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कोरोना वायरस: कैदियों और जेल स्टाफ के योगदान को मिली पहचान, 'जेल के नाम चिट्ठी' वीडियो में सामने आया दर्द

Sat, 11 Apr 2020 06:41 PM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Sat, 11 Apr 2020 06:41 PM IST
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The video has been made on prison inmates and staff contributions against the corona virus
सांकेतिक
देशभर में लगाए गए लॉकडाउन के बीच कई ऐसी जेलें हैं, जो इस दौरान अपना योगदान दे रही हैं। इन जेलों में सजा काट रहे कैदी इन दिनों मास्क, सैनिटाइजर, किट से लेकर आइसोलेशन वार्ड तक बनाने में जुटे हैं। इन कैदियों के इस योगदान को देखते हुए देश की जेल सुधारक वर्तिका नन्दा ने जेल के बंदियों और जेल स्टाफ को एक वीडियो समर्पित किया है। ढाई मिनट के इस वीडियो का शीर्षक है, 'जेल के नाम चिट्ठी'। 
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इस वीडियो में कैदियों और जेल स्टाफ का मनोबल बढ़ाया गया है। वीडियो में उन्हें राष्ट्र-निर्माण से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया गया है। इसमें इस बात पर खास तौर से जोर दिया गया है कि लॉकडाउन की वजह से पहली बार लोगों को जेल जैसी जिंदगी का अहसास हुआ है। हालांकि, वीडियो में यह भी बताया गया है कि लॉकडाउन के मुकाबले जेल की परिस्थितियां कहीं ज्यादा विकट हैं। 
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वीडियो में कहा गया है, "इस समय आप और बाहर के लोगों में कोई ज्यादा फर्क नहीं है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब बाहर के कई लोग खुद को जेल के बंदी जैसा ही महसूस करने लगे हैं। इससे यह उम्मीद भी की जा सकती है कि उन्हें आपकी तकलीफ का अंदाजा होगा।"
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दरअसल मौजूदा समय में देश में 1,339 जेलें हैं। इनमें करीब 4,66,084 कैदी बंद हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों पर ध्यान दें तो देश की जेलों में औसतन क्षमता से 117.6 फीसदी ज्यादा कैदी रहते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा बढ़ कर 176.5 फीसदी और सिक्किम में 157.3 फीसदी तक जाता है। 

इन आंकड़ों से यह साफ पता चलता है कि भारतीय जेलें अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भीड़ से लबालब हैं। ऐसे में कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को एक बार फिर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस समस्या की याद दिलानी पड़ी है। हालांकि, इसी का नतीजा रहा कि पिछले दो हफ्तों में देश की जेलों से बड़ी संख्या में कैदियों की रिहाई हुई है। 

कोरोना वायरस के खिलाफ जहां सरकारें, प्रशासन और कोरोना वॉरियर्स दिन-रात अपनी सेवा दे रहे हैं। वहीं, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केरल समेत कई राज्यों की जेलों में रहने वाले कैदी अपने योगदान से लोगों की मदद कर रहे हैं। ऐसे में यह वीडियो जेल के इन्हीं मददगार बंदियों के नाम है।


बता दें कि डॉ. वर्तिका नन्दा जेल सुधारक और तिनका तिनका अभियान की संस्थापक हैं, जिसका मकसद जेलों को आपस में जोड़ना और बंदियों की प्रतिभा को सामने लाते हुए जेल सुधार पर काम करना है। वर्तिका नन्दा के बनाए तिनका तिनका मॉडल के तहत 2019 में ‘‘आगरा जेल रेडियो’’ की शुरुआत हुई थी, जो मौजूदा समय में बंदियों का सबसे बड़ा सहारा बन गया है। दरअसल कोरोना के खतरे को देखते हुए मुलाकातें बंद कर दी गई हैं। ऐसे में जेल का रेडियो बंदियों के संवाद की जरूरतें पूरी कर रहा है।  
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