जमीन, मकान, पैन और मतदान, सबके लिए है आधार जरूरी
- क्या हैं आधार कार्ड
- क्यों खास हैं आधार कार्ड
- आप कैसे बनबा सकते हैं आधार कार्ड
- क्या होती हैं आधार कार्ड की वर्चुअल आईडी
- अब इस यूनिक नंबर के बिना नहीं मिलेगा जमीन का स्वामित्व, आधार भी होगा जरूरी
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विस्तार
क्या आप नया मकान या अचल संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे हैं। अगर हां, तो पहले अपना आधार नंबर तैयार रखिए। अगर आपके पास आधार नहीं है तो बनवा ही लीजिए। क्योंकि केंद्र सरकार अचल संपत्ति के स्वामित्व को आधार नंबर से जोड़ने जा रही है। इसके लिए पहली बार संपत्ति स्वामित्व कानून संसद में पेश किया जाएगा। क्योंकि जमीन राज्य विषय का मामला है, इसलिए पांच सदस्यों की एक समिति भी बनाई गई है, जो राज्यों से समन्वय बनाएगी।
गौरतलब है कि इस समय देश के 19 राज्यों में एनडीए-भाजपा की सरकारें हैं। संभव है कि ज्यादातर में यह कानून लागू भी हो जाएगा। इससे संपत्ति की खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़ा और जालसाजी सामने आएगा। साथ ही बेनामी संपत्तियों का भी खुलासा होगा।
दुनिया की सबसे बड़ी बॉयोमीट्रिक आईडी प्रणाली
क्या होती हैं बॉयोमीट्रिक सूचना और जनसांख्यिकीय सूचना
जनसांख्यिकीय सूचना: इसके अंतर्गत व्यक्ति से संबंधित समस्त सूचना और जानकरिया ली जाती हैं जैसे:
- नाम
- सत्यापित जन्मतिथि और आयु
- लिंग
- पता
- मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी
बॉयोमीट्रिक सूचना
- दस उंगलियों के निशान लिए जाते हैं
- दोनों आइरिस स्कैन की जाती हैं
- चेहरे की तस्वीर ली जाती है
क्यों खास हैं आधार
- डुप्लीकेट और फर्जी पहचान का संकट समाप्त करने के लिए प्रभावी है।
- विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं ओर सेवाओं के प्रभावी वितरण के लिए महत्वपूर्ण है।
- प्राथमिक पहचान के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकता हैं जिससे पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा मिल सके।
- आधार नम्बर मिसइनफार्मेशन से रहित होता हैं।
- यह जाति, धर्म, रंग भेद आदि को बढ़ावा नहीं देता और सीधे तौर पर समता समानता को प्रोत्साहन देता हैं।
- आधार नम्बर पहचान का विशेष आधार हैं।
- राजकोषीय बजट के प्रबंधन सुविधा बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा है।
- सार्वजनिक क्षेत्र के वितरण सुधार किया जा सके और भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए।
- आधार नम्बर एक रणनीतिक नीति उपकरण है।
- आधार कार्ड को एक स्थायी वित्तीय पते के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
- समाज के वंचित और कमजोर वर्ग के वित्तीय समावेशन की सुविधा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
- आधार नम्बर पहचान “डिजीटल इंडिंया” के प्रमुख स्तम्भों में से एक है।
- इसके माध्यम से देश के प्रत्येक निवासी को एक अद्वितीय पहचानप्रदान की गई है।
- भारत सरकार को देश के प्रत्येक निवासी तक सीधे पहुंचने में सक्षम बनाता है आधार नम्बर।
आधार की विशेषताएं
अद्वितीयताः इसे जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक डी-डुप्लीकेशन की प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।
- डी-डुप्लीकेशन की प्रक्रिया से यह जांचा जाता हैं की जिस व्यक्ति को आधार मिल रहा है वो पहले से डेटा बेस में शामिल हैं या नहीं। उससे सम्बंधित डेटा उपलब्ध हैं की नहीं।
- फिर उपलब्ध जानकारी का डेटाबेस रिकॉर्ड के साथ तुलनात्मक अध्ययन किया जाता हैं।
- आवेदनकर्ता ने अगर एक से अधिक बार नामांकन किया हैं तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाता है।
रैंडम संख्याः आधार संख्या रेण्डम एक नम्बर है जिसमें किसी भी प्रकार की आसूचना शामिल नहीं होती हैं।
स्केलेबल प्रौद्योगिकी संरचना
यूआईडी संरचना अनावृत और स्केलेबल है। निवासी के डेटा को केन्द्रीकृत रूप में संग्रहीत किया जाता है और देश में कहीं से भी उसका ऑनलाइन प्रमाणीकरण किया जा सकता है। एक दिन में 10 करोड प्रमाणीकरण करने के लिए आधार प्रमाणीकरण सेवा का गढन किया गया है।
