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'बागी गुट को कानूनी दर्जा असंभव': पूर्व TMC सांसद का दावा- पाला बदलते ही जाएगी सदस्यता; स्पीकर बिरला पर नजरें
Sat, 13 Jun 2026 06:25 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 13 Jun 2026 06:25 PM IST
सार
टीएमसी में बगावत के बीच पूर्व सांसद साकेत गोखले ने दावा किया है कि बागी सांसदों के पास अलग ग्रुप बनाने या भाजपा में विलय करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यदि 19 बागी सांसद एनडीए का समर्थन करते हैं, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी संसद सदस्यता तुरंत रद्द हो जाएगी।
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टीएमसी में हार के बाद असंतोष
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस संकट में डूब गई है। पार्टी के भीतर मची यह बगावत अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है। टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने शनिवार को बागी सांसदों को कानूनी चेतावनी दी है। गोखले ने दावा किया कि अगर बागी सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन दिया, तो वे सीधे अयोग्य घोषित हो जाएंगे। कानून में अलग गुट बनाने की कोई गुंजाइश नहीं है।
बगावत का यह तूफान तब और तेज हो गया है। दरअसल, टीएमसी के बागी सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने का फैसला किया है। अब सबकी नजरें बिरला पर ही टिकी हैं। बागी सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया ने शुक्रवार को दावा किया था कि उनके साथ 19 लोकसभा सांसद हैं। वे खुद को असली टीएमसी बताते हुए संसद में एक अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता मांग रहे हैं। लेकिन साकेत गोखले का कहना है कि इन बागियों को कानून की समझ नहीं है और वे जनता के जनादेश को धोखा दे रहे हैं।
कानून में 'विभाजन' को कोई सुरक्षा नहीं: गोखले
साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बागियों को घेरते हुए कहा कि भाजपा से मिले करोड़ों के ऑफर के चक्कर में वे कानून पढ़ना भूल गए हैं। संविधान के 91वें संशोधन के बाद अब कानून में 'पार्टी विभाजन' यानी स्प्लिट को कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती है। संसद में अलग ग्रुप बनाने की कोशिश पूरी तरह अवैध है।
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उन्होंने दावा किया कि बागी सांसद खुद को भाजपा में विलय भी नहीं कर सकते। विलय के लिए सिर्फ विधायी पार्टी (सांसदों) का मिलना काफी नहीं है, बल्कि पूरी की पूरी मूल पार्टी का विलय होना जरूरी है। गोखले के शब्दों में, 'यह काम उनके जीते जी तो बिल्कुल नहीं होने वाला है।' इसलिए अगर बागी 28 में से 25 सांसदों के दस्तखत भी ले आएं, तो भी वे तकनीकी रूप से भाजपा में शामिल नहीं हो सकते।
यह भी पढ़ें: डीआरडीओ की बड़ी सफलता: अब आसमान से आने वाले खतरे और समुद्र में छिपे दुश्मन; अब दोनों के लिए तैयार है भारत
एनडीए को वोट दिया तो खत्म होगी सांसदी- गोखले
टीएमसी के पूर्व सांसद ने चेतावनी दी कि अगर इन बागियों ने संसद में एनडीए का समर्थन किया या पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया, तो इसे 'दलबदल' माना जाएगा। जैसे ही वे भाजपा के पक्ष में जाएंगे, यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने खुद अपनी मर्जी से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है।
सांसद भी नहीं बचा पाएंगे सीट
साकेत गोखले ने साफ किया कि बागी जो भी तिकड़म लगा लें, अंत में उनका अयोग्य होना तय है। वे बंगाल की जनता और टीएमसी के साथ गद्दारी नहीं करने देंगे। गौरतलब है कि इस हफ्ते सुखेंदु शेखर रॉय और सुस्मिता देव के बाद राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने भी इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी का संकट और गहरा गया है।
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बगावत का यह तूफान तब और तेज हो गया है। दरअसल, टीएमसी के बागी सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने का फैसला किया है। अब सबकी नजरें बिरला पर ही टिकी हैं। बागी सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया ने शुक्रवार को दावा किया था कि उनके साथ 19 लोकसभा सांसद हैं। वे खुद को असली टीएमसी बताते हुए संसद में एक अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता मांग रहे हैं। लेकिन साकेत गोखले का कहना है कि इन बागियों को कानून की समझ नहीं है और वे जनता के जनादेश को धोखा दे रहे हैं।
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कानून में 'विभाजन' को कोई सुरक्षा नहीं: गोखले
साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बागियों को घेरते हुए कहा कि भाजपा से मिले करोड़ों के ऑफर के चक्कर में वे कानून पढ़ना भूल गए हैं। संविधान के 91वें संशोधन के बाद अब कानून में 'पार्टी विभाजन' यानी स्प्लिट को कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती है। संसद में अलग ग्रुप बनाने की कोशिश पूरी तरह अवैध है।
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उन्होंने दावा किया कि बागी सांसद खुद को भाजपा में विलय भी नहीं कर सकते। विलय के लिए सिर्फ विधायी पार्टी (सांसदों) का मिलना काफी नहीं है, बल्कि पूरी की पूरी मूल पार्टी का विलय होना जरूरी है। गोखले के शब्दों में, 'यह काम उनके जीते जी तो बिल्कुल नहीं होने वाला है।' इसलिए अगर बागी 28 में से 25 सांसदों के दस्तखत भी ले आएं, तो भी वे तकनीकी रूप से भाजपा में शामिल नहीं हो सकते।
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एनडीए को वोट दिया तो खत्म होगी सांसदी- गोखले
टीएमसी के पूर्व सांसद ने चेतावनी दी कि अगर इन बागियों ने संसद में एनडीए का समर्थन किया या पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया, तो इसे 'दलबदल' माना जाएगा। जैसे ही वे भाजपा के पक्ष में जाएंगे, यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने खुद अपनी मर्जी से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है।
सांसद भी नहीं बचा पाएंगे सीट
साकेत गोखले ने साफ किया कि बागी जो भी तिकड़म लगा लें, अंत में उनका अयोग्य होना तय है। वे बंगाल की जनता और टीएमसी के साथ गद्दारी नहीं करने देंगे। गौरतलब है कि इस हफ्ते सुखेंदु शेखर रॉय और सुस्मिता देव के बाद राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने भी इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी का संकट और गहरा गया है।