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दुनिया भारत की दरियादिली को हल्के में न ले : सुप्रीम कोर्ट

Sat, 14 Jan 2017 02:45 AM IST
राजीव सिन्हा/नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/नई दिल्ली Updated Sat, 14 Jan 2017 02:45 AM IST
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The world should not take lightly the generosity of India: Supreme Court

भारत में हुए गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों को दूसरे देशों की ओर से सौंपने से इनकार किए जाने पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा है कि विश्व को भारत की दरियादिली और उदारता को हल्के में नहीं लेना चाहिए। पीठ ने कहा है कि विश्व को तमाम देशों को भारत के कानून का भी सम्मान करना चाहिए।

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चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि भारत में खुले दिल से विदेशी नागरिकों का सम्मान व आदर सत्कार किया जाता है लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि दूसरे देश यहां के कानून का सम्मान न करें और बावजूद उसके वे वैसा ही सम्मान पाने की उम्मीद रखें।
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पीठ ने कहा कि हमारी दरियादिली और उदाहरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत दूसरे देशों से अपराधियों को सौंपने के लिए कहता है, वे इनकार कर देते हैं। ऐसे में हमें भी इतनी दरियादिली क्यों दिखानी चाहिए। खास कर तब जब वे हमारे देश के कानून का सम्मान नहीं करते हैं।
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शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी सूडान के दो नागरिक अमीर अहमद खम्स और उसके भाई की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इन दोनों ने भारत में रिफ्यूजी का दर्जा देने की गुहार की थी। जिसके बाद भारत सरकार ने इन दोनों को बंगलूरू के कॉलेज में पढ़ने की इजाजत दे दी थी।

दोनों को यहां पढ़ने की इजाजत दी

The world should not take lightly the generosity of India: Supreme Court

सूडान में उनके परिवार के सदस्यों की हत्या होने के बाद ये दोनों सूडान भाग गए थे, जबकि रिफ्यूजी स्टेट्स का आवेदन यूएनएचसीआर में लंबित है। इतना होने के बावजूद भारत सरकार ने दोनों को यहां पढ़ने की इजाजत दे दी थी। ये दोनों भाई ने बिना किसी अथॉरिटी को बताए बंगलुरू छोड़ गए और दिल्ली आ गए। एक भाई तीन महीने के लिए सूडान गया और वापस आया। यह सब विदेश मंत्रालय के समक्ष दिए शपथ का उल्लंघन कर किया गया। दोनों फिलहाल दिल्ली के डिटेंशन सेंटर में हैं।

सूडानी नागरिकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने पीठ से इन दोनों के प्रति मानवीय रवैया अपनाने की गुहार करते हुए कहा कि अगर उन्हें इन दोनों से मिलने की इजाजत दी गई तो यह शायद वह अदालत को बता पाएं कि दोनों ने ऐसा क्यों किया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सूडान वापस भेजा गया तो वहां उनकी हत्या हो सकती है।

इस पर पीठ ने वरिष्ठ वकील से कहा कि दोनों एक के बाद नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, बावजूद इसके आप उनकी पैरवी कर रहे हैं। पीठ ने उनसे कहा कि आप जरा सोचिए, अगर ये दोनों अमेरिका में होते और वहां के कानून का उल्लंघन करते तो क्या होता। पीठ ने कहा कि  दसरे देश हमारे देश की तरह सरल नहीं हैं। हालांकि बाद में पीठ ने दोनों के निर्वासन पर एक हफ्ते केलिए रोक लगाते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह से कहा कि वह कॉलिन को उन दोनों सूडानी नागरिकों से मिलवाने में मदद करें। अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।

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