{"_id":"67c81b65389c2c67d40c3067","slug":"this-change-will-come-in-the-internet-world-in-june-govt-has-made-full-preparations-know-service-2025-03-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Satellite Internet: जून में इंटरनेट की दुनिया में आएगा ये बदलाव, सरकार ने की पूरी तैयारी; जानिए इसके बारे में","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Satellite Internet: जून में इंटरनेट की दुनिया में आएगा ये बदलाव, सरकार ने की पूरी तैयारी; जानिए इसके बारे में
Wed, 05 Mar 2025 03:20 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 05 Mar 2025 03:20 PM IST
सार
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण सैटेलाइट कम्युनिकेशन के प्राइसिंग और उपयोग पर सिफारिशों के एक सेट को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। इसे पिछले दो वर्षों से तैयार किया जा रहा है।
विज्ञापन
इंटरनेट
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
आने वाले दिनों में देश में इंटरनेट सर्विस को लेकर अहम बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे यूसर्ज का सर्विस का अंदाजा और अनुभव दोनों बदल जाएगा। दरअसल, केंद्र सरकार देश में जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का शुरू करने जा रही है। सरकार इस वर्ष जून में इस सेवा की शुरुआत कर सकती है। दूरसंचार नियामक इस सर्विस के लिए बेस तैयार करने में जुटा है, जो गांवों से लेकर समुद्र तक इंटरनेट पहुंचाने में सक्षम है।
विज्ञापन
सूत्रों का कहना है कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण सैटेलाइट कम्युनिकेशन के प्राइसिंग और उपयोग पर सिफारिशों के एक सेट को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। इसे पिछले दो वर्षों से तैयार किया जा रहा है। जैसे ही इसकी रूपरेखा तैयार हो जाएगी। इसके बाद इसका स्पेक्ट्रम एलोकेट किया जाएगा। इसमें रिलायंस जियो इन्फोकॉम, भारती एयरटेल और स्टारलिंक द्वारा सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की तैयारी कर रहे हैं।
विज्ञापन
सूत्रों का कहना है कि ट्राई जल्द ही सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के लिए रेगुलेटरी ढांचा पेश करने वाली है। इस ढांचे में स्पेक्ट्रम आवंटन, मूल्य निर्धारण और रेवेन्यू पार्टनरशि मॉडल जैसी महत्वपूर्ण बातें शामिल होंगी। दरअसल, ट्राई यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ये नियम तेजी से दूरसंचार विभाग द्वारा मंजूर किए जाएं, ताकि इस पर कोई विवाद न हो। ट्राई मार्च तक अपनी सिफारिशें सौंप सकती है। एक शॉर्ट कंसल्टेशन पीरियड के बाद इन्हें डिजिटल कम्युनिकेशन कमिशन द्वारा बिना ज्यादा बदलाव के लागू किया जाएगा। इसके बाद स्पेक्ट्रम नीलामी प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें 2-3 महीने लग सकते हैं। जून तक सैटेलाइट इंटरनेट ऑपरेटर व्यावसायिक रूप से सेवाएं शुरू कर सकते हैं और राजस्व उत्पन्न करने लगेंगे।
विज्ञापन
ऐसे काम करता है सैटेलाइट इंटरनेट
सैटेलाइट इंटरनेट एक वायरलेस (बिना तार की) इंटरनेट की एक सर्विस है। ब्रॉडबैंड की तुलना में यह सर्विस बहुत आगे है। खास बात है कि यह उन इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी देता है जहां केबल या मोबाइल टावर की सुविधा नहीं होती। सैटेलाइट इंटरनेट में स्पेस में मौजूद सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है। सैटेलाइट इंटरनेट में सैटेलाइट्स का उपयोग किया जाता है, जो धरती पर मौजूद रिसीवर से जुड़ते हैं। यह रिसीवर मोबाइल फोन या लैपटॉप जैसे उपकरणों को इंटरनेट डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं।
भारत सरकार ने 2020 से 2022 के बीच स्पेस सेक्टर को उदार बनाया, जिससे सैटेलाइट स्पेक्ट्रम और इंफ्रास्ट्रक्चर तक निजी कंपनियों की पहुंच संभव हो सकी। सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू होने से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच सकेगा। यह खासतौर पर उन इलाकों के लिए फायदेमंद होगा, जहां फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क स्थापित करना कठिन है। भारत में इसके शुरू होने से शिक्षा, व्यापार, हेल्थकेयर और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। दुनिया के कई देशों में सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, यह ब्रॉडबैंड इंटरनेट की तुलना में ज्यादा महंगा है. क्योंकि, सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी लागत ज्यादा होती है।