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'मददगार' के जरिए कश्मीरियों का दिल जीत रही है सेना

Mon, 09 Jul 2018 09:33 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर Updated Mon, 09 Jul 2018 09:33 AM IST
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through Madadgaar Initiative CRPF is making change in kashmiris live and providing them help support

बिलाल (बदला हुआ नाम) हंदवाड़ा का एक दिहाड़ी मजदूर है जिसे डॉक्टरों ने जनवरी में बताया कि उसकी दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। उसके पास अपने इलाज के लिए पैसा नहीं है और काम वह छोड़ नहीं सकता क्योंकि उसके पांच बच्चे हैं। अप्रैल में उसने सीआरपीएफ के एक वाहन पर मददगार हेल्पलाइन 14411 लिखी हुई देखी। उसने इस हेल्पलाइन पर फोन किया और कुछ दिनों में ही सीआरपीएफ की एक यूनिट उसके पास पहुंच गई। उन्होंने उसकी तबियत का परीक्षण किया और उसके डायलिसिस के लिए कुछ एनजीओ से संपर्क किया। अब उसे हर महीने 10,000 रुपए अपने इलाज के लिए मिलते हैं।

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बिलाल कश्मीर के उन हजारों लोगों में शामिल हैं जिन्हें कि 'मददगार' से मदद मिली है। यह सीआरपीएफ की एक पहल है जिसे पिछले साल लॉन्च किया गया था और इससे वर्तमान में बहुत सारे लोगों की मदद की जा रही है। 16 जून 2017 को अपने लॉन्च होने के बाद से मददगार ने छेड़खानी, पानी, बिजली और सड़क निर्माण से जुड़ी परेशानियां, मेडिकल इमरजेंसी, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, फायर इमरजेंसी, प्राकृतिक आपदा, जबरन वसूली, नौकरी से जुड़ी जानकारी और शिक्षा, खेल के क्षेत्र में करियर बनाने संबंधि ममालों को सुलझाए हैं। 67 बटालियन की हर यूनिट (एक यूनिट में 67,000 जवान) की जम्मू और कश्मीर में तैनाती की गई है। उनसे कश्मीरियों की परेशानी को प्राथमिकता के तौर पर लेने के लिए कहा गया है।
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केवल इतना ही नहीं हेल्पलाइन उन कश्मीरियों की भी परेशानी सुनता है जो देश के दूसरे हिस्सों में रह रहे हैं। जैसे यदि दिल्ली एनसीआर में कोई छात्र शोषण का शिकार हो रहा है तो सीआरपीएफ से मदद मांगने पर सुरक्षाबल उस क्षेत्र की यूनिट और स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी देते हैं, जो उनकी परेशानी हल करते हैं। एक साल के अंदर इस हेल्पलाइन पर 2,22,345 पंजीकृत फोन आए हैं। जिसमें से 2,349 पर कार्रवाई की गई और 2,100 कॉल्स को संतोषजनक ढंग से हल किए गए हैं।
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दिलचस्प बात यह है कि सीआरपीएफ पर कश्मीरी कई मौकों पर पत्थर फेंकते हैं जिसमें लड़कियां भी शामिल होती हैं। इसके बावजूद सुरक्षाबलों को जब लड़कियों से छेड़छाखी संबंधित शिकायत मिलती है तो उसपर कार्रवाई करते हुए वह आरोपियों की काउंसिलिंग करवाते हैं या फिर उन्हें चेतावनी देते हैं। कुछ मामलों में आरोपियों के खिलाफ स्थानीय पुलिस से संपर्क करने के बाद कानूनी कार्रवाई भी की जाती है। असिस्टेंट कमांडेट जुनैद जो खुद एक कश्मीरी हैं वह मददगार पहल के मुखिया हैं।

जुनैद ने कहा, 'हमारे एग्जीक्यूटिव फोन करने वाले शख्स की सभी डिटेल एक फॉर्म पर लिखते हैं उसकी परेशानी को सुनते हैं और इसके बाद उस क्षेत्र की सीआरपीएफ यूनिय से संपर्क किया जाता है। वह उस कॉलर की जानकारी को सत्यापित करने के बाद उसकी मदद करते हैं। नागरिक समस्याओं के मामलों में हमारे जवान कॉलर को उस संबंधित विभाग ले जाते हैं और परेशानी खत्म हो जाती है। शुरुआत में हमारे पास केवल नागरिक समस्याओं से संबंधित फोन आते थे लेकिन जैसे-जैसे लोगों को इस हेल्पलाइन के बारे में पता चला हमारे पास मेडिकल इमरजेंसी, रोजगार और करियर काउंसिलिंग के लिए भी फोन आने लगे। फोन सीमा पर स्थित गांवों के अलावा दक्षिण कश्मीर से भी आते हैं।'


'एक मामले में ओ नेगेटिव खून की जरुरत थी जिसके तुरंत बाद सीआरपीएफ के जवानों ने 6 यूनिट खून दिया था। इसी तरह एक लड़के को हम तीन बार इलाज के लिए एम्स ले जा चुके हैं। मददगार के जरिए 26 मेजर सर्जरी की जा चुकी हैं और 44 होनी हैं।' अब्दुल (बदला हुआ नाम) की सीआरपीएफ ने एक नकली टांग लगाई है। उसने कहा, 'वह (सीआरपीएफ) हमेशा हमारा फोन उठाते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि मैं अपने किसी दोस्त से बात कर रहा हूं। वह सही में बहुत मददगार हैं।'

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