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आज घरेलू कालाधन की घोषणा करने का आखिरी दिन, नहीं किया तो अभी करें

Fri, 30 Sep 2016 04:49 AM IST
शिशिर चौरसिया/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 30 Sep 2016 04:49 AM IST
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Today is the last day to declare black money
- फोटो : demo

घरेलू काले धन को वैध बनाने के लिए केंद्र  सरकार द्वारा शुरू की गई आय घोषणा योजना (आईडीएस) 2016 की अवधि बीतने के बाद देशभर में ताबड़-तोड़ छापे डालने की तैयारी है। छापे उनके यहां पड़ेंगे, जिनके पास काला धन तो है, लेकिन उन्होंने आईडीएस में इसका खुलासा नहीं किया। इस योजना के तहत काले धन का खुलासा शुक्रवार को आधी रात तक ही किया जा सकता है।

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केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि काले धन के खिलाफ चलायी गई मुहिम को अब विशेष गति दी जाएगी। इसके लिए देशभर में इंवेस्टिगेशन विंग की रिक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है। हालांकि फिलहाल नई भर्ती के जरिये नियुक्ति संभव नहीं है, लेकिन जरूरत के अधार पर किसी अन्य दफ्तर से अधिकारियों, इंस्पेक्टरों एवं अन्य सर्पोटिंग स्टाफ की तैनाती की जा रही है। इससे छापे की कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सकेगा।
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आयकर विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि दिल्ली में इंवेस्टिगेशन विंग में इंस्पेक्टर पद को ही देखा जाए तो वहां अभी महज 70 लोग तैनात हैं। दिल्ली कार्यालय के काम के दायरे को देखें तो यहां कम से कम 150 इंस्पेक्टर होने चाहिए। अब अगले हफ्ते से सर्च और सीजर ज्यादा होंगे, इसके लिए कुछ कर्मचारियों एवं अधिकारियों को दूसरे स्थानों से यहां तैनात किया जा रहा है। कुछ लोगों ने यहां कार्यभार संभाल लिया है।

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छापा मारे जाने का क्या है मतलब?

Today is the last day to declare black money

उल्लेखनीय है कि आईडीएस के तहत घरेलू काले धन की घोषणा के लिए बीते एक जून से ही खिड़की खुल चुकी है। यह खिड़की चार महीने तक खुली रहेगी। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि इसके बंद हो जाने (30 सितंबर 2016) के बाद कालाधन रखने वालों पर न सिर्फ सख्ती बढ़ेगी बल्कि उन पर कड़ी कार्रवाई भी होगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आईडीएस-2016 की अवधि को नहीं बढ़ाया जाएगा। जिन्हें इस योजना के तहत घोषणा करनी हो, उन्हें 30 सितंबर 2016 तक ही मौका मिलेगा। इसके बाद तो बस छापा पड़ेगा। तब पकड़े जाने पर कर, जुर्माना और ब्याज तो भरना ही पड़ेगा, सात साल तक कैद की सजा भी हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग के सर्किल या वार्ड में तैनात अधिकारी अपनी जांच के सिलसिले में सिर्फ सर्वे कर सकते हैं। सर्वे के दौरान यदि कोई बड़ा सुराग हाथ लगता है और वहां सर्च एवं सीजर की जरूरत पड़ती है तो उसकी जानकारी इंवेस्टिगेशन विंग को दी जाती है। इंवेस्टिगेशन विंग द्वारा किये जाने वाले सर्च एवं सीजर को ही आम भाषा में आयकर विभाग द्वारा छापा मारना कहते हैं।

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