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छह साल में इन आठ तूफानों ने की तबाही की कोशिश, कभी रास्ते बदले तो कभी समुद्र निगल गया

Tue, 02 Jun 2020 11:25 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rohit Ojha Updated Tue, 02 Jun 2020 11:25 PM IST
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Threat of 8 cyclones to hit Gujarat Saurashtra in last 6 years but survived every time now Nisarga

बंगाल की खाड़ी में पनपे 'अम्फान' तूफान की तबाही के अभी महीने दिन भी नहीं बिते की देश पर एक और तूफान का खतरा मंडराने लगा है। इस समय अरब सागर से आगे बढ़ रहे तूफान 'निसर्ग' को लेकर महाराष्ट्र और गुजरात में अलर्ट है। गुजरात में इसके भावनगर के समुद्री तट से टकराने की संभावना है। भावनगर के 34 और अमरेली के 24 गांवों में चेतावनी जारी कर दी गई है। जिला एवं तहसील स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। तटीय राज्य होने के चलते गुजरात पर तूफानों का खतरा मंडराता रहा है, लेकिन पिछले छह वर्षों में गुजरात के तट से कोई भी तूफान नहीं टकराया है। तूफान तो कई बार गुजरात की तट की ओर बढ़ें, लेकिन पहुंच नहीं पाए। 

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साल 2014 के बाद गुजरात पर आठ बार चक्रवाती तूफान का खतरा मंडराया है, लेकिन हर बार गुजरात इसकी चपेट में आने से बच गया। इन आठ में से पांच चक्रवात चपाला, ननौक, अशोबा, सागर और वायु ने अपनी दिशा ही बदल ली, जबकि तीन चक्रवात ओखी, निलोफर और महा को समुद्र ने ही अपने भीतर समेट लिया। आइए जानते हैं उन चक्रवातों के बारे में, जो गुजरात की ओर बढ़े लेकिन तट से टकरा नहीं पाए। अरब सागर में चक्रवात ज्यादातर पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश और ओमान जैसे देशों में जाकर बिखर जाते हैं।

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ननौक

13 जून 2014 को अरब सागर में वेरावल से 590 किमी की दूरी पर भूमध्य सागर में ननौक चक्रवात पनपा था। जिसके बाद राज्य के तटीय इलाकों को में चेतावनी जारी कर दी गई थी, लेकिन चक्रवात ननौक ओमान की ओर बढ़ गया और गुजरात से खतरा टल गया।

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नीलोफर 

अक्तूबर 2014 में अरब सागर में उच्च वायु दबाव के कारण नीलोफर चक्रवात का निर्माण हुआ। इस बार संभावित खतरे की जद में सौराष्ट्र और कच्छ के इलाके थे, लेकिन नीलोफर को समुद्र की लहरों ने अपने भीतर समेट लिया।

अशोबा 

जून 2015 में पूर्व-मध्य अरब सागर में अशोबा नाम का चक्रवात पनपा, जो ओमान की ओर जाकर विभाजित हो गया। गुजरात एक बार फिर  भारी तबाही से बच गया।

चपाला 

2015 के अक्तूबर में अरब सागर में चपाला चक्रवात का निर्माण हुआ, लेकिन यह भी गुजरात की ओर नहीं आया। चपाला ओशोबा की तरह  ही ओमान की तरफ निकल गया।

ओखी 

2017 के दिसंबर में ओखी तूफान ने तमिलनाडु और केरल में तबाही मचाई थी, इसके के बाद वह अरब सागर के रास्ते गुजरात की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन वह गुजरात पहुंचने से पहले ही बिखर गया।

सागर 

17 मई 2018, गुजरात के तट पर सागर नामक एक चक्रवात का निर्माण हुआ, लेकिन गुजरात पहुंचने से पहले यह यमन की ओर निकल गया।

वायु 

जून 2019 में अरब सागर में आया वायु तूफान खतरनाक साबित हो रहा था। अनुमान के मुताबिक वह तट से 120 से 160 किमी की गति से टकराने वाला था। चक्रवात को दीव और वेरावल के बीच तट से टकराना था, लेकिन इसकी दिशा बदल गई और यह यमन की ओर चला गया।

महा

सात नवंबर 2019 के दिन अरब सागर पनपे महा चक्रवात के कारण सौराष्ट्र-गुजरात में भारी बारिश हुई। महा चक्रवात दीव और पोरबंदर के बीच टकराने वाला था, लेकिन वह अरब सागर में कमजोर हो गया और समुद्र में समा गया। गुजरात एक बार फिर तबाही से बच गया। 

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