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आतंकियों का काल बनेगी सीआरपीएफ: जम्मू-कश्मीर में मिली बड़ी जिम्मेदारी, सेना की 21 लोकेशन पर संभाला मोर्चा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 07 Sep 2026 04:37 PM IST
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CRPF Takes Charge at 21 Army Locations in Jammu and Kashmir, Set to Lead Counter-Terror Operations
केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' और इसकी विशेष इकाई 'आरएएफ', की 83 कंपनियां दिल्ली में तैनात रहेंगी - फोटो : आईएएनएस
देश का सबसे बड़ा केंद्रीय अर्धसैनिक बल, सीआरपीएफ अब जम्मू कश्मीर में आतंकियों का काल बनेगा। 'सीआरपीएफ' और इसकी विशेष इकाई 'कोबरा' को जम्मू-कश्मीर में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। 'कठुआ' और 'उधमपुर' में लगभग 21 लोकेशन, जो अभी तक आर्मी के पास रही हैं, अब उन्हें पूरी तरह से सीआरपीएफ के हवाले कर दिया गया है। आर्मी के नियंत्रण वाली लोकेशन एवं ठिकानों पर अब सीआरपीएफ पहुंच रही है। जंगल वॉरफेयर में निपुण सीआरपीएफ 'कोबरा' की 9 टीमें भी इन्हीं क्षेत्रों में तैनात रहेंगी। खुफिया इनपुट के आधार पर कोबरा कमांडो, ऑपरेशन को अंजाम देंगे। 
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बता दें कि इस दिशा में लंबे समय से 'एरिया ऑफ रिस्पांसिबिलिटी' के तहत काम चल रहा था। चार-पांच वर्ष पहले 'राष्ट्रीय राइफल' की मारक क्षमता में 'सीआरपीएफ' को लाने के बारे में विचार किया गया था। इस प्रपोजल पर आगे बढ़ा गया। इस बाबत सेना और सीआरपीएफ के अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अफसरों की राय ली गई।  इसी के मद्देनजर, 'सीआरपीएफ' को सेना के ऑपरेशन पैटर्न पर आगे बढ़ाया गया। पिछले साल सीआरपीएफ की तीन बटालियनों को, सेना वाली लोकेशन पर तैनात करने की बात कही गई थी। 
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सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ के अधिकारी एवं जवान, आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ज्यादातर ऑपरेशनों में शामिल रहे हैं। इन ऑपरेशनों में सीआरपीएफ के जवानों ने अपना लोहा मनवाया है। सीआरपीएफ को 'व्हील्ड आर्मर्ड एम्फीबियस' जैसे वाहन एवं वॉरफेयर से जुड़े कई दूसरे मॉडर्न उपकरण भी मुहैया कराए गए हैं।
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उधमपुर और कठुआ जिले, जहां सेना की लोकेशन पर सीआरपीएफ को तैनात किया जा रहा है, यह एकाएक लिया गया निर्णय नहीं है। इस पर लंबे समय से काम चल रहा था। गत वर्ष जम्मू रेंज के डीआईजी के निर्देशन में आर्मी द्वारा कई लोकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, सीआरपीएफ के हवाले किया गया है। 

सीआरपीएफ की 24वीं, 121वीं और 187 वीं बटालियन को सेना के नियंत्रण वाली 21 लोकेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन बटालियनों में सभी रैंकों में विशेष ट्रेंड जवानों और अफसरों को शामिल किया गया है। पिछले साल बल मुख्यालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों में कहा गया था कि ऐसे कार्मिक, जिनका तबादला, उक्त बटालियनों में हुआ है, उन्हें संबंधित यूनिटों से बिना किसी देरी के रिलीव कर दिया जाए।
 
लंबे समय से आतंकियों के खिलाफ अभियानों में शामिल रहे आर्मी, आईबी एवं पुलिस के अधिकारियों द्वारा सीआरपीएफ की उक्त बटालियनों के जवानों एवं अफसरों को 'प्री इंडक्शन ट्रेनिंग' दी गई है। 'सीआरपीएफ' को सीएसआरवी और जेसीबी जैसे बुलेट प्रूफ वाहन भी उपलब्ध कराए गए हैं। व्हील्ड आर्मर्ड एम्फीबियस भी सीआरपीएफ को मुहैया कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक, एकाएक भारतीय सेना को वहां से नहीं हटाया गया है। विभिन्न चरणों में यह प्रक्रिया पूरी हो रही है। 


सीआरपीएफ की मूल जिम्मेदारी 'आंतरिक सुरक्षा ग्रिड' को मजबूती प्रदान करना है। इसे यह बल, बखूबी तौर पर निभा रहा है। चाहे नक्सल प्रभावित क्षेत्र हो या आतंकवाद से ग्रस्त इलाका, दोनों जगहों पर सीआरपीएफ ने खुद को साबित कर दिखाया है। सीआरपीएफ की तैनाती का मकसद, जेएंडके में सिक्योरिटी ग्रिड को मजबूती प्रदान करना है। इस कदम को सेना की पूर्ण वापसी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह पहल जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक चरणबद्ध बदलाव का हिस्सा है। 

 
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