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Tamil Nadu: राजीव गांधी हत्याकांड के तीन आरोपी श्रीलंका लौटे, दो साल पहले हुए थे रिहा

Wed, 03 Apr 2024 12:21 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: श्वेता महतो Updated Wed, 03 Apr 2024 12:21 PM IST
सार

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट को सूचित किया कि विदेशी पंजीकरण कार्यालय की तरफ से निर्वासन आदेश मिलने के बाद वे तीनों अपने घर वापस जा सकते हैं। इससे पहले श्रीलंकाई उच्चायोग ने उनकी घर वापसी के लिए यात्रा दस्तावेज जारी किया था। 

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Three ex convicts in Rajiv Gandhi assassination return to Sri Lanka news in hindi
राजीव गांधी हत्याकांड - फोटो : ANI

विस्तार

राजीव गांधी हत्याकांड के तीन पूर्व आरोपी बुधवार को अपने देश श्रीलंका लौट गए। तीनों की पहचान मुरुगन उर्फ श्रीहरन, जयकुमार और रॉबर्ट पायस के तौर पर की गई है, जो श्रीलंका के रहने वाले थे। एक अधिकारी ने बताया कि तीनों श्रीलंकाई वाहक से रवाना हुए।
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सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2022 में उन तीनों को बाकी के सात आरोपियों के साथ रिहा कर दिया था। उनकी रिहाई के बाद उन्हें तिरुचिरापल्ली में एक विशेष शिविर में रखा गया था। वे मंगलवार की रात में चेन्नई पहुंचे और आज सुबह कोलंबो के लिए रवाना हुए। 
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तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट को सूचित किया कि विदेशी पंजीकरण कार्यालय की तरफ से निर्वासन आदेश मिलने के बाद वे तीनों अपने घर वापस जा सकते हैं। इससे पहले श्रीलंकाई उच्चायोग ने उनकी घर वापसी के लिए यात्रा दस्तावेज जारी किया था। 
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इस मामले में एक और श्रीलंकाई आरोपी की पहले ही मौत हो गई थी। इस मामले के अन्य आरोपी जिन्हें रिहा कर दिया गया है वे सभी भारतीय हैं। उनकी पहचान पेरारिवलन, रवीचंद्रन और नलिनी के तौर पर की गई है। सभी आरोपियों ने करीबन 30 साल जेल में समय बिताया था।

कैसे हुई थी पूर्व पीएम की हत्या
 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनावी रैली के दौरान एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी मारे गए थे। महिला की पहचान धनु के तौर पर हुई थी। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें पेरारिवलन, मुरुगन, संथन, रविचंद्रन, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और नलिनी श्रीहरन शामिल थे। 

1998 में टाडा अदालत ने पेरारिवलन, मुरुगन, संथन और नलिनी को मौत की सजा सुनाई थी। राहत नहीं मिलने के बाद पेरारिवलन और अन्य दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। साल 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा। 2014 में इसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया। 

2008 में जब जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थीं, तो उन्होंने कैबिनेट से सातों दोषियों की रिहाई के लिए प्रस्ताव पास किया। जिसे राज्यपाल को भेजा गया था। राज्यपाल ने उसे राष्ट्रपति के पास भेजा। तब से ये मामला लंबित था। 2018 में फिर से तमिलनाडु सरकार ने दोषियों की रिहाई के लिए प्रस्ताव पास करके राज्यपाल के पास भेजा था।  


इस बीच दोषी पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसी साल मई में पेरारिवलन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अनुच्छेद 142 का हवाला देते हुए रिहा कर दिया। इसके बाद अन्य छह दोषियों ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया। जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुक्रवार को पेरारिवलन के मामले में दिए गए फैसले को अन्य सभी दोषियों पर लागू करने का आदेश दिया।
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