टू प्लस टू वार्ता: भारत ने अमेरिका की अफगान नीति का किया समर्थन, एनएसजी पर भी सहमति
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भारत और अमेरिका ने गुरूवार को पहली टू प्लस टू वार्ता का आयोजन किया गया। टू प्लस टू बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत अमेरिका की अफगान नीति का समर्थन करता है। इसके बाद स्वराज ने भारत और अमेरिका की ज्वाइंट प्रेस स्टेटमेंट में मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एनएसजी में जल्द से जल्द भारत की सदस्यता को लेकर आज बातचीत हुई जिसपर सभी ने सहमति जताई है।
पॉम्पियो ने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर यह तय करेंगे कि उनके और राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में हम विकास के नए दौर में संबंधों को कैसे विकसित कर सकते हैं। हमने हमारे द्विपक्षीय संबंधों और हमारे भविष्य को लेकर काफी बेहतर चर्चा की है।
वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने रक्षा मत्री निर्मला सीतारमण और सुषमा स्वराज को धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने उनकी और रक्षा मंत्री मैटिस की पहली भारत यात्रा में उनका सहयोग किया। ये भारत और अमेरिका के संबंधों का नया युग है। हम रिश्तों को बेहतर बनाने पर जोर दे रहे हैं। पॉम्पियो ने कहा कि भारत और अमेरिका ने आज बेहद महत्वपूर्ण संप्रेक्षण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
स्वराज ने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि उन्हें विश्वास है कि वार्ता के परिणाम से दोनों देशों के बीच अप्रयुक्त क्षमता का लाभ उठाने में मदद मिलेगी और साझेदारी के स्तर को और बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के सभी प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। पहली टू प्लस टू वार्ता के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत और अमेरिका ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के नयी दिल्ली के प्रयासों के लिए काम करने का फैसला लिया।
पोम्पिओ ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों को समुद्री क्षेत्र की आजादी सुनिश्चित करनी चाहिए और समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। उनका इशारा दक्षिण चीन सागर में चीन के विस्तारवादी रवैये की ओर था। उन्होंने बाजार आधारित अर्थशास्त्र तथा सुशासन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
राजनयिक सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्ष कुछ रक्षा समझौतों को अंतिम रूप देने का प्रयास करेंगे, जिससे उनकी सेना और निजी क्षेत्र दोनों रक्षा अधिग्रहण एवं साझेदारियों के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। अमेरिका भारत के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का प्रयास कर रहा है जिसे क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभुत्व के संतुलन के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि बातचीत दोनों देशों की अपनी रणनीतिक साझेदारी को सकारात्मक, आशावादी दृष्टिकोण प्रदान करने तथा महत्वपूर्ण विषयों पर एक ओर ही झुकाव रखने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सूत्रों ने कहा कि अमेरिका भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की साझेदारी को बहुत महत्व देता है और यह विषय प्रमुखता के साथ वार्ता में रहा।
ईरान से कच्चे तेल के आयात पर अमेरिकी पाबंदी और रूस से एस-400वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने की भारत की योजना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इससे पहले आज सुबह स्वराज और सीतारमण ने क्रमश: पोम्पिओ तथा मैटिस से अलग-अलग मुलाकात की।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि बैठकों में कई प्रमुख द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने स्वराज और पोम्पिओ की बैठक को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में प्रभावशाली प्रयासों की समीक्षा की और रिश्तों को और अधिक ऊंचे स्तर पर ले जाने के कदमों पर चर्चा की।