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Waqf Law: देशभर में वक्फ संशोधन अधिनियम लागू, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना; जानें नए कानून में क्या-क्या
Tue, 08 Apr 2025 06:32 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Tue, 08 Apr 2025 06:32 PM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पांच अप्रैल को वक्फ संशोधन अधिनियम को मंजूरी दी थी। इसे संसद के बजट सत्र के दौरान पारित किया गया था। मंगलवार को केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन कानून लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी। आइए जानते हैं नए वक्फ कानून में क्या-क्या बदलाव हुए हैं...।
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वक्फ बोर्ड
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
वक्फ संशोधन अधिनियम आज से देशभर में लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी की है कि वक्फ अधिनियम को आठ अप्रैल से प्रभावी कर दिया गया है। पिछले सप्ताह संसद और राष्ट्रपति ने दी वक्फ संशोधन अधिनियम को मंजूरी दी थी। इसके बाद यह तय नहीं था कि नया कानून कब से लागू होगा। मंगलवार को केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि वक्फ संशोधन कानून आठ अप्रैल से प्रभावी होगा।
राष्ट्रपति ने दी थी मंजूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पांच अप्रैल को वक्फ संशोधन अधिनियम को मंजूरी दी थी। इसे बजट सत्र के दौरान संसद ने पारित किया था। कानून मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया था कि राष्ट्रपति ने दोनों विधेयकों को अपनी मंजूरी दे दी है। चार अप्रैल को राज्यसभा ने विधेयक के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 मतों से इसे पारित किया था, जबकि लोकसभा ने लंबी बहस के बाद तीन अप्रैल को विधेयक को मंजूरी दे दी थी। यहां 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने इसके विरोध में मतदान किया था।
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सुप्रीम कोर्ट में 10 याचिकाएं दायर
वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 10 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें राजनेताओं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिकाएं शामिल हैं। इन याचिकाओं में नए बनाए गए कानून की वैधता को चुनौती दी गई है। इसे लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है।
ये भी पढ़ें: वक्फ कानून पर देशभर में विरोध तेज, अब मुस्लिम लॉ बोर्ड ने भी खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
नए वक्फ कानून में क्या-क्या?
1. हर कोई अपनी संपत्ति 'वक्फ' नहीं कर सकेगा
कानून में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि वक्फ द्वारा उपयोगकर्ता का खंड हटाया गया है, और यह साफ किया गया है कि वक्फ संपत्ति से संबंधित मामले अब पूर्वव्यापी तरीके से नहीं खोले जाएंगे, जब तक कि वे विवादित न हों या सरकारी संपत्ति न हों। इसके अलावा वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का समर्थन किया गया है, ताकि वे वक्फ मामलों में रुचि रखने वाले या विवादों में पक्षकार बन सकें।
2. वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम, महिला सदस्यों का नामांकन
नए कानून में वक्फ बोर्डों के संचालन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जैसे कि अब बोर्ड में गैर-मुस्लिम और कम से कम दो महिला सदस्यों को नामित किया जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा, केंद्रीय वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री, तीन सांसद, दो पूर्व न्यायाधीश, चार 'राष्ट्रीय ख्याति' के व्यक्ति और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी होंगे, जिनमें से कोई भी इस्लामी धर्म से संबंधित नहीं होगा।
3. सरकारी अधिकारी को जांच की शक्ति
बता दें कि अगस्त 2024 में संसद में जो विधेयक पेश किया गया था, उसमें वक्फ से जुड़े विवादों के मामलों में जिला कलेक्टर को जांच की शक्ति दी गई थी। हालांकि, जेपीसी ने जिला कलेक्टर वाली शक्ति को खत्म करने पर सहमति जता दी और राज्य सरकार को अब इन मामलों की जांच करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नामित करने का अधिकार देना प्रस्तावित कर दिया।
ये भी पढ़ें: मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा, प्रदर्शनकारियों ने फूंकी गाड़ियां
4. वक्फ संपत्ति का केंद्रीय डाटाबेस में पंजीकरण
मौजूदा कानून के तहत पंजीकृत हर वक्फ संपत्ति की जानकारी अधिनियम लागू होने के बाद छह महीने के अंदर सेंट्रल डाटाबेस में देना जरूरी है। इतना ही नहीं डाटाबेस में किसी भी सरकारी संपत्ति को जिलाधिकारी के पास चिह्नित किया जाएगा, जो कि बाद में इस मुद्दे पर जांच कर सकेंगे। कानून में शामिल इस संशोधन में कहा गया है कि अगर वक्फ संपत्ति को केंद्रीय पोर्टल में नहीं डाला जाता तो इससे वक्फ की जमीन पर अतिक्रमण होने या विवाद पैदा होने पर अदालत जाने का अधिकार खत्म हो जाएगा। हालांकि, एक अन्य स्वीकृत संशोधन अब मुतवल्ली (कार्यवाहक) को राज्य में वक्फ न्यायाधिकरण की संतुष्टि बाद कुछ स्थितियों में पंजीकरण के लिए अवधि बढ़ाने का अधिकार देगा।
5. अंतिम नहीं होगा न्यायाधिकरण का फैसला
