भाजपा के पास न चेहरा, न आधार और ध्रुवीकरण के सहारे चली बंगाल जीतने: सुब्रत मुखर्जी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहते हैं कि तृणमूल के लोगों की भाजपा में आने के लिए लाइन लगी है। उनके कुछ मंत्री, कई सांसद, दर्जनों विधायक भाजपा में आने वाले हैं...
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहते हैं कि तृणमूल के लोगों की भाजपा में आने के लिए लाइन लगी है। उनके कुछ मंत्री, कई सांसद, दर्जनों विधायक भाजपा में आने वाले हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी होने से पहले पश्चिम बंगाल तेजी से चुनावी मोड में आ रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा उठाए एक-एक मुद्दे पर चुन-चुनकर निशाना साधना शुरू कर दिया है। भाजपा ने पूरे बंगाल को पांच भागों में बांटकर युद्ध स्तर पर चुनाव की तैयारी तेज कर दी है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष को सत्ता बदलने का पूरा भरोसा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा का कहना है कि भाजपा को सपना देखना छोड़ देना चाहिए। वरिष्ठ नेता और सरकार में मंत्री सुब्रतो मुखर्जी भी कहते हैं कि भाजपा को इस बार विधानसभा चुनाव में अपनी हैसियत का पता चल जाएगा।
न चेहरा, न आधार...चले हैं ध्रुवीकरण के सहारे बंगाल जीतने
सुब्रतो मुखर्जी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वह कहते हैं कि लोकसभा चुनाव की बात अलग है। वहां के लिए प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की छवि चल गई लेकिन यह विधानसभा चुनाव है। भाजपा के पास न तो मुख्यमंत्री का चेहरा है और न ही आधार और न बंगाल के विकास का मॉडल। सुब्रतो दा कहते हैं कि यह बंगाल है। यहां सांप्रदायिकता का जहर घोलकर राज्य में सरकार बना पाना आसान नहीं है।
बंगाल के लोग यह देखकर वोट डालेंगे कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा, किसकी मंत्रिपरिषद होगी और कौन बंगाल का विकास करेगा। चंद्र नाथ सिन्हा का कहना है कि प्रस्तावित चुनाव 2021 में तृणमूल कांग्रेस 200 से भी अधिक सीट लेकर आएगी। चंद्रनाथ सवाल उठाते हुए कहते हैं कि भाजपा के पास है क्या? केवल लोगों को बांटने की राजनीति करती है। तोड-फोड़ की राजनीति करके सत्ता पाने की भाजपा की इच्छा धरी की धरी रह जाएगी।
हम सब कैडर, लीडर केवल एक
चंद्रनाथ सिन्हा कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस की नेता केवल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। हम सब पार्टी के नेता, कार्यकर्ता इसका कैडर हैं। भाजपा तोड़-फोड़ में लगी है, लेकिन जो भी तृणमूल कांग्रेस छोड़ेगा, वह पश्चिम बंगाल में कटी पतंग हो जाएगा। राज्य सरकार के मंत्री शिवेंदु के नाराज होकर इस्तीफा देने पर चंद्रनाथ सिन्हा ने कहा कि अभी इस बारे में मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना है, इंतजार कीजिए। पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। सुब्रत मुखर्जी कहते हैं कि राजनीति में महत्वाकांक्षा सबके पास होती है। कोई भी पाल सकता है, लेकिन वोट तो जनता देती है। इंतजार कीजिए।
कांग्रेस और सीपीएम मिलकर लड़ेंगे तो भाजपा लटक जाएगी
सुब्रत मुखर्जी कहते हैं कि माकपा को इस बार अपना राजनीतिक वजूद बचाना है। पिछली बार उसने तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने के लिए भाजपा का साथ दे दिया था। उत्तरी बंगाल में भी वोट ट्रांसफर करा दिया था। लेकिन इस बार यदि माकपा के विधायकों की संख्या नहीं बढ़ी, तो पश्चिम बंगाल से उसका तंबू उखड़ जाएगा। इसलिए माकपा ने पूरी जान लड़ा दी है। कांग्रेस के साथ उसका तालमेल होने पर दोनों के वोट बढ़ेंगे और भाजपा के घटेंगे। वैसे भी माकपा का वोट कांग्रेस में ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन कांग्रेस का माकपा में नहीं हो पाता। इसलिए इससे तृणमूल को फायदा ही होने वाला है। सुब्रत मुखर्जी कहते हैं कि देखते जाइए, प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी हानि भाजपा की ही होगी।
तृणमूल कांग्रेस के लोगों की भाजपा में आने के लिए लगी है लाइन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहते हैं कि तृणमूल के लोगों की भाजपा में आने के लिए लाइन लगी है। उनके कुछ मंत्री, कई सांसद, दर्जनों विधायक भाजपा में आने वाले हैं। चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी होने या चुनाव का समय नजदीक आने पर बंगाल में तृणमूल में भगदड़ शुरू होगी। दिलीप घोष ने कहा कि हमें अच्छा फीडबैक मिल रहा है। बस दिसंबर के महीने के बाद देखिएगा। अभी लोग तृणमूल के गुंडो से डर रहे हैं। ये गुंडे हिंसा पर उतारू हैं और हम इनमें से कुछ गुंडों को भाजपा में शामिल कराकर उन्हें न्यूट्रल करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दिलीप घोष कहते हैं कि बंगाल सत्ता परिवर्तन के लिए तैयार है और चुनाव बाद राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी।