कोरोना से जंग: सवालों के घेरे में 11 अधिकार प्राप्त समूह, नौकरशाहों ने केंद्र को ठीक सलाह नहीं दी या अनदेखी हुई
राहुल गांधी ने पीएम से कहा है कि वे तत्काल गंभीरता से कदम उठाएं। कई पूर्व आईपीएस अफसरों ने भी 'समूह' के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।
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देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने भयानक तबाही मचा रखी है। कोरोना से जंग के मामले में सरकार की तैयारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां, विपक्ष का लगातार हमला और वैज्ञानिकों की चेतावनी, इन सबके चलते केंद्र सरकार सवालों के घेरे में आ गई है।
ये सवाल यह बताने के लिए काफी हैं कि कहीं तो चूक हुई है। पिछले साल गठित 11 अधिकार-प्राप्त समूहों में शामिल नौकरशाहों ने केंद्र को ठीक सलाह नहीं दी या उनके सुझावों की अनदेखी हुई है, आजकल यही यक्ष प्रश्न चर्चा का विषय बना हुआ है।
शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी को जो पत्र लिखा है, उसमें भी इसका अप्रत्यक्ष जिक्र है। गांधी ने लिखा है, मुझे पता है कि आप लॉकडाउन के आर्थिक प्रभाव के बारे में चिंतित हैं। इस वायरस को भारत के अंदर और बाहर अपना विनाश जारी रखने की अनुमति देने के त्रासदीपूर्ण परिणाम होंगे और उसकी मानवीय लागत आपके सलाहकारों द्वारा सुझाई गई किसी भी आर्थिक गणना से अधिक होगी।
पूर्व नौकरशाहों ने भी केंद्र के 11 अधिकार प्राप्त समूहों की भूमिका पर सवाल खड़ा किया है। बता दें कि गत वर्ष जब कोरोना संक्रमण ने देश में पांव पसारे तो केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत 11 अधिकार प्राप्त समूहों का गठन किया था।
इनकी जिम्मेदारी में कोरोना संक्रमण को रोकने, लॉकडाउन के प्रभाव का अध्ययन, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना, देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना, कोरोना के इलाज के लिए दवा या वैक्सीन का निर्माण, वितरण, चिकित्सा उपकरण जैसे वेंटिलेटर व ऑक्सीजन और मेडिकल मैनपावर आदि मामलों में एक ठोस नीति बनाना, शामिल था।
सरकार से कहीं तो बड़ी चूक हुई : अस्थाना
इन समूहों से यह उम्मीद की गई थी कि ये समूह सरकार के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दलों के रूप में काम करेंगे। कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्र एवं राज्यों के बीच तालमेल स्थापित करेंगे। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में मौतों का जो मंजर सामने है, उसे देखकर 'अधिकार प्राप्त समूहों' की रिपोर्ट पर सवाल खड़े होते हैं।
अगर ऑक्सीजन संकट को लेकर अदालतों की टिप्पणियां देखें तो यह पता चलता है कि इन समूहों ने कितना काम किया है। दिल्ली उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी से 'हमें यही लग रहा है कि इस देश को भगवान ही चला रहे हैं', कोरोना की लड़ाई में केंद्र और राज्य सरकारों की तैयारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
46 किताबें लिखने वाले और लगभग 80 रिसर्च पेपर प्रस्तुत कर चुके पूर्व आईपीएस डॉ एन सी अस्थाना बताते हैं कि 'अधिकार प्राप्त समूहों' में केंद्र सरकार के टॉप नौकरशाह एवं विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट शामिल रहे हैं। कोरोना संक्रमण के मौजूदा हालात को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार से कहीं तो बड़ी चूक हुई है।
'अधिकार प्राप्त समूह' ने अपनी रिपोर्ट में क्या लिखा है। क्या उन्हें अंदाजा नहीं था कि कोरोना की दूसरी लहर आएगी। जब पूरी दुनिया में शोर मचा है कि कोरोना की दूसरी लहर आ रही है तो सरकार को संभल जाना चाहिए था। इन समूहों के पास छह-सात महीने का समय था। उनकी सिफारिश पर वेंटिलेटर व ऑक्सीजन से लेकर मेडिकल मैनपावर तक, अधिकांश समस्याओं का निदान हो जाना चाहिए था।
कैबिनेट सचिवालय से एडिशनल सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस और सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद कहते हैं, नौकरशाहों को बताना चाहिए कि उन्होंने सरकार को
कौन-सी सिफारिशें दी हैं। क्या सरकार ने उन पर अमल नहीं किया या 'अधिकार प्राप्त समूह' कोरोना की भावी चाल को समझने में नाकाम रहा है। देश में जो हालात बने हैं, उसे देखकर अधिकार प्राप्त समूहों पर सवाल उठना लाजमी है। लोग इनकी भूमिका के बारे में जानना चाहते हैं।
कई जगहों पर हुई है लापरवाही
जब सरकार को यह मालूम था कि कोरोना की दूसरी लहर सिर पर है तो उससे बचाव के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? सोमवार को देश के 13 राज्यों में कोरोना के मामले कम होने लगते हैं, लेकिन तीन दिन बाद रिकॉर्ड मामले देखने को मिलते हैं।
विपक्षी नेता पूछते हैं कि ये सब क्या हो रहा है। गत शनिवार को देश में 19.5 लाख टेस्ट हुए थे। सोमवार को ये टेस्ट घटकर 15 लाख रह गए। जब टेस्टिंग कम होगी तो कोरोना के मामले भी कम आएंगे। 29 अप्रैल को 600 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख मांग की थी कि देश में कोविड-19 के टेस्ट रिजल्ट का डेटा और अस्पतालों में मरीजों के इलाज का क्लीनिकल डेटा जारी किया जाए।
वैज्ञानिकों ने सलाह दी थी कि व्यापक स्तर पर जीनोम सर्विलांसिंग प्रोग्राम शुरु किए जाएं। इससे कोरोना के नए वैरियंट को पहचाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 30 अप्रैल को अधिकार प्राप्त समूहों के साथ आयोजित एक बैठक में कोविड से संबंधित स्थिति की समीक्षा की है।
आर्थिक और कल्याण उपायों पर गठित अधिकार प्राप्त समूह ने पीएम के सामने पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के विस्तार जैसे कदमों को लेकर एक प्रस्तुति दी थी। कोविड -19 महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के क्रम में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में अधिकार प्राप्त समूह -3 ने 26 अप्रैल को कोविड के मामलों में हाल में हुई वृद्धि से उत्पन्न प्रभावों से निपटने के बारे में एक लाख से अधिक सिविल सोसाइटी संगठनों (सीएसओ) के साथ समन्वित रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी से कहा, तत्काल ध्यान दें
हमारी समस्त आबादी का तेजी से टीकाकरण हो। पारदर्शी तरीके से कार्य करते हुए इस महामारी से संबंधित हमारे निष्कर्षों के प्रति शेष विश्व को सूचित करते रहें। आपकी सरकार के पास एक स्पष्ट, सुसंगत कोविड और टीकाकरण नीति के अभाव एवं ऐसे समय में जब यह बीमारी तेजी से फैल रही थी, उस हालत में, समय से पहले अपनी जीत का डंका बजाने ने भारत को एक बहुत ही खतरनाक स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।