ओपन स्रोत प्रौद्योगिकियां
ओपन सोर्स वास्तुकला विशिष्ट कम्प्यूटर हार्डवेयर, विशिष्ट भंडारण, विशिष्ट ओएस, विशिष्ट डेटाबेस विक्रेता या किसी विशिष्ट विक्रेता प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता को प्रतिबंधित करता है। इस प्रकार के एप्लीकेशन खुला स्त्रोत या खुली प्रौद्योगिकी का उपयोग कर निर्मित और एक विक्रेता तटस्थ ढंग से स्केलेविलिटी को एड्रेस करने और एक ही आवेदन के भीतर विषम हार्डवेयर के सह-अस्तित्व के लिए संरचित किए जा रहे हैं।
आधार कार्ड का उपयोग
- समाज के गरीब और सबसे कमजोर वर्गों के लिए भारत सरकार सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लिए वित्त पोषण करती हैं, ऐसे में आधार नंबर इस तरह की योजनाओं को पारदर्शी, सुशाषित बनाने के लिए कारगर साबित होता हैं और सही व्यक्ति तक लाभ पहुंचने का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
- सरकारों एवं सेवा एजेंसियों हेतु
- यह एक पूरा डेटाबेस उपलब्ध करता है। यह सरकारों को लाभार्थियों के सटीक डेटा प्रदान करता है।
- सरकारी विभागों और सेवा प्रदाताओं के बीच समन्वय करने में सहयोग करता है।
- सही व्यक्ति तक कल्याण कार्यक्रमों को पहुंचना।
- लक्षित लाभार्थियों तक कल्याणकारी कार्यक्रमों को पहुंचने का मार्ग सुनिश्चित किया जा सकता हैं, आधार के माध्यम से ऐसे लोगों को सुनिचित किया जा सकता है।
- मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकती है।
- सटीक जानकारी उपलब्ध होगी तो किसी भी विकास कार्यक्रम के लिए सही वितरण किया जा सकेगा और मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
- पहचान का एक पोर्टेबल सबूत
- एक बार आधार नंबर बन जाने के बाद बार बार तमाम पहचान दस्तावेजों को दिखाने से रहत मिल जाती हैं यह पहचान का एक पोर्टेबल सबूत होता हैं जिसे कभी भी कहीं भी ऑनलाइन आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से सत्यापित किया जा सकता है और कही भी कभी भी इसको प्रयोग किया जा सकता है।
आधार नंबर का लक्ष्य और उद्देश्य
इसका लक्ष्य भारतवासियों को एक विशिष्ट पहचान उपलब्ध करना हैं जिसको डिजिटल माध्यम से कहीं भी आराम से सत्यापित किया जा सके। एक गतिशील पहचान प्रदान करना हैं, आधार नंबर प्रदान करना
- पारदर्शिता
- सत्यनिष्ठा
- सहयोगात्मक दृष्टिकोण तथा सहयोगियों का आदर
- भारत के नागरिकों को उत्कृष्ट सेवा प्रदान करना
- गुणवत्ता में निरंतर सुधार करते रहना
- नवीन परिवर्तन की प्रेरणा से सहयोगियों को उनके विकास के लिए मंच प्रदान करना।
- भारत में कही भी, कहीं भी अपनी प्रामाणिक पहचान दी जा सके इसके लिए काम करना।
- बहुत सारे दस्तावेजों के स्थान पर एक विश्वसनीय पहचान देना।
अगर आप अपना आधार नंबर नहीं देना कहते हैं तो भी आप अपना काम करा सकते हैं यूआईडीएआई (UIDAI) इसका एक और विकल्प देता है। ये विकल्प है वर्चुअल आईडी। यह एक अस्थाई आईडी होता है जो एक समय के बाद रद्द हो जाता है। इसको आधार नंबर के विकल्प के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है।
जानिए कैसे होता है VID जनरेट:
- जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक जानकारी शामिल है
- इसके लिए आधार नंबर होना आवश्यक है
- वीआईडी को समय-समय पर बदला जा सकता है
- एक दिन में दो वीआईडी जनरेट नहीं की जा सकती है
- इसके लिए यूआईडीएआई की वेबसाइट https://uidai.gov.in पर जाना होगा
- होम पेज पर आधार सर्विस ऑप्शन होता है
- उसमे वर्चुअल आईडी जनरेट करने का ऑप्शन होता है
- इस ऑप्शन पर क्लिक करे जिससे नया पेज खुल जायेगा
- इस नए पेज में अपना आधार नंबर और सिक्योरिटी कोड डाले
- इसके बाद आपके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा
- जिसको सब्मिट करना होगा और फिर आप VID जनरेट कर सकते हैं
- VID की मदद से आप अपना आधार नंबर किसी के साथ शेयर किए बिना केवाईसी सत्यापन कर सकते हैं
आधार नंबर का इतिहास
