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तीन साल के रूसी बच्चे का चेन्नई में किया गया बर्लिन हार्ट प्रत्यारोपण, दक्षिण एशिया में हुआ ऐसा पहला ऑपरेशन

Wed, 29 Jul 2020 10:25 AM IST
अनवर अंसारी एएनआई, चेन्नई
एएनआई, चेन्नई Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 29 Jul 2020 10:25 AM IST
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Three year Old Russian Boy Recovers After Berlin Heart Implantation In Chennai
डॉक्टरों के साथ बच्चा - फोटो : ANI

दक्षिण एशिया के किसी देश में पहली बार 'सर्जिकल बायवेन्ट्रिकुलर हार्ट इंप्लांटेशन' के जरिए एक हृदय प्रत्यारोपण ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है। इस ऑपरेशन को चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर में डॉक्टरों की एक टीम द्वारा रूस के एक तीन वर्षीय बच्चे पर किया गया। अस्पताल द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गई है। 

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विज्ञप्ति में कहा गया कि लेव फेड्रोरेंको नाम का यह बच्चा हृदय की एक बीमारी 'रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी' से जूझ रहा था और ऑपरेशन के बाद ठीक हो गया है। 
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25 मई को कार्डिएक साइंसेज के अध्यक्ष और निदेशक और हृदय और फेफड़े के प्रत्यारोपण और इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट एंड मैकेनिकल सर्कुलर सपोर्ट प्रोग्राम के निदेशक डॉ केआर बालाकृष्णन के नेतृत्व में एक टीम द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। 
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टीम के अन्य सदस्यों में इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट एंड मैकेनिकल सर्कुलर सपोर्ट के सह निदेशक और कार्डिएक एनेस्थीसिया के एचओडी डॉ सुरेश राव केजी, कार्डियक सर्जन डॉ वी श्रीनाथ और एमजीएम हेल्थकेयर के वरिष्ठ सलाहकार डॉ एस गणपति शामिल थे। 

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डॉ राव केजी ने बताया कि इस तीन साल के बच्चे को गंभीर रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी की अवस्था में अस्पताल में लाया गया था। अस्पताल लाने से पहले इस बच्चे को दो बार दिल का दौरा पड़ चुका था। हमने उसे होश में लाने के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद डॉक्टरों को लगा कि इस बच्चे को होश में लाने के लिए दिल में मैकेनिकल पंप लगाना पड़ेगा। 


उन्होंने बताया कि इससे पहले तक हमने केवल व्यस्क लोगों में मैकेनिकल पंप का प्रयोग किया है। लेकिन 10 किलोग्राम से कम और इतनी कम उम्र के बच्चों के लिए कोई पंप उपलब्ध नहीं था। इसके बाद हमने लॉकडाउन के दौरान जर्मनी से बर्लिन हार्ट पंप मंगाया। ऐसा पहले दक्षिण एशिया में कहीं नहीं किया गया था। बर्लिन हार्ट कंपनी ने ऑनलाइन सपोर्ट मुहैया कराया और इस तरह हम इसे बच्चे के दिल में लगा पाए। 

विज्ञप्ति के अनुसार, इस ऑपरेशन के लिए भारतीय सर्जिकल टीम को यूके और जर्मनी की एक टीम ने वर्चुअल माध्यम से सहयोग दिया और यह ऑपरेशन सात घंटे तक चला। बताया गया है कि बच्चे की हालत अब पहले से ठीक है। 

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