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पुतिन और चीन के राष्ट्रपति के साथ वार्ता के बाद निकलेगी भारत से रिश्तों की नई राह
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 03 Oct 2016 11:51 PM IST
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उड़ी में आतंकी हमला, जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक और भारत-पाक के बीच रूस और चीन के राष्ट्रपति (ब्लादिमीर पुतिन तथा शी जिनपिंग) भारत आ रहे हैं। दोनों नेताओं की यात्रा भारत, ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका(ब्रिक्स) की आठवीं शिखर बैठक के क्रम में हो रही है। 15-16 अक्टूबर को यह बैठक गोवा में होनी है, लेकिन क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में इसे काफी अहम माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 15 सितंबर को द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। इसी दिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत अन्य नेताओं के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी की वार्ता होगी। 16 सितंबर को ब्रिक्स शिखर देशों के नेताओं की बैठक होगी और इसमें आतंकवाद के विरुद्ध आवाज उठने की पूरी संभावना है।
सर्जिकल स्ट्राइक का रहेगा असर
गुलाम कश्मीर में भारत द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक करनेे के बाद रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के शिखर नेता भारत में होंगे। इसके अलावा बीआईएमएसटीईसी(बिम्सटेक) के शिखर नेता भी देश में होंगे। वहीं पाकिस्तान इस सर्जिकल स्ट्राइक को झुठलाने में जुटा है और दोनों देशों के बीच में काफी तनाव की स्थिति है। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में फौज की तैनाती भी बढ़ाना शुरू कर दिया है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी विश्व के नेताओं को सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने की जरूरत के बारे में जानकारी दे सकते हैं। पाकिस्तान से प्रॉक्सीवार के तौर पर जारी आतंकवाद तथा ताजा हालात के बारे में जानकारी देकर भारत पक्ष रख सकते हैं।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 15 सितंबर को द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। इसी दिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत अन्य नेताओं के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी की वार्ता होगी। 16 सितंबर को ब्रिक्स शिखर देशों के नेताओं की बैठक होगी और इसमें आतंकवाद के विरुद्ध आवाज उठने की पूरी संभावना है।
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सर्जिकल स्ट्राइक का रहेगा असर
गुलाम कश्मीर में भारत द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक करनेे के बाद रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के शिखर नेता भारत में होंगे। इसके अलावा बीआईएमएसटीईसी(बिम्सटेक) के शिखर नेता भी देश में होंगे। वहीं पाकिस्तान इस सर्जिकल स्ट्राइक को झुठलाने में जुटा है और दोनों देशों के बीच में काफी तनाव की स्थिति है। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में फौज की तैनाती भी बढ़ाना शुरू कर दिया है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी विश्व के नेताओं को सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने की जरूरत के बारे में जानकारी दे सकते हैं। पाकिस्तान से प्रॉक्सीवार के तौर पर जारी आतंकवाद तथा ताजा हालात के बारे में जानकारी देकर भारत पक्ष रख सकते हैं।
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ब्रिक्स के बाद बिम्सटेक में पाकिस्तान होगा दरकिनार
ब्रिक्स के बाद बिम्सटेक सदस्य देशों के शिखर नेताओं की बैठक होगी। ये बिम्सटेक में अफगानिस्तान, बंग्लादेश, भूटान, मालदीव, म्यामार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड और भारत सदस्य हैं। इसमें पाकिस्तान को छोड़कर सार्क के सभी सदस्य और पूर्वोत्तर के देश शामिल हैं। म्यामार की नेता आंग सान सू की भी देश में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद पहली बार भारत आ रही है। ऐसे में भारत इस मंच पर आतंकवाद के मुद्दे को उठाएगा और पाकिस्तान को कूटनीतिक दृष्टि से अलग-थलग करने की पहल करेगा। इन देशों के नेताओं को भी भारत सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने की जरूरत के बारे में बताएगा।
मसूद अजहर का उठ सकता है मुद्दा
चीन के राष्ट्रपति के साथ चर्चा में आतंकी सरगना मसूद अजहर का मुद्दा उठ सकता है। भारत जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर और उसके संगठन को संयुक्त राष्ट्र में आतंकी घोषित करने की पहल कर रहा है और चीन इसमें अडंग़ा डाल रहा है। इसके अलावा हिमालयी पर्यावरण, ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह, द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन, पाक अधिकृत कश्मीर में चीन की सिल्क रूट परियोजनाओं पर भारत की नाराजगी को लेकर भी चर्चा के पूरे आसार हैं।
रूस के साथ बैठक है अहम
इस कड़ी में भारत का पुराना और विश्वसनीय सामरिक साझीदार देश रूस काफी अहम है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच वार्ता के बाद चीन के साथ भी रिश्तों में संतुलन की राह निकलेगी। इसके साथ-साथ पाकिस्तान को लेकर भी अहम चर्चा के आसार हैं। भारत के अनुरोध पर ही रूस ने पिछले महीने पाकिस्तान के साथ गुलाम कश्मीर में संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास को टाल दिया था।
गोवा में द्विपक्षीय वार्ता को मास्को और नई दिल्ली के बीच रिश्तों के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से यह संबंध नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं समय रहते सबकुछ दुरुस्त हो जाने के आसार हैं। ऐसे में रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, द्विपक्षीय व्यापार, निवेश समेत अन्य क्षेत्रों में दोनों देश आगे बढ़ सकते हैं।