वक्फ कानून, 1995 के तहत वक्फ न्यायाधिकरण को सिविल कोर्ट की तरह काम करने की स्वतंत्रता दी गई थी। इसका फैसला अंतिम और सर्वमान्य माना जाता था। इन्हें किसी भी सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी सकती थी। ऐसे में वक्फ न्यायाधिकरण की ताकत को सिविल अदालत से ऊपर माना जाता था। हालांकि, कानून में अब वक्फ न्यायाधिकरण के गठन के तरीके को भी बदला जा रहा है। इसमें कहा गया है कि वक्फ न्यायाधिकरण में एक जिला जज होगा और एक संयुक्त सचिव रैंक का राज्य सरकार का अधिकारी सदस्य के तौर पर जुड़ा होगा। वक्फ संशोधन विधेयक में कहा गया कि न्यायाधिकरण का फैसला अंतिम नहीं होगा और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकेगी।
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The Central Government appoints the 8th day of April 2025 as the date on which the provisions of the Waqf Act shall come into force pic.twitter.com/eNKcQt3zLq
— ANI (@ANI) April 8, 2025विज्ञापन
राष्ट्रपति ने दी थी मंजूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पांच अप्रैल को वक्फ संशोधन अधिनियम को मंजूरी दी थी। इसे बजट सत्र के दौरान संसद ने पारित किया था। कानून मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया था कि राष्ट्रपति ने दोनों विधेयकों को अपनी मंजूरी दे दी है। चार अप्रैल को राज्यसभा ने विधेयक के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 मतों से इसे पारित किया था, जबकि लोकसभा ने लंबी बहस के बाद तीन अप्रैल को विधेयक को मंजूरी दे दी थी। यहां 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने इसके विरोध में मतदान किया था।
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सुप्रीम कोर्ट में 10 याचिकाएं दायर
वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 10 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें राजनेताओं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिकाएं शामिल हैं। इन याचिकाओं में नए बनाए गए कानून की वैधता को चुनौती दी गई है। इसे लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है।
ये भी पढ़ें: वक्फ कानून पर देशभर में विरोध तेज, अब मुस्लिम लॉ बोर्ड ने भी खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
नए वक्फ कानून में क्या-क्या?
1. हर कोई अपनी संपत्ति 'वक्फ' नहीं कर सकेगा
कानून में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि वक्फ द्वारा उपयोगकर्ता का खंड हटाया गया है, और यह साफ किया गया है कि वक्फ संपत्ति से संबंधित मामले अब पूर्वव्यापी तरीके से नहीं खोले जाएंगे, जब तक कि वे विवादित न हों या सरकारी संपत्ति न हों। इसके अलावा वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का समर्थन किया गया है, ताकि वे वक्फ मामलों में रुचि रखने वाले या विवादों में पक्षकार बन सकें।
2. वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम, महिला सदस्यों का नामांकन
नए कानून में वक्फ बोर्डों के संचालन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जैसे कि अब बोर्ड में गैर-मुस्लिम और कम से कम दो महिला सदस्यों को नामित किया जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा, केंद्रीय वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री, तीन सांसद, दो पूर्व न्यायाधीश, चार 'राष्ट्रीय ख्याति' के व्यक्ति और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी होंगे, जिनमें से कोई भी इस्लामी धर्म से संबंधित नहीं होगा।
3. सरकारी अधिकारी को जांच की शक्ति
बता दें कि अगस्त 2024 में संसद में जो विधेयक पेश किया गया था, उसमें वक्फ से जुड़े विवादों के मामलों में जिला कलेक्टर को जांच की शक्ति दी गई थी। हालांकि, जेपीसी ने जिला कलेक्टर वाली शक्ति को खत्म करने पर सहमति जता दी और राज्य सरकार को अब इन मामलों की जांच करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नामित करने का अधिकार देना प्रस्तावित कर दिया।
ये भी पढ़ें: मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा, प्रदर्शनकारियों ने फूंकी गाड़ियां
4. वक्फ संपत्ति का केंद्रीय डाटाबेस में पंजीकरण
मौजूदा कानून के तहत पंजीकृत हर वक्फ संपत्ति की जानकारी अधिनियम लागू होने के बाद छह महीने के अंदर सेंट्रल डाटाबेस में देना जरूरी है। इतना ही नहीं डाटाबेस में किसी भी सरकारी संपत्ति को जिलाधिकारी के पास चिह्नित किया जाएगा, जो कि बाद में इस मुद्दे पर जांच कर सकेंगे। कानून में शामिल इस संशोधन में कहा गया है कि अगर वक्फ संपत्ति को केंद्रीय पोर्टल में नहीं डाला जाता तो इससे वक्फ की जमीन पर अतिक्रमण होने या विवाद पैदा होने पर अदालत जाने का अधिकार खत्म हो जाएगा। हालांकि, एक अन्य स्वीकृत संशोधन अब मुतवल्ली (कार्यवाहक) को राज्य में वक्फ न्यायाधिकरण की संतुष्टि बाद कुछ स्थितियों में पंजीकरण के लिए अवधि बढ़ाने का अधिकार देगा।
5. अंतिम नहीं होगा न्यायाधिकरण का फैसला
वक्फ कानून, 1995 के तहत वक्फ न्यायाधिकरण को सिविल कोर्ट की तरह काम करने की स्वतंत्रता दी गई थी। इसका फैसला अंतिम और सर्वमान्य माना जाता था। इन्हें किसी भी सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी सकती थी। ऐसे में वक्फ न्यायाधिकरण की ताकत को सिविल अदालत से ऊपर माना जाता था। हालांकि, कानून में अब वक्फ न्यायाधिकरण के गठन के तरीके को भी बदला जा रहा है। इसमें कहा गया है कि वक्फ न्यायाधिकरण में एक जिला जज होगा और एक संयुक्त सचिव रैंक का राज्य सरकार का अधिकारी सदस्य के तौर पर जुड़ा होगा। वक्फ संशोधन विधेयक में कहा गया कि न्यायाधिकरण का फैसला अंतिम नहीं होगा और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकेगी।
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