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मुंबई के लाखों उत्तर भारतीय ऑटो रिक्शा चालकों पर मंडरा रहा कैंसर का खतरा
Tue, 14 May 2019 10:00 PM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Gaurav Pandey
Updated Tue, 14 May 2019 10:00 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
तंबाकू उत्पादों के सेवन की वजह से मुंबई के लाखों ऑटो चालकों पर कैंसर का शिकार होने का खतरा मंडरा रहा है। इनमें बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शाचालक उत्तर भारतीय हैं। मुंबई के कैंसर पेशेंट्स एड एसोसिएशन (सीपीएए) द्वारा ऑटो चालकों पर किए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
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सीपीएए ने करीब 35 हजार ऑटो चालकों के मुंह के स्वास्थ्य की जांच में पाया कि इनमें से 45 फीसदी में कैंसर के खतरे के लक्षण उभर चुके हैं। मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में आधिकारिक रूप से तीन लाख से ज्यादा ऑटो रिक्शाचालक हैं, जबकि अवैध रूप से चलने वाले ऑटोरिक्शा चार लाख से अधिक हैं।
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सीपीएए की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनीता पीटर ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत कहा कि आने वाले वर्षों में यह बड़ा खतरा है। मुंबई में करीब 70 से 80 फीसदी ऑटोचालक उत्तर भारतीय हैं। ज्यादातर ऑटोचालक तंबाकू, गुटका या पान मसाला खाते हैं। इससे इनके मुंह में अक्सर छाले रहते हैं। कैंसर की शुरुआत से पहले मुंह के अंदर सफेद दाग पड़ जाते हैं, जिन्हें मेडिकल की भाषा में ल्यूकोप्लेकिया कहा जाता है।
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इस स्टेज में तंबाकू उत्पादों का सेवन बंद नहीं किया तो खतरा बढ़ता जाता है। जो मुंह या गले के कैंसर के रूप में सामने आ सकता है। पीटर ने कहा कि सीपीएए इन ऑटोरिक्शा चालकों को तंबाकू का सेवन छोड़ने के लिए अभियान चलाएगा और उन्हें जागरूक बनाने के लिए मराठी के बजाय हिंदी में प्रचार करेगा। उन्होंने कहा कि ऑटोरिक्शा चालकों की जीवन परिस्थितियां बहुत अच्छी नहीं होती और वे तनाव की वजह के तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं परंतु भविष्य में कैंसर जैसे जानलेवा खतरे को देखते हुए उन्हें यह छोड़ देना चाहिए।