- 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्ट सौंपी गई थी जिसके अंतर्गत सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए पहचान पत्र की सिफारिश की गई थी।
- साल 2001 में लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता वाली समिति ने आईडी कार्ड की सिफारिश को मंजूरी दे दी थी और इस रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि “multi-purpose National Identity Card” परियोजना जल्द ही देश में शुरू की जाएगी।
- 28 जनवरी 2009 : UIDAI (Unique Identification Authority of India) नामक संस्था की स्थापना हुई।
- 23 जून 2009 : आधार परियोजना का नेतृत्व करने के लिए नंदन नीलेकणि (सह-संस्थापक, इंफोसिस ) को नियुक्त किया गया।
- 2010 :देश भर में नामांकन अभियान की शुरुआत की गई।
- 2010 UIDAI का प्रतीक चिन्ह जारी किया गया।
- 29 सितंबर 2010 : पहला यूआईडी नंबर महाराष्ट्र के नंदुरबार के निवासी को जारी किया गया था।
- 23 सितंबर 2013 : देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि केंद्र कि जिनके पास आधार कार्ड नहीं हैं उनको सरकारी लाभ देने से इनकार नहीं कर सकता है और यह भी स्पष्ट किया कि आधार स्वैच्छिक है मगर अनिवार्य नहीं।
- 1 जुलाई 2014 : नीलेकणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली से मुलाकात की और उन्हें यूआईडीएआई (यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के लाभ और विशेषताओं के बारे में जानकारी दी।
- 5 जुलाई 2014 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए हरी झंडी दी और साथ ही पासपोर्ट के साथ इसको जोड़ने के लिए विचार विमर्श करने का आदेश दिया।
- 11 मार्च 2016 : आधार विधेयक, 2016 को लोकसभा में पारित किया गया।
- राज्यसभा ने गोपनीयता के मुद्दों विचार करते हुए इसको कुछ सिफारिशों के साथ वापस भेज दिया।
- सिफारिशों को लोकसभा ने अस्वीकार कर दिया और आधार अधिनियम, 2016 को लागू कर दिया गया।
- 15 सितंबर 2016 : सरकार ने घोषणा की कि सरकारी सब्सिडी के लिए आधार कार्ड अनिवार्य होगा।
- 4 अक्टूबर 2016 : रसोई गैस सब्सिडी के लिए आधार कार्ड अनिवार्य हुआ।
- जनवरी 2017 : भारत सरकार ने करीब 30 से ज्यादा केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बना दिया।
- 7 फरवरी 2017 : सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को यह निर्देश दिया कि सभी आधार नंबर को मोबाइल नंबरों से जोड़ा जाए।
- 27 मार्च 2017 : सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सरकार कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार नंबर को अनिवार्य नहीं बना सकती है।
- मार्च 2019: आधार नंबर को बैंक खातों और सिम कनेक्शन से जोड़ने का अध्यादेश केंद्रीय कैबिनेट से मंजूर हो गया।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण : परिचय
- यूआईडीएआई एक सांविधिक प्राधिकरण है।
- 12 जुलाई, 2016 को इसकी स्थापना भारत सरकार द्वार अधिनियम, 2016 (आधार अधिनियम, 2016) के प्रावधानों के अंतर्गत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत की गई।
- यूआईडीएआई अपने अस्तित्व में आने से पहले योजना आयोग के तहत कार्य करता था।
- यूआईडीएआई की स्थापना के पीछे लक्ष्य यही था कि भारत के सभी निवासियों को “आधार” नाम से एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) प्रदान की जाए।
- प्रथम यूआईडी नम्बर महाराष्ट्र के निवासी, नन्दूरबार को 29 सितम्बर 2010 को जारी किया गया था।
- यूआईडीएआई अब तक 120 करोड़ से अधिक भारतीय निवासियों को आधार नम्बर प्रदान कर चुका हैं।
- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का मुख्यालय नई दिल्ली में है।
- देशभर में आठ क्षेत्रीय कार्यालय (आरओ) हैं।
- यूआईडीएआई के दो डेटा सेंटर, एक हेब्बल (बैंगलूरू) कर्नाटक में और दूसरा मानेसर (गुरुग्राम) हरियाणा में है।
आधार अधिनियम 2016 के तहत्, यूआईडीएआई के कार्य
- आधार नामांकन और उसका प्रमाणीकरण करना।
- आधार जीवन चक्र के सभी चरणों के प्रबंधन और संचालन करना।
- व्यक्तियों को आधार नम्बर जारी करना।
