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चौराहे पर भिड़े भारत और चीन, बॉर्डर मसला नहीं सुलझा तो जंग के लिए रहें तैयार

Mon, 03 Jul 2017 03:22 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Mon, 03 Jul 2017 03:22 PM IST
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think tank says, War may be possible between india and china
- फोटो : AP
सिक्किम से लगती सीमा पर भारत और चीन के बीच गतिरोध जारी है। दोनों देशों के बीच विवाद की जड़ है डोकुला का वो चौराहा, जो भारत-चीन और भूटान को एक साथ जोड़ता है। इसी इलाके में निर्माण को लेकर भारत और चीन आमने सामने हैं।
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हालांकि भारत का सीधा झगड़ा चीन से नहीं है, बल्कि भूटान का रक्षा सहयोगी होने के कारण भारत को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। वहीं कई दशकों में यह पहली बार हुआ है कि विवाद एक महीने लंबा खिंच गया है, ऐसे में दोनों देशों के बीच जंग की आशंकाएं एक बार‌ फिर सर उठाने लगी हैं।
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दो दिन पहले ही चीन के विदेश मंत्री ने अपरोक्ष रूप से भारत को धमकी देते हुए 1962 के युद्ध से सीख लेने की नसीहत दी थी, अब चीनी मीडिया और एक थिंक टैंक ने दोनों देशों के बीच युद्ध के आसार की भविष्यवाणी कर दी है।
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अपनी संप्रभुता के लिए युद्ध से भी नहीं हिचकेगा चीन

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बता दें कि भारत की चीन के साथ लगती 3,488 किमी लंबी सीमा है, जो सिक्किम में 220 किलोमीटर से ज्यादा का एरिया कवर करती है। इस क्षेत्र में अक्सर चीन की दखलअंदाजी के कारण विवाद की स्थिति रहती है। मौजूदा विवाद भी इसी सीमा को लेकर है।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स डेली ने चीनी विशेषज्ञों और एक थिंक टैंक से बातचीत के आधार पर लिखे गए लेख में भविष्यवाणी की है कि चीन अपनी संप्रभुता को बचाए रखने के लिए भारत से युद्ध करने में बिल्कुल नहीं हिचकेगा।

लेख में 1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए बताया गया है कि चीन भी अब पुराने दौर वाला चीन नहीं रहा। लेख में यह संदर्भ भारत के रक्षामंत्री अरुण जेटली के उस बयान के बाद दिया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत 1962 वाला भारत नहीं है तबसे अब तक बहुत कुछ बदला है।

विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध से दोनों देशों को होगा नुकसान, अमेरिका उठाएगा फायदा

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लेख में शंघाई म्यूनिसिपल सेंटर के इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर वांग देहुआ के हवाले से बताया गया है कि दोनों देशों के बीच जारी मौजूदा‌ विवाद युद्ध की वजह भी बन सकता है, क्योंकि चीन अपनी संप्रभुता से किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।

वांग के अनुसार 1962 में चीन को भारत से उस समय युद्ध करना पड़ा था जब उसने हमारी सीमा में अतिक्रमण कर लिया था। उस युद्ध की वजह से चीन को 722 और भारत को 4383 सैनिकों का नुकसान उठाना पड़ा था।

हालांकि विशेषज्ञों ने ये भी माना कि दोनों देशों के बीच जारी विवाद को आपसी बातचीत के जरिए ही सुलझाना चाहिए। हालांकि एक अन्य विशेषज्ञ झाओ गैंचेंग युद्ध के खतरों को लेकर आगाह भी करते दिखते हैं, झाओ के अनुसार दोनों महाशक्तियों के बीच युद्ध के हालातों का खामियाजा तो दोनों देश भुगतेंगे लेकिन फायदा कोई तीसरा उठा ले जाएगा। उनका इशारा अमेरिका की तरफ रहा।

झाओ ने भारत को नसीहत देते हुए कहा कि उसे अपना रवैया बदलकर चीन के साथ अच्छे संबंधों का आनंद उठाना चाहिए जिसका फायदा दोनों देशों को होना चाहिए।

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