम को करीब 8 बजे बालासोर में एक ट्रेन के पटरी से उतरने की खबर आई। इसके बाद दूसरी ट्रेन के पटरी से उतरने की बात पता चली। रात करीब 10 बजे साफ हुआ कि दो यात्री गाड़ियां और एक मालगाड़ी टकराई है। शुरुआत में 30 लोगों के मारे जाने की जानकारी थी, लेकिन देर रात यह आंकड़ा 250 के पार पहुंच गया। हादसे के 22 घंटे बाद यानी शनिवार दोपहर 4 बजे तक रेल मंत्री या रेलवे मंत्रालय की तरफ से हादसे की वजहों पर कुछ नहीं कहा गया। मंत्री से लेकर अफसर तक ने केवल जांच कराने का बयान दिया। इधर, ट्रैक बंद हो जाने की वजह से इस रूट की 48 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, 39 को डायवर्ट और 10 को शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है।

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