लॉकडाउन के बाद पहले से बेहद अलग होगा मेट्रो का सफर, कोरोना काल में क्या होंगे नए नियम?
आखिरकार वही हुआ, जिसका अंदाजा सभी को था। कोरोना वायरस की वजह से देशभर में जारी लॉकडाउन को अगले 14 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। यानी 18 मई से 31 मई तक लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू होगा। गृह मंत्रालय की ओर से गाइडलाइन जारी कर दी गई है। कयास लगाए जा रहे थे कि अब दिल्ली मेट्रो को लोगों के आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रस्ताव दिया था कि मेट्रो सेवाओं को सीमित तरीके से फिर से शुरू किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हवाई सेवाओं के साथ-साथ मेट्रो और रेल सेवा बाधित है।
हो चुकी थी मेट्रो स्टेशन में मार्किंग
दिल्ली मेट्रो 22 मार्च से बंद है। यानी 'जनता कर्फ्यू' के दिन से मेट्रो सेवाएं बाधित है। यानी पिछले 57 दिन से बंद मेट्रो परिसर और स्टेशन में गंदगी का अंबार लग गया था। फिर उसे नए सिरे से साफ करने का अभियान चलाया गया। दिल्ली मेट्रो के सभी 248 स्टेशन, 2200 से भी ज्यादा मेट्रो कोच और सवारी ढोने वाले फीडर सर्विस के बसों को साफ कर सैनिटाइज कर लिया गया है। चंद दिन पहले मेट्रो की सीटों पर मार्किंग की जा रही थी। सामने आई तस्वीरों में फर्श पर निशान बनाया जा रहा था ताकि यात्री सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखे।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों की माने तो लॉकडाउन का इस्तेमाल लंबे समय से लंबित कार्यों को पूरा करने में किया जा रहा है। ट्रेन के एयर कंडीशनिंग प्रणाली की सफाई कर दी गई। सेवाओं के फिर से शुरू होने के बाद, सफाई और रखरखाव स्टाफ को हर चार घंटे में कीटाणुनाशक का छिड़काव करना होगा, टिकट वेंडिंग मशीनों के साथ-साथ लिफ्ट बटन और अन्य उपकरणों को लगातार सैनिटाइज किया जाएगा।
कितना बदल जाएगा मेट्रो का सफर?
अब जब लॉकडाउन 4.0 में मेट्रो सेवाएं बहाल नहीं की गई तो सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है कि खचाखच भरी मेट्रो ट्रेन और भीड़भाड़ वाले मेट्रो स्टेशंस में कोरोना काल के दौरान यात्राएं किस कदर बदलेगी।
- यात्रियों को अपने सेल फोन में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना होगा। इससे, यह पता लगता है कि सिर्फ वहीं लोग मेट्रो से यात्रा कर पाएंगे जिनके पास स्मार्टफोन हो। इसे कैसे लागू किया जाएगा व्यावहारिक रूप से देखा जाना बाकी है।
- एक समय में स्टेशन के केवल दो प्रवेश द्वार को ही खोला जा सकता है। CISF कर्मियों द्वारा थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी जाएगी। फ्लू जैसे लक्षण दिखाने वालों को प्रवेश करने से रोक दिया जाएगा और स्वास्थ्य अधिकारी ऐसे व्यक्तियों की आगे की जांच सुनिश्चित करेंगे।
- टोकन सिस्टम पूरी तरह बंद रखा जा सकता है यानी मेट्रो से यात्रा करने के लिए स्मार्ट कार्ड अनिवार्य हो जाएगा।
क्या ट्रेनों और स्टेशनों में भी कुछ बदलाव होगा?
- 285 स्टेशंस के बीच फैला 389 किमी लंबा मेट्रो जाल इस वैश्विक महामारी से पूरी तरह प्रभावित होगा। कभी जिन मेट्रो ट्रेन में पैर रखने की जगह नहीं होती थी, अब वह अपेक्षाकृत खाली होंगे।
- आपसे मेट्रो परिसर में भी अपने व्यवहार को बदलने की उम्मीद की जाएगी। स्टेशंस के फर्श मार्किंग टेप से रंग-बिरंगी नजर आएंगे, जिससे एक यात्री से दूसरे यात्री के बीच दूरी संभव हो सके।
- सीसीटीवी कैमरों से आपकी कड़ी निगरानी होगी, सोशल डिस्टेंसिंग नियम तोड़ने पर आपके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। 30 सेकंड के लिए खुलने वाले मेट्रो के गेट ज्यादा देर के लिए खुल सकते हैं ताकि सामाजिक दूरी सुनिश्चित की जा सके।
- ट्रेन के भीतर सीट क्षमता भी कम हो जाएगी। दो सीट के बीच में जगह छोड़नी होगी, जहां कोई यात्री नहीं बैठेगा। शायद वहां लोग अपने सामान रखने नजर आ सके।
लॉकडाउन के तीन चरण
पहला चरण: लॉकडाउन की शुरुआत 25 मार्च से हुई थी। तब इसे 14 अप्रैल तक यानी 21 दिन के लिए लागू किया गया था। इस दौरान केवल जरूरी वस्तुओं की दुकानें खोलने की अनुमति दी गई थी और बाकी सभी तरह की सार्वजनिक सेवाओं पर प्रतिबंध था।
दूसरा चरण: लॉकडाउन का तीसरा चरण 19 दिन का था जो 15 अप्रैल से तीन मई तक रहा। इस दौरान रेड जोन के अलावा ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन में दुकानों को खुलने की अनुमति दी गई थी।
तीसरा चरण: चार मई से 17 मई तक यानी 12 दिन के लॉकडाउन के तीसरे चरण में कई राहतें दी गईं। रेड जोन के अतिरिक्त ग्रीन और ऑरेंज जोन में अन्य दुकानों को खुलने की अनुमति दी गई। प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेन और बसों की शुरुआत की गई। अन्य लोगों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई गईं। इसके साथ ही 'वंदे भारत मिशन' और 'ऑपरेशन समुद्रसेतु' के जरिए विभिन्न देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने की शुरुआत की कई।