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शेरों को बचाने के लिए गुजरात वन प्रशासन ने मांगी विशेषज्ञों की मदद, यहां से मंगवाए टीके

Thu, 04 Oct 2018 12:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Updated Thu, 04 Oct 2018 12:01 PM IST
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to save Asiatic lions Gujarat Government is wants the help of experts from India and Abroad
गिर के शेर

गुजरात के गिर में शेरों की लगातार हो रही मौत ने वन प्रशासन सहित पूरे देश को चिंता में डाल दिया है। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की चपेट में आने की वजह से दो शेरों की मौत हो गई थी। उन्हें बचाने के लिए अब गुजरात सरकार एक्शन में आ गई है। इसके लिए उसने खतरे की घंटी बजा दी है। सरकार देश और देश के बाहर के विशेषज्ञों की मदद से भारत के गर्व को बचाने के लिए मदद मांग रही है।

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गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणपत सिंह वसावा द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार 23 में से 11 एशियाटिक शेरों की मौत कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और प्रोटोजोआ संक्रमण की वजह से हुई है। वसावा ने बुधवार को गांधीनगर में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, 'पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वीरोलॉजी को 11 में से चार मृत शेरों के सैंपल में सीडीवी और 7 में प्रोटोजोआ संक्रमण मिला है।'
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वसावा ने आगे कहा, 'मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के दिशा-निर्देशों पर इस बीमारी से लड़ने के लिए हमें राष्ट्रीय और अतंरराष्ट्रीय मदद चाहिए। हम रॉयल वेटेरिनरी सोयाइटी ऑफ लंदन की भी मदद ले रहे हैं। सावधानी पूर्वक उपाय अपनाते हुए हमने अमेरिका से 300 टीके आयात किए हैं और यह गुरुवार शाम तक यहां पहुंच जाएंगे।' बुधवार को 36 में से तीन शेरों की हालत गंभीर होने की वजह से वन विभाग ने उन्हें निगरानी में रखा हुआ है। 
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गुजरात के शेरों को बचाने के लिए इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के पांच, दिल्ली चिड़ियाघर के पांच और उत्तर प्रदेश के इटावा चिड़ियाघर के पांच विशेषज्ञ पहुंचे हैं। 2015 की जनगणना के अनुसार, गिर 523 शेरों का घर है। जिसमें 109 नर, 201 मादा और 73 छोटे बच्चे और 140 नवजात शामिल हैं। वसावा ने कहा अब अगली जनगणना 2020 में होगी। सौराष्ट्र क्षेत्र के विभिन्न जंगलों में कुल 600 शेर रहते हैं।

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