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पत्नी के दबाने पड़ते हैं पैर इसलिए देरी से पहुंचते हैं दफ्तर,यूपी के कर्मचारी ने बॉस को बताई वजह
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
Updated Wed, 22 Aug 2018 11:12 AM IST
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ऑफिस में देरी
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दफ्तर पहुंचने में देरी अक्सर हो जाती है, कई बारी मजबूरी भी होती है। लेकिन अगर ये रोज होने लगे तो साफ है कि जान बूझकर लेट लतीफी की जा रही है। यही कुछ हाल है उत्तर प्रदेश के ज्यादातर कर्मचारियों का जो लेट तो आते ही हैं स्पष्टीकरण में भी कुछ ऐसी वजह बताते हैं कि हंसी आ जाये। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर के दफ्तर में काम करने वाले एक कर्मचारी ने ऑफिस देरी से पहुंचने पर अपना लिखित स्पष्टीकरण दिया है । इस कर्मचारी ने लेट आने के पीछे अपनी पत्नी की सेवा में लगा रहना बताया है।
कर्मचारी की लिखित स्पष्टीकरण को पढ़ अधिकारी भी हक्के-बक्के रह गये। कर्मचारी ने लिखा, 'साहब पत्नी की तबीयत खराब रहती है। उसका शरीर दर्द करता है तो हाथ पैर भी दबाने पड़ते हैं। इसलिए खाना मुझे ही बनाना पड़ता है। रोटी बनाना सीख रहा हूं। कभी-कभी रोटियां जल जाती हैं। जिसपर पत्नी नाराज होती है। आज कल मैं दलिया बनाकर खा रहा हूं। मेरे इलाके की सड़कों पर बहुत गड्ढे हैं। कभी इनके कारण तो कभी जाम के कारण ऑफिस देरी से पहुंचता हूं।
इस सफाई पर अधिकारी के माथे पर बल पड़ गये तो उन्होने सख्ती और एक्शन करने के बजाय मानवीय रुख अपनाने का फैसला लिया। स्पष्टीकरण में कर्मचारी ने अपने अधिकारी से अनुरोध किया है कि 'सुबह वह पत्नी की सेवा जल्दी करके कार्यालय के लिए निकलेगा। बाकी आप खुद समझदार हैं।' अधिकारी ने कर्मचारी पर दया तो दिखाई है लेकिन देर से आने वाले कर्मचारियों की फेहरिस्त यूपी में बेहद लंबी है।
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कर्मचारी का नाम अशोक कुमार है जो आशु लिपिक पद पर तैनात है। कर्मचारी 18 अगस्त को दफ्तर देरी से पहुंचा था। इस पर कार्रवाई करते हुए डिप्टी कमिश्नर वाणिज्यकर एमएस वर्मा ने लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। इसके लिए उसी दिन शाम तक जवाब देने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई थी।
अधिकारी ने एक लेटर जारी किया था जिसमें अशोक कुमार से पूछा गया था कि 'वे कार्यालय में निर्धारित समय 10.15 बजे तक उपस्थित क्यों नहीं हुए? जबकि उन्होंने देर से आने की कोई अर्जी भी नहीं दी है। क्यों ना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए? इसका जवाब वे 18 अगस्त की शाम तक अवश्य दें।' इसके बाद अशोक कुमार ने देर से आने का जवाब दिया। जिसे सुनकर सभी स्तब्ध हैं।
मानवीय आधारों पर दफ्तरों में कई तरह से मदद मिलती है लेकिन अगर रोज ऐसी स्थिति हो तो सरकार ऐसे कर्मचारियों के साथ विकास का काम तेजी से हरगिज नहीं कर पाएंगे।
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कर्मचारी की लिखित स्पष्टीकरण को पढ़ अधिकारी भी हक्के-बक्के रह गये। कर्मचारी ने लिखा, 'साहब पत्नी की तबीयत खराब रहती है। उसका शरीर दर्द करता है तो हाथ पैर भी दबाने पड़ते हैं। इसलिए खाना मुझे ही बनाना पड़ता है। रोटी बनाना सीख रहा हूं। कभी-कभी रोटियां जल जाती हैं। जिसपर पत्नी नाराज होती है। आज कल मैं दलिया बनाकर खा रहा हूं। मेरे इलाके की सड़कों पर बहुत गड्ढे हैं। कभी इनके कारण तो कभी जाम के कारण ऑफिस देरी से पहुंचता हूं।
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इस सफाई पर अधिकारी के माथे पर बल पड़ गये तो उन्होने सख्ती और एक्शन करने के बजाय मानवीय रुख अपनाने का फैसला लिया। स्पष्टीकरण में कर्मचारी ने अपने अधिकारी से अनुरोध किया है कि 'सुबह वह पत्नी की सेवा जल्दी करके कार्यालय के लिए निकलेगा। बाकी आप खुद समझदार हैं।' अधिकारी ने कर्मचारी पर दया तो दिखाई है लेकिन देर से आने वाले कर्मचारियों की फेहरिस्त यूपी में बेहद लंबी है।
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कर्मचारी का नाम अशोक कुमार है जो आशु लिपिक पद पर तैनात है। कर्मचारी 18 अगस्त को दफ्तर देरी से पहुंचा था। इस पर कार्रवाई करते हुए डिप्टी कमिश्नर वाणिज्यकर एमएस वर्मा ने लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। इसके लिए उसी दिन शाम तक जवाब देने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई थी।
अधिकारी ने एक लेटर जारी किया था जिसमें अशोक कुमार से पूछा गया था कि 'वे कार्यालय में निर्धारित समय 10.15 बजे तक उपस्थित क्यों नहीं हुए? जबकि उन्होंने देर से आने की कोई अर्जी भी नहीं दी है। क्यों ना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए? इसका जवाब वे 18 अगस्त की शाम तक अवश्य दें।' इसके बाद अशोक कुमार ने देर से आने का जवाब दिया। जिसे सुनकर सभी स्तब्ध हैं।
मानवीय आधारों पर दफ्तरों में कई तरह से मदद मिलती है लेकिन अगर रोज ऐसी स्थिति हो तो सरकार ऐसे कर्मचारियों के साथ विकास का काम तेजी से हरगिज नहीं कर पाएंगे।