फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Third HC judge to decide on stay on formation of Fact Checking Unit to identify fake news against govt

New IT Rules: 'फैक्ट चेकिंग इकाई के गठन पर रोक के मुद्दे पर तीसरे जज करेंगे फैसला', बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी

Thu, 08 Feb 2024 09:29 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 08 Feb 2024 09:29 PM IST
सार

New IT Rules: बंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत फैक्ट चेकिंग यूनिट (एफसीयू) के गठन पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर तीसरे न्यायाधीश फैसला करेंगे।

विज्ञापन
Third HC judge to decide on stay on formation of Fact Checking Unit to identify fake news against govt
bombay high court

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत फैक्ट चेकिंग यूनिट (एफसीयू) के गठन पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर तीसरे न्यायाधीश फैसला करेंगे। इससे पहले, पिछले महीने (31 जनवरी) उच्च न्यायालय की ओर से इस मुद्दे पर दो न्यायाधीशों का खंडित फैसला आया था। न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने याचिकाओं का समर्थन किया था और कहा था कि नए नियम सेंशरशिप के समान हैं। वहीं, न्यायमूर्ति नीला गोखले ने सरकार का पक्ष लेते हुए कहा था कि नए नियमों से अभिव्यक्ति की आजादी पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। 

विज्ञापन

न्यायमूर्ति पटेल ने अपने फैसले में कहा था कि नए नियम सेंसरशिप की श्रेणी में आते हैं। जबकि, न्यायमूर्ति गोखल ने कहा था कि नियमों का अभिव्यक्ति की आजादी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। तब अदालत ने कहा था कि इस मुद्दे को तीसरे न्यायाधीश के पास भेजा जाएगा और उनकी राय ली जाएगी। जिसके बाद ही फैसला सुनाया जाएगा। उस समय सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा था कि सरकार नए नियमों के तहत फैक्ट चेकिंग इकाई का गठन तब तक नहीं करेगी, जब तक अदालत से अंतिम फैसला नहीं आ जाता। न्यायमूर्ति पटेल ने कहा था कि फैक्ट चेकिंग इकाई  को दस दिनों के लिए आगे बढ़ाया जाए। इसे सॉलिसिटर जनरल ने मान लिया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

याचिकाएं स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ट ऑफ इंडिया (ईजीआई) और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैग्जीन की ओर से दायर की गई हैं। न्यायमूर्ति पटेल और न्यायमूर्ति गोखले की पीठ ने गुरुवार को कहा कि नए नियमों की संवैधानिक वैधता के मुख्य मुद्दे पर और एफसीयू पर अंतरिम रोक जारी रखने की आवश्यकता है या नहीं, इस पर उनकी अलग-अलग राय है। इसलिए, एफसीयू के गठन पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसला पारित करने से पहले इस मुद्दे को तीसरे न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है। 

विज्ञापन

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नए संशोधित नियम मनमाने और असंवैधानिक हैं। न्यायमूर्ति पटेल ने नियमों को असंवैधानिक करार देते हुए इन्हें रद्द कर दिया। जबकि, न्यायमूर्ति गोखले ने इन्हें बरकरार रखा और याचिकाओं को खारिज किया। न्यायमूर्ति पटेल ने अपने 148 पन्नों के फैसले में संशोधित नियमों को किया। उन्होंने कहा कि नए नियम न केवल सेंशरशिप के बहुत करीब हैं, बल्कि उपयोगकर्ता (यूजर) की सामग्री को भी सेंसरशिप के दायरे में लाता है। वहीं, न्यायमूर्ति गोखले ने अपने 92 पन्नों के फैसले में कहा कि नियम उपयोगकर्ता के अधिकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते हैं।  

केंद्र सरकार ने पिछले साल छह अप्रैल को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में कुछ संशोधन किए थे। जिसमें सरकार से जुड़ी फर्जी, झूठी या भ्रामक ऑनलाइन सामग्री के लिए फैक्ट चेकिंग इकाई के गठन का प्रावधान भी शामिल था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed