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भ्रूण हत्या पर ट्रैकर डिवाइस से कसेगा शिकंजा
अरुण चट्ठा/ अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 12 Mar 2016 05:16 AM IST
सार
- लिंग परीक्षण पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मेगा प्लान बनाया है
- मशीन का सभी डाटा सीएमओ कार्यालय में ऑनलाइन सर्वर पर देखा जा सकेगा
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विस्तार
भ्रूण हत्या एवं लिंग परीक्षण पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मेगा प्लान बनाया है। जिसके तहत जिले भर के सभी डाइग्नोस्टिक सेंटरों की अल्ट्रासाउंड मशीनों में ट्रैकर डिवाइस लगना अनिवार्य होने जा रहा है। इस प्लान को विभाग की आंतरिक समिति से अनुमति मिल चुकी है।
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29 मार्च को जिला अधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली जिला स्वास्थ्य समिति से अप्रूवल मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। जरूरत लिंग जांच और भ्रूण हत्या के मामलों को लेकर बीते कुछ वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की छवि सबसे ज्यादा खराब हुई है। खासकर मेरठ में लिंग परीक्षण के मामले सबसे ज्यादा पकड़े जाने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चौतरफा किरकिरी हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने अपना दामन पाक साफ रखने की नीयत से इस प्लान को तैयार किया है।
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सीएमओ की तरफ से पीसीपीएनडीटी के नोडल ऑफिसर डॉ. अशोक निगम ने पुणे की कंपनी के साथ मिलकर इस ट्रैकर डिवाइस को लगाने की योजना बनाई है। ट्रैकर हर डाइग्नोस्टिक सेंटर की अल्ट्रासाउंड मशीन में फिट होगा। जिसे सीएमओ कार्यालय में लगने वाले सर्वर से जोड़ दिया जाएगा।
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मशीन का सभी डाटा सीएमओ कार्यालय में ऑनलाइन सर्वर पर देखा जा सकेगा। ट्रैकर अल्ट्रासाउंड मशीन की हर गतिविधि को हार्ड डिस्क में सुरक्षित करता रहेगा। मशीन ऑन होने से ऑफ होने की टाइमिंग के साथ ही मरीज से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड सेव होगा।
अल्ट्रासाउंड के दौरान ली जाने वाली इमेज व वीडियो टाइम के हिसाब से स्वयं ही हार्ड डिस्क में सुरक्षित होती रहेगी। ट्रैकर का सभी डाटा कोडिंग फॉरमेट में सुरक्षित होगा, जिसे सिर्फ पीसीपीएनडीटी कमेटी का नामित अधिकारी ही डी-कोड करके देख सकेगा। यानी डाइग्नोस्टिक सेंटर से कोई हेराफेरी नहीं हो सकेगी। अगर ट्रैकर अल्ट्रासाउंड मशीन से हटाया जाता है तो उसकी जानकारी भी मेसेज के द्वारा तत्काल पीसीपीएनडीटी सेल तक पहुंच जाएगी।