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Dussehra Today : दशानन के इन 10 रूपों का हो सर्वनाश, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने किया यह आह्वान
Wed, 05 Oct 2022 01:45 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 05 Oct 2022 01:45 PM IST
सार
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने अशिक्षा, अज्ञानता, अक्षमता, अभाव, अहंकार, अभद्रता, अराजकता, असामाजिकता, अत्याचार व अन्याय को बताया असुर। मंच ने कहा कि शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष, सर तन से जुदा जैसे हेट स्पीच और 'आतंकवादियों के बम विस्फोट' पर त्वरित कार्रवाई हो।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने देशवासियों को दशहरे की हार्दिक बधाई देने के साथ ही आधुनिक दशानन के 10 रूपों- अशिक्षा, अज्ञानता, अक्षमता, अभाव, अहंकार, अभद्रता, अराजकता, असामाजिकता, अत्याचार और अन्याय जैसी बुराइयों को खत्म करने का आह्वान किया है।
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मंच के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने कहा कि जिस तरह तीन तलाक, अनुच्छेद 370 और 35A तथा पीएफआई रूपी रावण का केंद्र सरकार ने वध किया है वैसे ही अब वक्त आ गया है कि शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष, सर तन से जुदा जैसे हेट स्पीच और 'आतंकवादियों के बम विस्फोट' पर त्वरित कार्रवाई हो। इसके साथ ही 'जनसंख्या नियंत्रण' पर कानून, 'मजहबी कट्टरता' खत्म कर भाईचारा बढ़ाने और 'समान आचार संहिता' लागू कर सामाजिक कुरीतियों और कानूनी कमियों व खामियों में संशोधन कर विजय प्राप्त की जाए।
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इस तरह दूर होगी मजहबी कट्टरता
मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल और शाहिद अख्तर ने देशवासियों से आह्वान किया कि सभी धर्मों, समुदायों, वर्ग विशेष से मिल जुल कर दशहरे का पर्व हर्षोल्लास से मनाएं और देश की एकता, अखंडता, भाईचारे और समृद्धि को बनाए रखें। मंच की ओर से कहा गया कि यदि हम एक दूसरे की भावनाओं, विचारों, त्योहारों और धर्मों की कद्र करेंगे तो मजहबी कट्टरता दूर होगी जिससे भाईचारा बढ़ेगा और देश का चौमुखी विकास होगा।
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मंच के राष्ट्रीय संयोजक रजा हुसैन रिजवी और इस्लाम अब्बास ने कहा कि कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी समान नागरिक संहिता को लेकर बयान दिया था। उसमें कहा गया था कि गोवा बेहतरीन उदाहरण है वहां पुर्तगाल सिविल कोड 1867 लागू है, इसके तहत उत्तराधिकार और विरासत का नियम लागू है। अदालत ने कहा था कि यह देखने वाली बात है कि संविधान के नीति निर्देशक तत्व में समान नागरिक संहिता का जिक्र है और उम्मीद की गई थी कि सरकार इसे लागू करने का प्रयास करेगी, लेकिन अभी तक प्रयास नहीं हुआ। इसी तरह हिंदू लॉ 1956 में बनाया गया, लेकिन यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने का प्रयास नहीं हुआ।
धार्मिक परंपराओं व मूल अधिकारों में सामंजस्य की जरूरत : कुरैशी
भारत फर्स्ट के राष्ट्रीय संयोजक शिराज़ कुरैशी और इमरान चौधरी ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड, पर्सनल लॉ को लेकर लॉ कमीशन की रिपोर्ट पेश की गई थी तब कमीशन ने कहा था कि इस स्तर पर यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं है। मौजूदा पर्सनल कानूनों में सुधार की जरूरत है। धार्मिक परंपराओं और मूल अधिकारों के बीच सामंजस्य की जरूरत है। मंच का मानना है कि जैसे जैसे समय बीत रहा है समान आचार संहिता की जरूरतें सामने आ रही हैं और इसे लागू किया जाना जरूरी है।
कश्मीर में हुई बुराई पर अच्छाई की जीत, पत्थरबाज विलुप्त
मंच के नेता माजिद तालिकोटी और एम ए सत्तार ने कहा कि कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर को अलग संविधान, नागरिकता, झंडा देकर अलगाववाद का बीज बोया था जिसे मोदी सरकार ने खत्म कर दिखाया कि किस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। आज कश्मीर में तुष्टिकरण नहीं बल्कि राष्ट्रवादी सरकार अपने दृढ़ इच्छा शक्ति से जन जन में भारतीयता और अपनेपन का अलख जगा रही है। कश्मीर में 500 रुपये लेकर पत्थरबाजी करने वाले विलुप्त हो चुके हैं। कश्मीरी युवा पढ़ाई और खेल कूद में आगे बढ़ रहे हैं। कश्मीर के युवा उमरान मलिक आज न सिर्फ भारतीय क्रिकेट टीम के बल्कि विश्व के सर्वाधिक तेज गति से गेंद फेंकने वाले गेंदबाज हैं। पिछले कुछ समय में मोदी सरकार की पहल पर शिक्षा पर जो खास ध्यान दिया गया है इसका परिणाम घाटी से कई युवाओं के यूपीएससी की परीक्षा में कामयाबी के तौर पर भी देखा जा सकता है।
शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष तय की जाए
महिला विंग की राष्ट्रीय संयोजिका शहनाज अफजल और शालिनी अली ने कहा कि अब समय आ गया है कि कच्ची उम्र में शादी जैसी मानसिक रूप से दूषित और कुपोषित असमाजिक विचारधारा पर भी कानूनी तौर पर लगाम लगाया जाए। संयोजिकाओं में फातिमा अली और रेशमा हुसैन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सबल सजग सशक्त भारत के लिए जरूरी है कि मानसिक और शारीरिक रूप से विकसित आयु अर्थात 21 वर्ष में शादी की न्यूनतम उम्र तय की जाए। आज समस्या यह है कि 12 से 14 वर्ष की आयु में हजारों की तादाद में बच्चियों की शादी हो जाती है और 20 से 22 वर्ष की आयु पहुंचने तक वह 4 से 6 बच्चों की मां बन चुकी होती हैं।
चीन को हटना पड़ा डोकलाम से पीछे
मंच के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक खुर्शीद रजाक और इरफान अली का मानना है कि आज के आधुनिक युग में रावण को हराने के लिए शस्त्र उठाने की जरूरत नहीं होती है बल्कि शास्त्रार्थ करने की जरूरत होती है। मंच की ओर से उदाहरण देते हुए कहा गया कि चीन की तरफ से जब ऐसे हालात बना दिए गए, जिससे लगने लगा कि भारत को एक छोटे युद्ध के लिए धमकाया और उकसाया जा रहा है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हम चीन को युद्ध से नहीं संवाद से जवाब देंगे। इसके बाद भारत ने कूटनीतिक रूप से इतना दबाव बनाया कि बिना युद्ध के चीन को डोकलाम से पीछे हटना पड़ा।