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ऋतब्रत के गुट में या ममता के साथ?: तीन बागी विधायक दीदी के प्रदर्शन में पहुंचे; टीएमसी की कलह ने लिया नया मोड़

Mon, 10 Aug 2026 09:04 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 10 Aug 2026 09:04 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में सोमवार को टीएमसी के अंदरूनी विवाद के बीच नया राजनीतिक संकेत दिखा, जब ऋतब्रत बनर्जी कैंप से जुड़े तीन विधायक ममता बनर्जी समर्थित गुट के प्रदर्शन में शामिल हुए। आखिर संगठनात्मक विवाद के बावजूद तीनों विधायक ममता के साथ क्यों खड़े हुए? टीएमसी की अंदरूनी खींचतान कितनी बढ़ी है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Three Ritabrata Camp MLAs Join Mamata Faction Protest Amid TMC Growing Internal Rift in Bengal
ममता बनर्जी - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी संगठनात्मक खींचतान के बीच सोमवार को एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर सामने आई। ऋतब्रत बनर्जी कैंप से जुड़े तीन विधायकों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में ममता बनर्जी समर्थित गुट के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर कथित हमले के विरोध में किया गया था।

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क्या ऋतब्रत कैंप के तीन विधायक ममता के समर्थन में उतरे?

मेटियाब्रुज से विधायक अब्दुल खालिक मोल्ला, बशीरहाट से विधायक तौसिफुर रहमान और बारुईपुर ईस्ट से विधायक बिभास सरदार ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रदर्शन में शामिल हुए। तीनों विधायक पहले ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के पद के लिए समर्थन देने वाले 65 विधायकों में शामिल थे। टीएमसी के कुल 80 विधायक हैं।

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तौसिफुर रहमान ने प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर कहा कि उनका राजनीतिक समर्थन ममता बनर्जी के साथ है और संगठन से जुड़ा विवाद अलग मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जहां दीदी होंगी, वह वहीं रहेंगे।

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क्या ममता के नाम पर एकजुट हैं TMC के विधायक?

बिभास सरदार ने कहा कि टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले हर विधायक को इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता पर हमला हुआ है और वह इसकी कड़ी निंदा करते हैं। वहीं, अब्दुल खालिक मोल्ला ने कहा कि वह संगठनात्मक विवाद में रितब्रत के साथ हैं, लेकिन ममता पर हुए कथित हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

क्या कंचरापाड़ा की घटना के बाद शुरू हुआ विरोध?

इस प्रदर्शन की तत्काल वजह रविवार को कंचरापाड़ा में हुई घटना थी। ममता बनर्जी वहां पुलिस हिरासत में मारे गए बीरजू केओट के परिवार से मिलने गई थीं। आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन पर कीचड़ और चप्पल फेंकी तथा 'चोर-चोर' के नारे लगाए।

ममता बनर्जी ने इसके बाद राज्य सरकार और पुलिस पर 'उपद्रवियों' को संरक्षण देने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी जान को खतरा पैदा हो सकता था। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ममता बनर्जी लोगों को उकसाने के लिए कंचरापाड़ा गई थीं और जनता ने केवल विरोध जताया।

क्या TMC ने हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की?

ममता समर्थित गुट के प्रदर्शन का नेतृत्व कुनाल घोष, शोभन देव चट्टोपाध्याय, अशोक देव और बिमान बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने किया। प्रदर्शनकारियों ने कथित हमले के जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। कुनाल घोष ने आरोप लगाया कि हमले में शामिल लोगों को सरकार का संरक्षण मिल रहा है और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को डराकर रोका नहीं जा सकता।

क्या विधानसभा परिसर के बाहर भी हुआ प्रदर्शन?

ममता समर्थक टीएमसी कार्यकर्ताओं ने राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए। हाजरा में पुलिस ने एक जुलूस को रोक दिया और करीब 30 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया। टीएमसी नेता बैश्वानार चट्टोपाध्याय ने कहा कि ममता बनर्जी पर कथित हमले के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।

क्या TMC का संगठनात्मक विवाद अब और पेचीदा हो गया है?

ऋतब्रत कैंप के तीन विधायकों का ममता समर्थित प्रदर्शन में शामिल होना ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठनात्मक विभाजन से जूझ रही है। विपक्ष के नेता के पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी के संगठन और निर्वाचित प्रतिनिधियों पर नियंत्रण की लड़ाई में बदल गया है।

ऋतब्रत कैंप ने बाद में विशेष संगठनात्मक बैठक कर वरिष्ठ विधायक अरूप राय को अध्यक्ष चुना और समानांतर राष्ट्रीय नेतृत्व संरचना की घोषणा की। कैंप का दावा था कि मौजूदा नेतृत्व ने निर्वाचित प्रतिनिधियों का बहुमत खो दिया है।

क्या TMC का विवाद संसद तक भी पहुंच गया है?

पार्टी के भीतर जारी टकराव का असर संसद तक भी पहुंचा है। खबर के मुताबिक, TMC के 20 लोकसभा सांसद नए बनाए गए नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ चले गए हैं, जो अब NDA का सहयोगी है। इन सांसदों की अयोग्यता को लेकर दलबदल विरोधी कानून के तहत याचिकाएं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष लंबित हैं।

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