{"_id":"622a07d529e9984e065d193a","slug":"tmc-asks-congress-to-merge-with-it-citing-poor-performance-in-assembly-elections-of-five-states-congress-hits-back","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव परिणाम 2022: कांग्रेस के लचर प्रदर्शन पर टीएमसी ने दी विलय करने की सलाह, चौधरी ने बताया 'भाजपा का एजेंट'","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
चुनाव परिणाम 2022: कांग्रेस के लचर प्रदर्शन पर टीएमसी ने दी विलय करने की सलाह, चौधरी ने बताया 'भाजपा का एजेंट'
Thu, 10 Mar 2022 07:44 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 10 Mar 2022 07:44 PM IST
सार
राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष की भूमिका में आने की कोशिश कर रही ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को देखकर उसे टीएमसी में विलय कर लेने की सलाह दी है। वहीं, कांग्रेस ने इसे लेकर टीएमसी को भाजपा का सबसे बड़ा एजेंट बताया है।
विज्ञापन
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना जारी है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में से पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी लेकिन इस बार यहां भी उसे करारी हार का सामना करना पड़ा है। उधर, कांग्रेस के इस लचर प्रदर्शन को देखते हुए पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) ने इसे सलाह दी है कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व में भजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए टीएमसी में विलय कर लेना चाहिए।
विज्ञापन
वहीं, कांग्रेस ने टीएमसी की इस बात पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और उसे भाजपा का एजेंट करार दिया है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की भूमिका में आना चाहती हैं, जो फिलहाल कहने को ही सही पर कांग्रेस के पास है।
विज्ञापन
टीएमसी ने इस बार गोवा में भी अपने उम्मीदवार उतारे थे लेकिन इसका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। टीएमसी नेताओं ने कहा कि हमें गोवा में जितने वोट मिले हैं हम उससे संतुष्ट हैं। हमने गोवा में अपनी इकाई की शुरुआत कुछ महीने पहले ही की थी।
विज्ञापन
राजनीतिक रूप से बेहद अहम राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा लगातार दूसरी बार जीत की ओर बढ़ रही है और गोवा, उत्तराखंड व मणिपुर में भी बहुमत के करीब है। वहीं, पंजाब में आम आदमी पार्टी विशाल जीत की राह पर है। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को राज्य से एकदम खत्म करने का काम किया है। अब कांग्रेस के पास केवल राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता रह गई है। कांग्रेस की इसी स्थिति को देखते हुए टीएमसी ने विलय के लिए कहा है।
'भाजपा के खिलाफ जंग में असफल रही कांग्रेस'
टीएमसी के वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम ने कहा कि परिणामों से सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस अब केवल दो राज्यों तक सीमित रह गई है। कांग्रेस भाजपा के खिलाफ जंग में असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा, 'टीएमसी ने दिखाया है कि आप भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़ सकते हैं और उसे हरा भी सकते हैं। यही समय है कि कांग्रेस टीएमसी में विलय कर ले और ममता बनर्जी के नेतृत्व में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक जंग लड़े।'
फिरहाद हाकिम का समर्थन करते हुए टीएमसी के महासिचव कुणाल घोष ने कहा कि कांग्रेस की असफलताओं के चलते भाजपा पांच में से चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत की ओर बढ़ी है। उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से यह बात कहते आ रहे हैं कि अपनी मौजूदा स्थिति में कांग्रेस भाजपा के खिलाफ लड़ने के लिए योग्य नहीं है। घोष ने आगे कहा कि भाजपा जैसी पार्टी से लड़ने के लिए आपको ममता बनर्जी जैसे नेता की जरूरत है।
भाजपा के एजेंट हमको सलाह न दें: अधीर रंजन
उधर, तृणमूल कांग्रेस की विलय करने की पेशकश पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि 'भाजपा के एजेंटों' को हमें यह सलाह नहीं देनी चाहिए कि भगवा दल के खिलाफ कैसे लड़ाई लड़ें। चौधरी ने आगे कहा, 'टीएमसी भाजपा की सबसे बड़ी एजेंट है... अगर वह भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए इतनी ही गंभीर है तो उसे कांग्रेस में विलय कर लेना चाहिए।' अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस के नेता भी हैं।
भाजपा ने दोनों को ही बताया परिवारवादी पार्टियां
वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने वाली बाजपा ने कहा है कि चार राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन हमारी विकास आधारिक राजनीति की जीत है। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि हम कांग्रेस के विलय के लिए टीएमसी की पेशकश पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं क्योंकि दोनों ही परिवारवादी पार्टियां हैं। उन्होंने कहा कि चार राज्यों में भाजपा की यह जीत जनता के भरोसे की जीत है।