- प्रमाणीकरण करने के लिए नीति, प्रक्रिया और प्रणाली विकसित करना और उसको सुचारु करना।
- पहचान जानकारी उपलब्ध करना।
- प्रमाणीकरण रिकार्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदार है।
कैसे बनाए आधार कार्ड
आज आधार पहचान का सबसे अहम दस्तावेज बन गया है आधार कार्ड बनाने के लिए जरूरी कुछ महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स होते हैं जिनके होने से आधार कार्ड आसानी से बन जाता हैं
- सबसे पहले अपने नजदीकी आधार केन्द्र का पता ढूंढे।
- आधार सेंटर पर ऑनलाइन एप्वाइंटमेंट की सुविधा है, इससे आप पहले से ही एप्वाइंटमेंट ले सकते हैं।
- इसके लिए UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट https://uidai.gov.in/ पर जाएं।
- अपने साथ वोटर आइडी कार्ड, राशन कार्ड और पैन कार्ड ले जाएं।
- आपके पास जो डाक्यूमेंट हो वो कम से कम 6 महीने पुराने होने चाहिए।
- अपने साथ ओरिजनल कॉपी लेकर जाए।
- फार्म लेकर भरे और फार्म भरकर जमा करने के बाद बॉयोमैट्रिक डेटा लिया जाता है इसमें आपकी दसों उंगलियों के फिंगर प्रिंट, आंख की आइरिस की डेटा और तस्वीर ली जाती है।
- जानकारी सबमिट करने के बाद आधार सेंटर से 14 अंकों का एक एकनॉलेजमेंट स्लिप दिया जाता है इससे से ही बाद में आधार कार्ड आपको कब मिलेगा इसकी जानकारी मिलती हैं।
- स्लिप पर दर्ज 14 अंकों के नंबर से बाद में आधार कार्ड डिजिटली निकाला जा सकता है
तीन तरह के डाक्यूमेंट्स साथ रखिये
- एक,आपकी पहचान का डाक्यूमेंट्स।
- दो, पते के लिए डॉक्यूमेंट्स।
- तीन, जन्मतिथि के लिए सर्टिफिकेट।
यूआईडीएआई प्राधिकरण की संरचना
प्राधिकरण की संरचना के अनुसार उसके अंतर्गत एक अंशकालिक अध्यक्ष, दो अंशकालिक सदस्य और एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जो प्राधिकरण के सदस्य सचिव भी होंगे, की नियुक्ति की जाती है।
श्री जे. सत्यनारायण, अध्यक्ष (अंशकालिक), यूआईडीएआई
- 1977 आन्ध्र प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक अधिकारी हैं।
- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अंशकालिक अध्यक्ष हैं।
- पूर्व में 2012 से 2014 तक उन्होंने इलैक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में बतौर सचिव कार्य किया ।
डॉ. आनन्द देशपाण्डेय
- सदस्य (अंशकालिक) ,यूआईडीएआई।
- डा. आनन्द देशपाण्डे को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई)के अंशकालिक सदस्य के रुप में नियुक्त किया गया है।
- पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के संस्थापक रहे हैं।
डा. अजय भूषण पाण्डेय
- मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ), यूआईडीएआई।
- डा. अजय भूषण पाण्डेय भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हैं।
- वर्ष 2010 में भारत में इसकी शुरुआत के बाद से ही आधार का संचालन कर रहे हैं।
- डा. अजय भूषण पाण्डेय भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और उनको 30 साल का अनुभव हैं |
- वर्ष 2009 में अपने कैरियर में उत्कृष्ट नेतृत्व उपलब्धियों हेतु उन्हें मिनेसोटा विश्वविद्यालय द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय विशिष्ट लीडरशीप अवार्ड से सम्मानित किया गया।
बेनामी संपत्ति से निपटने के लिए सरकार उठा रही हैं बड़ा कदम
प्रॉपर्टी किसकी हैं और उसका मालिक कौन हैं अब ये पता लगाना मुश्किल नहीं होगा क्योंकि बेनामी संपत्ति से निपटने के लिए मोदी सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं प्रॉपर्टी ओनरशिप के लिए केंद्र सरकार एक कानून ला रही है, जिसमें अपनी फिक्स्ड एसेट्स की ओनरशिप के लिए आधार नंबर से लिंक कराना अब जरूरी होगा| एक पांच सदस्यों की समिति इस ड्राफ्ट की रूप रेखा बना रही हैं जो अन्य राज्यों के साथ समन्वय भी करेगी, केंद्र सरकार इसका पूरा मोडल बनाकर राज्य सरकारों को देगी क्योंकि संपत्ति से जुड़े मामले राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, ऐसा होने पर आधार और मजबूत आधार बन जायेगा।
source: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की वेबसाइट